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उत्सव के मुख्य आकर्षण:
- ‘सृजन के रंग-क़ासिम के संग’ समारोह के प्रथम चरण में क़ासिम बीकानेरी का हुआ भव्य सम्मान।
- टोंक के वरिष्ठ उर्दू लेखक डॉ. अज़ीज़ुल्लाह शीरानी ने की समारोह की अध्यक्षता।
- शायरी, कहानी, अनुवाद और नाटक की विधाओं में क़ासिम के योगदान पर हुआ पत्र वाचन।
- वरिष्ठ व्यंग्यकार बुलाकी शर्मा और कवि कमल रंगा ने क़ासिम की सृजनधर्मिता को सराहा।
- उत्सव पुरुष क़ासिम बीकानेरी ने अपनी चुनिंदा ग़ज़लों और कहानियों के पाठ से बांधा समां।
तीन भाषाओं का संगम: एक बेमिसाल सृजनधर्मी
बीकानेर। नगर के बहुआयामी साहित्यकार क़ासिम बीकानेरी के सम्मान में आयोजित दो दिवसीय समारोह का आगाज़ गौरवमयी स्मृतियों के साथ हुआ। ग़ौरतलब है कि प्रज्ञालय संस्थान और अदब सराय बीकानेर के साझा प्रयासों से आयोजित इस उत्सव के पहले दिन वक्ताओं ने क़ासिम की तीन दशकों की साहित्यिक साधना पर विस्तार से प्रकाश डाला। समारोह की अध्यक्षता कर रहे टोंक के वरिष्ठ उर्दू लेखक डॉ. अज़ीज़ुल्लाह शीरानी ने उद्घाटन करते हुए कहा कि क़ासिम बीकानेरी की कलम न केवल उर्दू शायरी में रवां है, बल्कि कहानी, अनुवाद और नाटक के क्षेत्र में भी वे मील का पत्थर स्थापित कर रहे हैं।

रचना पाठ और सम्मान का गरिमामय वृत्तांत
समारोह के दौरान क़ासिम बीकानेरी का शॉल, श्रीफल और माल्यार्पण के साथ भव्य अभिनंदन किया गया। इस अवसर पर वरिष्ठ कवि कथाकार कमल रंगा ने उन्हें आशीर्वचन देते हुए कहा कि क़ासिम पिछले तीन दशकों से साहित्य और कला के प्रति तन, मन और धन से समर्पित हैं। विशिष्ट अतिथि ज़ाकिर अदीब ने उनके अनुवाद कार्य की सूक्ष्मता की प्रशंसा की। समीक्षा और चर्चा के क्रम में डॉ. मोहम्मद फ़ारूक़ चौहान और प्रमोद कुमार शर्मा ने पत्र वाचन के माध्यम से क़ासिम के व्यक्तित्व और उनके अब तक के गद्य संग्रहों पर जागरूकता भरी दृष्टि डाली।
उत्सव पुरुष क़ासिम बीकानेरी ने अपनी ग़ज़लों और हिंदी कहानी ‘एक रिश्ता ऐसा भी’ के भावपूर्ण प्रस्तुतीकरण से श्रोताओं को मंत्रमुग्ध कर दिया। कार्यक्रम की शुरुआत हाफ़िज़ सय्यद ज़िया मोहम्मद बीकानेरी की तिलावते-कलामे-पाक से हुई, जबकि स्वागत उद्बोधन डॉक्टर नृसिंह बिन्नाणी ने दिया। प्रज्ञालय संस्थान के राजेश रंगा ने अतिथियों का आभार व्यक्त किया और समारोह का सफल संचालन कवि गिरिराज पारीक ने किया। सूत्रों के अनुसार, इस अवसर पर शहर के सैकड़ों प्रबुद्ध नागरिकों ने क़ासिम की सृजन यात्रा की भूरि-भूरि प्रशंसा की।
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रिपोर्ट: राजेश रंगा, बीकानेर