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इन्वेस्टिगेशन की मुख्य बातें:
- साइबर पुलिस ने संदीप स्वामी और मुकेश बिश्नोई को प्रोडक्शन वारंट पर दबोचा।
- आरोपी साइबर ठगों की रकम को सुरक्षित बैंक खातों में डलवाने की लेते थे गारंटी।
- ठगी की रकम के बदले कमीशन के रूप में ‘क्रिप्टो करेंसी’ हासिल करते थे आरोपी।
- क्रिप्टो फंड का इस्तेमाल गैंगस्टर रोहित गोदारा के लिए हथियार खरीदने में होता था।
- पुलिस ने 3 बैंक खातों में ₹50 लाख और अन्य खातों में करोड़ों के ट्रांजेक्शन ट्रेस किए।
अपराध का त्रिस्तरीय ‘नेक्सस’: ठगी से लेकर हथियार तक
बीकानेर। शहर की साइबर थाना पुलिस ने एक ऐसे जटिल और संगठित आपराधिक नेटवर्क का भंडाफोड़ किया है, जो देश की सुरक्षा और आमजन की जमापूंजी, दोनों के लिए खतरा बना हुआ था। ग़ौरतलब है कि पुलिस ने रामपुरा बस्ती के संदीप स्वामी और मुकेश बिश्नोई को गिरफ्तार कर जब कड़ी पूछताछ की, तो अपराधियों की एक त्रिस्तरीय (Three-tier) चेन उजागर हुई। इस कड़ी की पहली परत में वे साइबर ठग शामिल हैं जो देशभर में करोड़ों की ठगी करते हैं। दूसरी परत में संदीप और मुकेश जैसे लोग थे, जो इन ठगों को ‘सेफ बैंक अकाउंट्स’ उपलब्ध कराते थे। इस सेवा के बदले वे कमीशन के रूप में ‘क्रिप्टो करेंसी’ वसूलते थे, जिसे ट्रैक करना बेहद मुश्किल होता है।
करोड़ों के ट्रांजेक्शन का विश्लेषण और पड़ताल
साइबर पुलिस द्वारा की गई खातों की गहन समीक्षा में सामने आया है कि आरोपियों के केवल तीन खातों में ही 50 लाख रुपये से अधिक का संदिग्ध लेन-देन हुआ है। इसके अलावा, छानबीन के दौरान पाँच ऐसे अन्य बैंक खातों का पता चला है जिनमें करोड़ों रुपयों के ट्रांजेक्शन होने की प्रबल आशंका है। पुलिस अब इन खातों के डिजिटल फुटप्रिंट्स का बारीक विश्लेषण कर रही है। कोर्ट ने आरोपियों की गंभीरता को देखते हुए उन्हें तीन दिन के पुलिस रिमांड पर भेज दिया है।
सूत्रों के अनुसार, पुलिस अब इस बात की भी पड़ताल कर रही है कि इस सिंडिकेट के जरिए और कितने युवा गैंगस्टरों के प्रभाव में आकर इस दलदल में फंस रहे हैं। साइबर थाना प्रभारी के अनुसार, आने वाले दिनों में ठगी करने वाले मुख्य गिरोह और रोहित गोदारा के उन गुर्गों के नाम भी सामने आ सकते हैं, जो क्रिप्टो करेंसी को हथियारों में तब्दील करने का काम कर रहे थे। फिलहाल, पुलिस की यह कार्रवाई बीकानेर में संगठित अपराध की कमर तोड़ने की दिशा में एक बड़ा कदम मानी जा रही है।
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