बीकानेर में इंसानियत की महक: जमीअत उलमा-ए-हिन्द ने पूगल की दो बेटियों के निकाह में की बड़ी मदद; दानदाताओं ने पेश की मिसाल

🤝 सामाजिक खिदमत | बीकानेर

जमीअत उलमा-ए-हिन्द बीकानेर ने पूगल तहसील के एक निर्धन परिवार की दो बेटियों की शादी की जिम्मेदारी उठाकर मानवता की अनूठी मिसाल पेश की है। भामाशाहों के अटूट सहयोग से बेटियों के सुखद गृहस्थ जीवन के लिए न केवल घरेलू सामान जुटाया गया, बल्कि उन्हें आत्मनिर्भर बनाने के संसाधन भी भेंट किए गए।

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मदद की मुख्य बातें:

  • पूगल तहसील के जरूरतमंद परिवार की दो बेटियों के निकाह में की गई बड़ी सहायता।
  • भामाशाहों के सहयोग से अलमारी, पलंग, कूलर और बर्तन जैसे जरूरी सामान जुटाए गए।
  • आत्मनिर्भर बनाने के उद्देश्य से दोनों बेटियों को भेंट की गईं हाथ सिलाई मशीनें।
  • निकाह के तात्कालिक खर्चों हेतु 2100-2100 रुपये की नकद राशि भी प्रदान की गई।
  • महासचिव मौलाना इरशाद क़ासमी ने समाज से नेकी के कार्यों में जुड़ने की अपील की।

भामाशाहों के सहयोग से संवरा बेटियों का भविष्य

बीकानेर। जिले की प्रतिष्ठित सामाजिक संस्था ‘जमीअत उलमा-ए-हिन्द’ की बीकानेर शाखा ने अपनी सामाजिक खिदमत की गौरवशाली परंपरा को आगे बढ़ाते हुए इंसानियत और आपसी भाईचारे की एक शानदार नजीर पेश की है। ग़ौरतलब है कि ग्रामीण क्षेत्र की पूगल तहसील के एक बेहद जरूरतमंद पिता की दो बेटियों के विवाह का मामला जब संस्था के संज्ञान में आया, तो महासचिव मौलाना मोहम्मद इरशाद क़ासमी के नेतृत्व में तुरंत राहत की मुहिम शुरू की गई।

तफ्तीश और परिवार की आर्थिक स्थिति का आकलन करने के बाद, संस्था ने शहर के भामाशाहों से सहयोग की पुरजोर अपील की थी। मौलाना क़ासमी ने बताया कि इस नेक कार्य के लिए समाज के कई संवेदनशील और नेकदिल लोग आगे आए। किसी ने बर्तन सेट का योगदान दिया, तो किसी ने अलमारी, पलंग, गद्दे और कूलर उपलब्ध करवाकर बच्चियों के उज्जवल भविष्य में अपनी भागीदारी सुनिश्चित की।

“समाज की एकजुटता और भामाशाहों का जज्बा ही वह ताकत है जो किसी भी मजबूर पिता की आँखों के आँसू पोंछ सकती है। यह सहयोग केवल सामान नहीं, बल्कि एक नए जीवन की नींव है।”

आत्मनिर्भरता पर जोर: प्रदान की गई सामग्री का विवरण

संस्था द्वारा प्रदान की गई सहायता सामग्री में बेटियों के सुखद गृहस्थ जीवन की हर छोटी-बड़ी जरूरत का ध्यान रखा गया है। सूत्रों के अनुसार, प्रदान की गई सूची में दो मजबूत अलमारियां, दो बॉक्स, दो पलंग मय गद्दे और गर्मी से राहत के लिए दो प्लास्टिक कूलर शामिल हैं। विशेष रूप से, बेटियों को आत्मनिर्भर बनाने के उद्देश्य से दो सिलाई मशीनें भी प्रदान की गईं। इसके अतिरिक्त, रसोई की जरूरतों के लिए 61-61 बर्तनों के दो भव्य सेट और शादी के तात्कालिक खर्चों के लिए 2100-2100 रुपये की नकद राशि सम्मान सहित सौंपी गई।

महासचिव मौलाना इरशाद क़ासमी ने कहा कि जमीअत उलमा-ए-हिन्द (बीकानेर) भविष्य में भी बेसहारा और जरूरतमंद परिवारों की खिदमत का यह सिलसिला जारी रखेगी। उन्होंने समाज के संपन्न वर्ग से आह्वान किया कि वे मानवीय सरोकारों से जुड़े ऐसे पुण्य कार्यों में बढ़-चढ़कर अपना योगदान दें। संस्था ने इस नेक मुहिम में प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रूप से सहयोग करने वाले सभी दानदाताओं का हृदय से आभार व्यक्त किया है।



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