बीकानेर: स्थापत्य कला विशेषज्ञ चम्पालाल गहलोत को मिला ‘श्रीमती कमला रंगा सृजन सेवा सम्मान-2026′, साहित्यकार मालचंद तिवाड़ी बोले—’ईंट-पत्थरों में संवेदना फूंकने वाले शिल्पी हैं गहलोत’


🏛️ कला, संस्कृति एवं धरोहर | बीकानेर

बीकानेर की ऐतिहासिक स्थापत्य कला, वास्तु और पारंपरिक धरोहर संरक्षण के क्षेत्र में अप्रतिम योगदान देने वाले मूर्धन्य शिल्प विशेषज्ञ चम्पालाल गहलोत को ‘श्रीमती कमला रंगा सृजन सेवा सम्मान-2026’ से विभूषित किया गया है। प्रज्ञालय संस्थान एवं रंगा ट्रस्ट के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित समारोह में विद्वानों ने गहलोत को ‘संवेदना शिल्पी’ करार दिया।

📰 ख़बर बीकानेर सांस्कृतिक ब्यूरो
📍 स्थान: लक्ष्मीनारायण रंगा सृजन सदन, बीकानेर
🕒 दिनांक: 18 सितंबर, 2026
📂 समारोह: कमला रंगा सृजन सम्मान

📌 सम्मान समारोह के 5 प्रमुख बिंदु:

  • सर्वोच्च सम्मान: प्रज्ञालय संस्थान एवं रंगा ट्रस्ट द्वारा चम्पालाल गहलोत को ‘कमला रंगा सृजन सेवा सम्मान-2026’ अर्पित।
  • धरोहर संरक्षण में योगदान: बीकानेर के पारंपरिक लाल पत्थर, झरोखों की नक्काशी और जालियों के पुनर्जीवन का मिला प्रतिफल।
  • मुख्य वक्ता के बोल: वरिष्ठ आलोचक मालचंद तिवाड़ी ने गहलोत को ईंट-पत्थर में जीवन तलाशने वाला ‘संवेदना शिल्पी’ बताया।
  • पारंपरिक अलंकरण: साफा, माला, उपरणा, श्रीफल, शॉल एवं प्रशस्ति पत्र भेंट कर गहलोत का किया गया नागरिक अभिनंदन।
  • विद्वानों की मौजूदगी: कमल रंगा, डॉ. नरसिंह बिनानी, शायर कासिम बीकानेरी और गिरिराज पारीक सहित अनेक गणमान्य जन रहे उपस्थित।

ख़बर बीकानेर। बीकानेर की समृद्ध स्थापत्य शैली और अनूठी पाषाण संस्कृति को वैश्विक पटल पर जीवित रखने वाले मूर्धन्य शिल्प साधक चम्पालाल गहलोत के नाम एक और गौरवशाली अध्याय जुड़ गया है। प्रज्ञालय संस्थान एवं श्रीमती कमला देवी-लक्ष्मीनारायण रंगा ट्रस्ट के संयुक्त तत्वावधान में लक्ष्मीनारायण रंगा सृजन सदन में आयोजित एक भव्य एवं गरिमामय समारोह में चम्पालाल गहलोत को ‘श्रीमती कमला रंगा सृजन सेवा सम्मान-2026’ सादर अर्पित किया गया।


‘ईंट-पत्थर से सिर्फ भवन नहीं बनाए, बल्कि नवाचार रचा’: मालचंद तिवाड़ी

समारोह के मुख्य अतिथि एवं वरिष्ठ चिंतक-आलोचक मालचंद तिवाड़ी ने अपने सारगर्भित उद्बोधन में कहा कि साहित्य और स्थापत्य दोनों ही समाज की धड़कनों के जीवंत दस्तावेज होते हैं। उन्होंने कहा, “चम्पालाल गहलोत केवल तकनीकी रूप से स्थापत्य विशेषज्ञ नहीं हैं, बल्कि वे एक संवेदना शिल्पी हैं। उन्होंने बीकानेर के दुलमेरा लाल पत्थर की बारीक नक्काशी, पारंपरिक झरोखों की लयबद्धता और जालियों की छायादार परम्परा को आधुनिक निर्माणों में जिस खूबसूरती से पिरोया है, वह बीकानेर की सांस्कृतिक अस्मिता का पुनर्जन्म है।”

