बीकानेर पॉक्सो कोर्ट का कड़ा फैसला: नाबालिग से दरिंदगी करने वाले मेघाराम को 7 साल की जेल, पीड़िता को मिलेगा ₹1 लाख का मुआवजा

📰 ख़बर बीकानेर      📰 ख़बर बीकानेर      📰 ख़बर बीकानेर
📰 ख़बर बीकानेर      📰 ख़बर बीकानेर      📰 ख़बर बीकानेर
📰 ख़बर बीकानेर      📰 ख़बर बीकानेर      📰 ख़बर बीकानेर
📰 ख़बर बीकानेर      📰 ख़बर बीकानेर      📰 ख़बर बीकानेर
📰 ख़बर बीकानेर      📰 ख़बर बीकानेर      📰 ख़बर बीकानेर
📰 ख़बर बीकानेर      📰 ख़बर बीकानेर      📰 ख़बर बीकानेर

⚖️ कोर्ट फैसला | बीकानेर | पॉक्सो कोर्ट

बीकानेर की विशेष पॉक्सो अदालत ने नाबालिग बालिका के साथ हुए यौन शोषण के मामले में न्याय की मिसाल पेश की है। अदालत ने अभियुक्त मेघाराम को दोषी करार देते हुए 7 वर्ष के कठोर कारावास की सजा सुनाई है। न्यायाधीश ने पीड़िता के पुनर्वास के लिए मुआवजे की भी विशेष अनुशंसा की है।

📰 ख़बर बीकानेर | 📅 ताज़ा अपडेट | 📍 बीकानेर न्यायालय



📲 ‘ख़बर बीकानेर’ के WhatsApp ग्रुप से जुड़ें — पल-पल की ताज़ा ख़बरों के लिए!

फैसले की मुख्य बातें:

  • विशेष न्यायाधीश डॉ. मनीषा चौधरी ने मेघाराम को पॉक्सो एक्ट में ठहराया दोषी।
  • दोषी को 7 वर्ष का कठोर कारावास और 70 हजार रुपये अर्थदंड की सजा।
  • पीड़िता के भविष्य के लिए 1 लाख रुपये के अतिरिक्त मुआवजे की अनुशंसा।
  • विशिष्ट लोक अभियोजक ने 20 गवाहों के बयानों से पुख्ता किया अभियोजन पक्ष।
  • अदालत ने वैज्ञानिक और दस्तावेजी साक्ष्यों को माना सजा का आधार।

पॉक्सो कोर्ट का प्रहार: मेघाराम को जेल

बीकानेर। जिले की विशेष पॉक्सो (POCSO) अदालत ने महिला एवं बाल अपराधों के प्रति अपनी जीरो टॉलरेंस नीति का परिचय देते हुए एक महत्वपूर्ण निर्णय सुनाया है। ग़ौरतलब है कि नाबालिग बालिका से दुष्कर्म के एक संवेदनशील मामले में सुनवाई करते हुए विशेष न्यायाधीश डॉ. मनीषा चौधरी ने आरोपी मेघाराम पुत्र ईश्वरराम को दोषी करार दिया। न्यायालय ने मेघाराम को पॉक्सो अधिनियम, 2012 की धाराओं के तहत 7 वर्ष के कठोर कारावास की सजा से दंडित किया। साथ ही, समाज में ऐसे अपराधों पर अंकुश लगाने के उद्देश्य से 70 हजार रुपये का जुर्माना भी लगाया गया है।

“न्यायालय ने स्पष्ट किया कि जुर्माना न भरने पर दोषी को अतिरिक्त कारावास भुगतना होगा। पीड़िता के पुनर्वास के लिए ₹1 लाख की सहायता राशि न्याय के मानवीय पक्ष को दर्शाती है।”

साक्ष्यों की समीक्षा और अभियोजन की जीत

इस कानूनी लड़ाई के दौरान अभियोजन पक्ष ने मामले की बारीकी से छानबीन और पडताल की। विशिष्ट लोक अभियोजक शिवचंद भोजक ने न्यायालय के समक्ष कुल 20 गवाहों के बयान दर्ज करवाए और 30 महत्वपूर्ण दस्तावेजी साक्ष्य पेश किए। इन साक्ष्यों के आधार पर अदालत ने माना कि अभियुक्त ने अपनी घृणित मंशा से नाबालिग की अस्मत के साथ खिलवाड़ किया है।

सूत्रों के अनुसार, न्यायालय ने अपने आदेश में यह भी उल्लेख किया है कि आरोपी द्वारा अनुसंधान और न्यायिक अभिरक्षा के दौरान जेल में बिताई गई अवधि को उसकी कुल सजा में समायोजित किया जाएगा। इस फैसले के बाद बीकानेर के कानूनविदों और समाजसेवियों ने न्यायपालिका के प्रति अपना विश्वास व्यक्त किया है। विशेषज्ञों का मानना है कि ऐसे त्वरित और कड़े फैसले समाज में अपराधियों के भीतर कानून का खौफ पैदा करने में निर्णायक साबित होंगे।



✅ अभी क्लिक करें और ‘ख़बर बीकानेर’ WhatsApp ग्रुप जॉइन करें!

⚖️ विधिक सूचना एवं डिस्क्लेमर (Legal Notice): ‘ख़बर बीकानेर’ पोर्टल पर प्रकाशित सभी समाचार, लेख और सूचनाएं उपलब्ध विश्वसनीय स्रोतों, सार्वजनिक जानकारी और प्रारंभिक रिपोर्ट्स के आधार पर केवल सूचनात्मक उद्देश्यों के लिए तैयार की जाती हैं। यद्यपि हम सटीकता सुनिश्चित करने का अटूट प्रयास करते हैं, फिर भी तथ्यों की आधिकारिक पुष्टि समय के साथ अपडेट हो सकती है। ‘ख़बर बीकानेर’ किसी भी अनजाने मानवीय त्रुटि, तथ्यों में बदलाव या सामग्री के उपयोग से होने वाले किसी भी प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष नुकसान के लिए कानूनी रूप से उत्तरदायी नहीं होगा। पाठक किसी भी महत्वपूर्ण निर्णय से पहले संबंधित आधिकारिक विभाग या दस्तावेज़ से पुष्टि अवश्य करें। इस पोर्टल की समस्त सामग्री के सर्वाधिकार (Copyright) सुरक्षित हैं। किसी भी विवाद की स्थिति में न्यायिक क्षेत्र बीकानेर होगा।

#BikanerPOCSOVerdict #MegharamConvicted #JusticeForMinor #BikanerLegalNews #CrimeUpdateBikaner #RajasthanPolice #KhabarBikaner
© ख़बर बीकानेर | सभी अधिकार सुरक्षित

Leave a Comment

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Scroll to Top