शेयर बाजार में कोहराम: सेंसेक्स 800 अंक टूटा, निवेशकों के डूबे ₹5 लाख करोड़; मिडिल ईस्ट तनाव और कच्चे तेल ने बिगाड़ा खेल

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भारतीय शेयर बाजार के लिए सोमवार का दिन ‘ब्लैक मंडे’ साबित हुआ। पश्चिम एशिया में बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव और कच्चे तेल की कीमतों में आए उबाल ने दलाल स्ट्रीट पर हाहाकार मचा दिया, जिससे निवेशकों की गाढ़ी कमाई के 5 लाख करोड़ रुपये पल भर में स्वाहा हो गए।

📰 ख़बर बीकानेर | 📅 8 जून, 2026 | 📍 मुंबई – नई दिल्ली



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बाजार में गिरावट की 5 बड़ी वजहें:

  • ईरान और इजराइल के बीच बढ़ते संघर्ष से वैश्विक बाजारों में अनिश्चितता।
  • कच्चा तेल (Brent Crude) 3.5% बढ़कर 96 डॉलर प्रति बैरल के करीब पहुँचा।
  • विदेशी संस्थागत निवेशकों (FII) द्वारा भारतीय बाजार से बड़ी निकासी।
  • डॉलर के मुकाबले रुपये की कमजोरी ने बढ़ाई आयात और महंगाई की चिंता।
  • आईटी, बैंकिंग और वित्तीय सेक्टर के दिग्गजों में भारी बिकवाली का दबाव।

वैश्विक तनाव और तेल की आग: क्यों गिरा बाजार?

भारतीय शेयर बाजार में सोमवार को भारी बिकवाली का दौर रहा। शुरुआती कारोबार में ही बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज का सेंसेक्स 800 से अधिक अंक टूट गया, जबकि नेशनल स्टॉक एक्सचेंज का निफ्टी-50 भी 23,100 के महत्वपूर्ण स्तर से नीचे फिसल गया। इस तेज गिरावट की मुख्य वजह मिडिल ईस्ट में जारी तनाव को माना जा रहा है। ईरान और इजराइल के बीच बढ़ते संघर्ष ने वैश्विक सप्लाई चेन और ऊर्जा सुरक्षा पर सवाल खड़े कर दिए हैं। भारत अपनी तेल जरूरतों के लिए बड़े पैमाने पर आयात पर निर्भर है, ऐसे में 96 डॉलर प्रति बैरल पहुँचता कच्चा तेल निवेशकों के लिए डर का कारण बना हुआ है।

“बाजार में आई इस गिरावट से केवल सूचकांक ही नहीं गिरे, बल्कि निवेशकों की कुल संपत्ति में लगभग ₹5 लाख करोड़ की भारी कमी दर्ज की गई है।”

निवेशकों के लिए रणनीति: अवसर या जोखिम?

बाजार के जानकारों के अनुसार, केवल घरेलू कारण ही नहीं बल्कि एशियाई बाजारों की कमजोरी ने भी भारतीय मार्केट पर दबाव बनाया। दक्षिण कोरिया और जापान के बाजारों में भी आज बड़ी गिरावट देखी गई। विशेषकर टेक और एआई (AI) सेक्टर के शेयरों में वैश्विक स्तर पर बिकवाली का असर भारतीय आईटी शेयरों पर साफ दिखा। इसके अलावा, अमेरिका में ब्याज दरों में संभावित बढ़ोतरी की आशंका से विदेशी निवेशक उभरते बाजारों से पैसा निकालकर सुरक्षित निवेश की ओर भाग रहे हैं।

विशेषज्ञों का मानना है कि जब तक अंतरराष्ट्रीय घटनाक्रम शांत नहीं होते, बाजार में उतार-चढ़ाव बना रहेगा। हालांकि, लंबी अवधि के निवेशकों के लिए यह गिरावट अच्छे फंडामेंटल वाले शेयरों में निवेश का एक अवसर भी हो सकती है। फिलहाल निवेशकों को घबराकर बिकवाली करने के बजाय ‘वेट एंड वॉच’ की नीति अपनानी चाहिए और वैश्विक घटनाक्रमों पर पैनी नज़र रखनी चाहिए।



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