समारोह की अध्यक्षता कर रहे वरिष्ठ साहित्यकार कमल रंगा ने रेखांकित किया कि सृजन केवल कलम तक सीमित नहीं होता, बल्कि पत्थरों को गढ़कर उन्हें तराशना भी उतनी ही महान तपस्या है। उन्होंने कहा कि गहलोत ने वास्तु कला को व्यवसाय के बजाए साधना माना है और जब कला लोक सेवा बन जाती है, तभी वह वास्तविक ‘सृजन सेवा’ कहलाती है।

💬 भावुक प्रत्युत्तर:
“सम्मान ग्रहण करने के उपरांत भावुक स्वर में चम्पालाल गहलोत ने कहा—’यह सम्मान मेरा व्यक्तिगत सम्मान न होकर बीकानेर की सदियों पुरानी शिल्प साधना, उस लाल पत्थर के हुनर और उन अनाम कारीगरों की समृद्ध परंपरा का सम्मान है जिन्होंने इस शहर को अपनी कला से सजाया है।'”

परंपरा का संरक्षण और नई पीढ़ी को हुनर का हस्तांतरण

विशिष्ट अतिथि वरिष्ठ शिक्षाविद् डॉ. नरसिंह बिनानी ने अपने विचार रखते हुए कहा कि आधुनिक कंक्रीट के दौर में पारंपरिक स्थापत्य की आत्मा को सुरक्षित रखना अत्यंत दुष्कर कार्य है, जिसे गहलोत ने बाखूबी निभाते हुए नई पीढ़ी को प्रशिक्षित करने का बीड़ा उठाया है। कार्यक्रम के प्रारंभ में स्वागताध्यक्ष वरिष्ठ शायर कासिम बीकानेरी ने गहलोत के दशकों के शिल्प-सफर और धरोहर संरक्षण के अवदान पर विस्तार से प्रकाश डाला।

समारोह में अतिथियों द्वारा चम्पालाल गहलोत को राजस्थानी साफा, माल्यार्पण, उपरणा, श्रीफल, शॉल एवं मानपत्र भेंट कर सम्मानित किया गया। इस अवसर पर संवाद प्रेषक राजेश रंगा, अशोक शर्मा, किशन देराश्री, अरुण जे. व्यास, भवानी सिंह राठौड़, पुनीत कुमार रंगा, नवनीत व्यास, आशीष रंगा, कन्हैया लाल, तोलाराम सारण, रामेश्वर सुथार, धन्नाराम, जुल्फीकार, श्याम चुरा और मोहित पुरोहित सहित बड़ी संख्या में साहित्यकार एवं कलाप्रेमी मौजूद रहे। कार्यक्रम का संचालन सुप्रसिद्ध कवि गिरिराज पारीक ने किया, जबकि आभार शिक्षाविद् भवानी सिंह राठौड़ ने ज्ञापित किया।

⚠️ Legal Disclaimer: इस पोर्टल पर प्रकाशित सभी समाचार उपलब्ध स्रोतों, सार्वजनिक जानकारी और प्रारंभिक रिपोर्ट्स के आधार पर तैयार किए जाते हैं। तथ्य आगे आने वाली आधिकारिक पुष्टि या जांच के अनुसार अपडेट किए जा सकते हैं। पोर्टल किसी भी त्रुटि या परिवर्तन के लिए उत्तरदायी नहीं है।

#KhabarBikaner #ChampalalGehlot #KamlaRangaSamman #PragyalayaSansthan #BikanerArchitecture #BikanerHeritage
© ख़बर बीकानेर | सभी अधिकार सुरक्षित

Leave a Comment

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Scroll to Top