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📍 ट्रॉमा सेंटर (पीबीएम), बीकानेर
🩺 स्वास्थ्य विभाग
📌 खबर के मुख्य बिंदु
- ▶ यह प्रदेश की पहली अत्याधुनिक ऑर्थो बायोलॉजिकल रिजनरेटिव केयर क्लिनिक है
- ▶ मंगलवार को संभागीय आयुक्त विश्राम मीणा ने फीता काटकर इस शानदार लैब का विधिवत रूप से लोकार्पण किया
- ▶ लाभ: जोड़ों के दर्द, घुटनों की बीमारी और खेलकूद में लगी चोट का बिना चीर-फाड़ के सटीक और नया इलाज संभव होगा
- ▶ समय और स्थान: यह विशेष क्लिनिक हर मंगलवार को ट्रॉमा सेंटर के कमरा नंबर छब्बीस में संचालित की जाएगी
- ▶ इस लैब के लिए मशीनें नोखा के भामाशाह कुलरिया परिवार, भारतीय स्टेट बैंक और हैल्थ साइंस यूनिवर्सिटी के फंड से आई हैं
बीकानेर। उम्र बढ़ने के साथ या किसी पुरानी चोट की वजह से जोड़ों और घुटनों के दर्द से जूझ रहे मरीजों के लिए बीकानेर से एक बहुत बड़ी और राहत भरी खबर सामने आई है। चिकित्सा विज्ञान में एक नए युग की शुरुआत करते हुए पीबीएम अस्पताल से संबद्ध ट्रॉमा सेंटर में मंगलवार को राजस्थान की पहली अत्याधुनिक ऑर्थो बायोलॉजिकल रिजनरेटिव केयर क्लिनिक का शानदार आगाज़ हो गया है।
🏥 संभागीय आयुक्त ने किया लोकार्पण
कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में पधारे बीकानेर के संभागीय आयुक्त विश्राम मीणा ने फीता काटकर इस क्लिनिक का विधिवत लोकार्पण किया।
उन्होंने अपने उद्बोधन में कहा कि इस नई और बेहतरीन लैब का सबसे बड़ा लाभ जोड़ों के दर्द से तड़पते उन पीड़ितों और आम अवाम को मिलेगा, जो भारी-भरकम ऑपरेशन से घबराते हैं। उन्होंने क्लिनिक में मौजूद अत्याधुनिक मशीनों और बिना ऑपरेशन घुटनों के इलाज की नई प्रक्रिया का स्वयं बहुत बारीकी से अवलोकन भी किया।
शरीर की ‘स्वस्थ होने की शक्ति’ का होगा उपयोग
ट्रॉमा सेंटर के निदेशक एवं क्लिनिक के मुख्य प्रभारी डॉक्टर बी.एल. खजोटिया ने इस अवसर को बीकानेर के चिकित्सा इतिहास का एक बेहद महत्वपूर्ण दिन बताया। उन्होंने समझाया कि इस नई पद्धति में शरीर के भीतर ही मौजूद “स्वतः स्वस्थ होने की प्राकृतिक शक्ति” का भरपूर और वैज्ञानिक उपयोग किया जाता है। इस क्लिनिक में मरीजों के जोड़ों के दर्द, गठिया और विशेष रूप से खेलकूद के दौरान लगने वाली गंभीर चोटों का बिना किसी चीर-फाड़ के सटीक और विश्व स्तरीय इलाज किया जाएगा।
मेडिकल कॉलेज की अतिरिक्त प्रधानाचार्य डॉक्टर रेखा आचार्य और पीबीएम के अधीक्षक डॉक्टर बी.सी. घीया ने भी इसे एक बड़ी उपलब्धि बताते हुए कहा कि इस नई पद्धति से बीकानेर में चिकित्सा अनुसंधान और ‘खेलकूद चिकित्सा’ के क्षेत्र में नए और सुनहरे आयाम स्थापित होंगे।
“क्लिनिक प्रभारी डॉक्टर अजय कपूर ने एक शानदार प्रस्तुतिकरण के माध्यम से बताया कि यह नई पद्धति मरीजों के आर्थराइटिस (गठिया) की शुरुआती (प्राथमिक) अवस्था में बिना किसी बड़े ऑपरेशन के बेहद कारगर और जीवनरक्षक साबित हो रही है।”
भामाशाहों का हुआ विशेष सम्मान
डॉक्टर खजोटिया ने बताया कि इस विशेष क्लिनिक को स्थापित करने के लिए महंगी और अत्याधुनिक मशीनें राजस्थान स्वास्थ्य विज्ञान विश्वविद्यालय के अनुसंधान फंड, नोखा के सिलवास निवासी भामाशाह मघाराम कुलरिया परिवार और भारतीय स्टेट बैंक के सामाजिक दायित्व फंड के सहयोग से उपलब्ध करवाई गई हैं।
इस गरिमामयी कार्यक्रम में भामाशाह मघाराम कुलरिया परिवार (पुखराज सुथार, राजेश अग्रवाल), भारतीय स्टेट बैंक के उप-महाप्रबंधक अरविन्द भट्ट, इंडियन रेडक्रॉस सोसायटी के अध्यक्ष राजेंद्र जोशी और जाने-माने समाजसेवी मनोज सारस्वत का शॉल ओढ़ाकर विशेष सम्मान किया गया। कार्यक्रम के संयोजक और वरिष्ठ लेखक अशफ़ाक कादरी ने सभी अतिथियों का शानदार परिचय दिया।
ट्रॉमा सेंटर के मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉक्टर एल.के. कपिल ने जानकारी देते हुए बताया कि यह विशेष क्लिनिक मरीजों की सुविधा के लिए प्रत्येक मंगलवार को ट्रॉमा सेंटर के कमरा नंबर छब्बीस में नियमित रूप से संचालित की जाएगी। कार्यक्रम के अंत में अस्थिरोग विशेषज्ञ डॉक्टर सुरेंद्र चोपड़ा ने वहां मौजूद सभी अतिथियों, डॉक्टरों और शहरवासियों का आभार (धन्यवाद) ज्ञापित किया।
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📝 ख़बर बीकानेर (Editorial Note)
यह समाचार पीबीएम अस्पताल (ट्रॉमा सेंटर) बीकानेर द्वारा जारी की गई आधिकारिक प्रेस विज्ञप्ति और उद्घाटन समारोह के बयानों पर आधारित है। ‘ख़बर बीकानेर’ की टीम जोड़ों के दर्द से परेशान मरीजों के लिए शुरू की गई इस बेहद शानदार और नई पहल के लिए पीबीएम प्रशासन, डॉक्टरों की टीम और सभी दानदाता भामाशाहों को हार्दिक बधाई व शुभकामनाएं प्रेषित करती है।
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