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इन्वेस्टिगेशन की मुख्य बातें:
- बीकानेर रेंज पुलिस ने अपराधियों का महिमामंडन करने वाले 8,139 फॉलोअर्स को चिन्हित किया।
- इनमें से 252 युवाओं की पूरी डिजिटल प्रोफाइलिंग कर उनका कच्चा-चिट्ठा तैयार हुआ।
- 80% से अधिक फॉलोअर्स 15 से 30 वर्ष की आयु के विद्यार्थी और युवा वर्ग के हैं।
- अपराधियों के ‘भ्रमित चकाचौंध’ में फंसकर युवा अपना करियर दांव पर लगा रहे हैं।
- परिपक्व उम्र (30-40 वर्ष) के लोगों में गैंगस्टर को फॉलो करने का रुझान बहुत कम मिला।
डिजिटल दुनिया का अंधेरा: गैंगस्टर कल्चर का जाल
बीकानेर। सोशल मीडिया और इंटरनेट के इस दौर में साइबर स्पेस का दुरुपयोग अब युवाओं के भविष्य पर भारी पड़ रहा है। ग़ौरतलब है कि बीकानेर रेंज स्तर पर चलाए गए एक विशेष पुलिस अभियान में यह चौंकाने वाला खुलासा हुआ है कि बड़ी संख्या में छात्र समाज में सक्रिय भगोड़े और फरार अपराधियों का महिमामंडन करने वाले अकाउंट्स के जाल में फंस रहे हैं। बीकानेर रेंज की सोशल मीडिया मॉनिटरिंग टीम ने अपराधियों के नाम से संचालित हो रहे विभिन्न हैंडल्स की गहन निगरानी की। इस पडताल के दौरान सामने आया कि 8,139 युवा इन अपराधियों की गतिविधियों को न केवल पसंद कर रहे हैं, बल्कि उन्हें अपना ‘नायक’ भी मान रहे हैं।
छात्रों की प्रोफाइलिंग और काउंसलिंग: प्रशासन की पहल
पुलिस द्वारा की गई छानबीन में 252 युवाओं की विशेष प्रोफाइलिंग की गई, जिसमें उनके इंस्टाग्राम यूजरनेम, फोन नंबर, बायो और शहर के पतों का विस्तृत विश्लेषण किया गया। इस समीक्षा में यह कड़वी सच्चाई उजागर हुई कि अपराधियों को फॉलो करने वालों में 80 प्रतिशत से अधिक युवा 15 से 30 वर्ष की आयु सीमा के हैं। इनमें से ज्यादातर कॉलेज और स्कूल के विद्यार्थी हैं, जो सोशल मीडिया के घातक दुष्परिणामों से पूरी तरह अनभिज्ञ होकर भ्रम का शिकार हो रहे थे।
इसके विपरीत, 30 से 40 वर्ष की परिपक्व उम्र के लोगों में अपराधियों को फॉलो करने की संख्या नगण्य पाई गई। मामले की गंभीरता को देखते हुए पुलिस ने इन चिन्हित युवाओं और उनके अभिभावकों से संपर्क साधा है। उन्हें अपराधियों के साथ जुड़ने के गंभीर कानूनी नतीजों और साइबर स्पेस के खतरों से अवगत कराते हुए काउंसलिंग दी जा रही है। सूत्रों के अनुसार, पुलिस का उद्देश्य इन युवाओं को सही रास्ता दिखाना है ताकि वे अपराध की दलदल में फंसने के बजाय अपने करियर पर ध्यान केंद्रित कर सकें। पुलिस ने चेतावनी दी है कि अपराधियों का महिमामंडन करने वाले अकाउंट्स को बढ़ावा देना भी कानूनी अपराध की श्रेणी में आता है।
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