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नशिस्त की मुख्य बातें:
- बीकानेर साहित्य संस्कृति कला संगम द्वारा प्रो. मोहम्मद हुसैन का भव्य अभिनंदन।
- वरिष्ठ कवि कमल रंगा की अध्यक्षता में गूँजी राजस्थानी और उर्दू की जुगलबंदी।
- शायरों ने अपनी ताज़ा गज़लों के जरिए समकालीन परिवेश पर किया प्रहार।
- ‘कर्बला’ और ‘इंसानियत’ के पैगाम से सजी रही रूहानी महफ़िल।
- नगर के चुनिंदा साहित्यकारों ने प्रस्तुत किया अपना बेहतरीन कलाम।
उर्दू अदब का उल्लेखनीय योगदान: रंगा
बीकानेर। शहर के नज़ीर ग़ौरी सभागार में आयोजित शे’री नशिस्त बीकानेर के साहित्यिक गौरव को दर्शाने वाली एक यादगार शाम साबित हुई। ग़ौरतलब है कि बीकानेर साहित्य संस्कृति कला संगम की ओर से प्रोफ़ेसर मोहम्मद हुसैन के सम्मान में यह विशेष आयोजन किया गया। कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए वरिष्ठ कवि और कथाकार कमल रंगा ने कहा कि बीकानेर की समृद्ध साहित्यिक परंपरा में उर्दू अदब का योगदान अत्यंत महत्वपूर्ण है। उन्होंने रेखांकित किया कि शायरी में नवाचार और समकालीन संवेदनाओं का मिश्रण आज के दौर की बड़ी उपलब्धि है। रंगा ने अपनी राजस्थानी पंक्तियों ‘सुपनां रै रंगां राच्योड़ी…’ से श्रोताओं की भरपूर दाद बटोरी।
मीर-ओ-ग़ालिब की तरह हमको जो उर्दू आए।”
– प्रो. मोहम्मद हुसैन
शायरी की महक: एक अदबी नज़राना
नशिस्त के मुख्य अतिथि और समालोचक प्रोफ़ेसर मोहम्मद हुसैन ने अपनी गज़लों से महफ़िल में समां बांध दिया। उनके कलाम के मतलअ ‘मुश्को-अंबर से फ़ुज़ुं लफ़्ज़ों से ख़ुशबू आए…’ को श्रोताओं ने बहुत सराहा। कला संगम के संस्थापक अध्यक्ष और शायर क़ासिम बीकानेरी की गज़ल के शेर ‘मुश्को अंबर की क्या ज़रूरत है, खत में कोई गुलाब आने दो’ ने भी खूब वाह-वाही लूटी। आयोजन के दौरान वली मोहम्मद ग़ौरी, इरशाद अज़ीज़ और राजेंद्र स्वर्णकार जैसे दिग्गजों ने भी अपने कलाम पेश किए।
समीक्षा और काव्य विश्लेषण के क्रम में नौजवान शायर मोइनुद्दीन ‘मुईन’ और माजिद ख़ान माजिद ने भी अपनी प्रभावशाली उपस्थिति दर्ज कराई। माजिद खान ने ‘हवाओं में सियासत हो रही है’ शेर के माध्यम से मौजूदा हालात पर तीखा तंज कसा। इससे पूर्व, हाफ़िज़ ज़िया मोहम्मद बीकानेरी ने तिलावते कलामे पाक से कार्यक्रम का आगाज़ किया और मुफ्ती अशफ़ाक़ ग़ौरी रज़वी ने मेहमानों का इस्तकबाल किया। इस सफल आयोजन ने बीकानेर के अदब पसंद लोगों को एक मंच पर लाने का कार्य किया। अंत में सभी का शुक्रिया वली मोहम्मद ग़ौरी ने अदा किया।
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रिपोर्ट: क़ासिम बीकानेरी, बीकानेर
