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हादसे के मुख्य बिंदु:
- स्वरूपसर गांव की कनोलाई नाडी के पास स्थित ओमाराम भांभू की ढाणी में लगी आग।
- घर में रखा अनाज, नगदी, जेवर और जमीन के जरूरी दस्तावेज जलकर नष्ट।
- हादसे के वक्त गृहस्वामी मजदूरी पर और बच्चे स्कूल में थे।
- पत्नी भंवरी देवी ने जान पर खेलकर गैस सिलेंडर को बाहर निकाला, टला बड़ा धमाका।
- ग्रामीणों की सहायता के बावजूद आशियाने को नहीं बचाया जा सका।
धुएं का गुबार और मची चीख-पुकार
बीकानेर। जिले के ग्रामीण अंचलों में भीषण गर्मी के बीच आग का तांडव थमने का नाम नहीं ले रहा है। ग़ौरतलब है कि मंगलवार को स्वरूपसर गांव की रोही में ओमाराम भांभू की रहवासी ढाणी आग की भेंट चढ़ गई। पीड़ित परिवार के सदस्य रामलाल भांभू के अनुसार, आग इतनी तेज थी कि किसी को संभलने का मौका तक नहीं मिला। जिस समय यह हादसा हुआ, ओमाराम मजदूरी के लिए बाहर गए हुए थे और बच्चे स्कूल में अपनी पढ़ाई कर रहे थे। घर पर केवल गृहिणी भंवरी देवी थीं, जो पशुओं का दूध देने पास के रास्ते पर गई थीं।
तफ्तीश: जीवनभर की पूँजी हुई राख
भंवरी देवी ने जब ढाणी से काला धुआं उठते देखा तो वे चिल्लाती हुई मौके पर पहुँचीं, लेकिन तब तक आग विकराल रूप ले चुकी थी। शोर सुनकर पड़ोसी और अन्य ग्रामीण भी मदद के लिए दौड़े, मगर संसाधनों की कमी और तेज हवाओं के कारण दोनों झोपड़े पूरी तरह स्वाहा हो गए। तफ्तीश में यह दर्दनाक हकीकत सामने आई है कि आग में न केवल घर का सारा घरेलू सामान जल गया, बल्कि परिवार द्वारा संजोए गए गहने, नकद राशि और महत्वपूर्ण दस्तावेज भी राख के ढेर में बदल गए।
सूत्रों के अनुसार, भीषण अग्निकांड के बाद अब ओमाराम का परिवार खुले आसमान के नीचे आ गया है। ग्रामीणों ने प्रशासन से मांग की है कि पीड़ित परिवार की दयनीय स्थिति को देखते हुए उन्हें जल्द से जल्द सरकारी सहायता और मुआवजा प्रदान किया जाए। फिलहाल आग लगने के कारणों का स्पष्ट पता नहीं चल पाया है, लेकिन शॉर्ट सर्किट या भीषण गर्मी को इसकी संभावित वजह माना जा रहा है।
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