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📍 लालगढ़ रेलवे फाटक, बीकानेर
🏗️ निर्माण एवं विकास
📌 खबर के मुख्य बिंदु
- ▶ बीकानेर का यह अपनी तरह का पहला प्रोजेक्ट है, जहाँ एक ही स्थान पर ओवरब्रिज और अंडरपास दोनों बनेंगे
- ▶ ओवरब्रिज (पुल) का निर्माण कार्य लगभग पूरा हो चुका है, लेकिन अंडरपास का काम रेलवे की मंज़ूरी में उलझा हुआ है
- ▶ अंडरपास के ब्लॉक डालने के लिए रेलवे से दस घंटे के ट्रैफिक ब्लॉक (रेल यातायात रोकने) की अनुमति का पिछले एक महीने से इंतज़ार है
- ▶ छब्बीस बड़े सीमेंट ब्लॉक (बॉक्स) बनकर तैयार खड़े हैं, लेकिन पटरी के नीचे खुदाई का काम शुरू नहीं हो पा रहा है
- ▶ यह पूरा प्रोजेक्ट साल दो हज़ार सत्रह से शुरू हुआ था और नौ साल बीत जाने के बाद भी ‘कछुआ चाल’ से रेंग रहा है
बीकानेर। शहर के बीचों-बीच स्थित रेलवे फाटकों पर लगने वाला भयंकर ट्रैफिक जाम बीकानेरवासियों के लिए दशकों से किसी नासूर से कम नहीं रहा है। इस रोज़-रोज़ की फजीहत से जनता को राहत दिलाने के लिए, आज से करीब नौ साल पहले (वर्ष दो हज़ार सत्रह में) लालगढ़ रेलवे क्रॉसिंग पर एक अत्यंत महत्वाकांक्षी योजना की नींव रखी गई थी। यह बीकानेर शहर का ऐसा पहला अनोखा प्रोजेक्ट था, जहां एक ही जगह (पॉइंट) पर जनता की सुविधा के लिए ओवरब्रिज और अंडरपास दोनों का निर्माण एक साथ होना था।
🚧 रेलवे की ‘हरी झंडी’ का है इंतज़ार
नौ सालों के लंबे और थकाऊ इंतज़ार के बाद, वर्तमान में ओवरब्रिज का मुख्य ढांचा (स्ट्रक्चर) तो लगभग पूरा खड़ा हो चुका है, लेकिन इस प्रोजेक्ट की पूरी रफ्तार पर अंडरपास (भूमिगत मार्ग) ने ब्रेक लगा दिया है।
लालगढ़ रेलवे क्रॉसिंग के ट्रैक (पटरी) के ठीक नीचे अंडरपास के भारी-भरकम सीमेंट ब्लॉक (बॉक्स) डालने के लिए गहरी खुदाई और उन्हें फिक्स (सेट) करने का बहुत बड़ा और तकनीकी काम होना बाकी है। इस बेहद जोखिम भरे काम को सुरक्षित ढंग से अंजाम देने के लिए निर्माण करने वाली एजेंसी को करीब दस घंटे के ‘ट्रैफिक ब्लॉक’ (यानी उस पटरी पर ट्रेनों की आवाजाही रोकने) की सख्त आवश्यकता है।
एक महीने से रुकी पड़ी है फाइल
जानकारी के अनुसार, अंडरपास बनाने वाली निर्माण एजेंसी ने करीब एक महीने (तीस दिन) पहले ही रेलवे के उच्च अधिकारियों और प्रशासन को इस ‘ट्रैफिक ब्लॉक’ के संबंध में आधिकारिक पत्र (आवेदन) भेजकर अनुमति मांगी थी। लेकिन लालफीताशाही और विभागीय सुस्ती का आलम यह है कि रेलवे की ओर से अब तक इस अहम काम के लिए ‘हरी झंडी’ (मंज़ूरी) नहीं मिल पाई है।
वर्तमान स्थिति यह है कि अंडरपास के लिए बनाए गए छब्बीस बड़े सीमेंट ब्लॉक पूरी तरह से बनकर तैयार पड़े हैं, लेकिन जब तक रेलवे पटरी के नीचे खुदाई का काम पूरा करने की अनुमति नहीं देता, तब तक इस करोड़ों के प्रोजेक्ट को आम जनता के लिए खोलना बिल्कुल नामुमकिन (असंभव) है।
“भले ही आपको दूर से ओवरब्रिज का विशाल ढांचा खड़ा नज़र आ रहा हो, लेकिन अभी भी ज़मीन पर कई छोटे-बड़े तकनीकी काम बाकी हैं। पुल की रंग-रोगन (पेंटिंग), सौंदर्यीकरण का कार्य, सड़क सुरक्षा (रोड सेफ्टी) के लिए दिशा-सूचक साइन बोर्ड और सफेद मार्किंग, स्ट्रीट लाइटों का इंस्टॉलेशन, और सबसे ज़रूरी ऊपरी सतह पर डामरीकरण (कोलतार बिछाने) का काम अभी भी पूरी तरह से अटका हुआ है।”
सरकार का रुख नरम, फंड (पैसे) की भारी कमी
तकनीकी और विभागीय अड़चनों के साथ-साथ इस प्रोजेक्ट के लेट होने का एक बहुत बड़ा कारण आर्थिक संकट (बजट की कमी) भी है। सूत्रों के हवाले से मिली जानकारी के मुताबिक, इस प्रोजेक्ट को पूरा करने के लिए सरकार और संबंधित विभाग (रुडसिको) की ओर से अभी भी लगभग सोलह करोड़ इकतालीस लाख (16.41 करोड़) रुपये की भारी भरकम बकाया राशि मिलना शेष है।
फंड (पैसे) की इस भारी कमी और बार-बार उलझती तकनीकी स्वीकृतियों के बीच यह महत्वपूर्ण प्रोजेक्ट पिछले नौ सालों से एक बीमार ‘कछुए की चाल’ से रेंग रहा है। जनता को अब समझ नहीं आ रहा है कि वे इस भीषण ट्रैफिक जाम से मुक्ति पाने के लिए और कितने सालों तक अपनी आंखों के सामने इस अधूरे पुल को रोज़ाना देखते रहेंगे। बीकानेर की जनता अब राज्य सरकार, स्थानीय नेताओं और रेलवे प्रशासन से इस काम में तेजी लाने की कड़ी मांग कर रही है।
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⚠️ जनहित में जारी (Editorial Note)
यह समाचार बीकानेर में चल रहे लालगढ़ ओवरब्रिज-अंडरपास प्रोजेक्ट की जमीनी हकीकत, निर्माण एजेंसी द्वारा दी गई जानकारी और रेलवे प्रशासन की लंबित अनुमतियों (ब्लॉक) पर आधारित है। प्रोजेक्ट के फंड (बजट) या रेलवे की मंज़ूरी में सरकारी या तकनीकी कारणों से कभी भी बदलाव (निर्णय) किया जा सकता है। तथ्य आगे आने वाली आधिकारिक विभागीय पुष्टि के अनुसार अपडेट किए जा सकते हैं। ‘ख़बर बीकानेर’ किसी भी निर्माण में देरी या त्रुटि के लिए उत्तरदायी नहीं है।
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