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📍 पीबीएम अस्पताल, बीकानेर
🛑 कार्य बहिष्कार
📌 खबर के मुख्य बिंदु
- ▶ पीबीएम अस्पताल में गार्ड और अटेंडेंट की हड़ताल के कारण मरीजों की सभी सेवाएं पूरी तरह चरमराईं
- ▶ वेतन और न्याय की मांग कर रहे प्रदर्शनकारी कर्मचारी पिछले कई दिनों से भूखे-प्यासे बैठे थे
- ▶ आज विरोध प्रदर्शन के दौरान भूख और कमज़ोरी के कारण दो गार्ड और दो अटेंडेंट गश खाकर गिर पड़े
- ▶ साथी कर्मचारियों ने आनन-फानन में चारों को उठाकर पीबीएम के ही आपातकालीन वॉर्ड में भर्ती करवाया
- ▶ गंभीर स्थिति: डॉक्टरों के अनुसार बेहोश हुए एक अटेंडेंट की हालत बेहद नाज़ुक बनी हुई है
बीकानेर। संभाग के सबसे बड़े सरकारी चिकित्सालय— पीबीएम अस्पताल— में चल रहा कर्मचारियों का आंदोलन अब बेहद उग्र और खतरनाक मोड़ पर आ गया है। अपनी खून-पसीने की कमाई, रुके हुए भत्तों और ब्लैकलिस्ट कंपनी को ठेका देने के विरोध में धरने पर बैठे सुरक्षा गार्ड और अटेंडेंट अब अपनी जान की बाज़ी लगाने को मजबूर हो गए हैं।
🛑 हड़ताल में मचा हाहाकार (देखें वीडियो)
आज अस्पताल परिसर में उस वक्त चीख-पुकार मच गई, जब लगातार धूप और भूख की वजह से कमज़ोर हो चुके चार आंदोलनकारी कर्मचारी अचानक बेहोश होकर ज़मीन पर गिर पड़े। फिर उनको अस्पताल में भर्ती कराया गया है इस पूरी घटना का एक वीडियो भी सामने आया है।
आपातकालीन वॉर्ड में भर्ती, एक की हालत गंभीर
जानकारी के अनुसार, जिन चार कर्मचारियों की तबीयत बिगड़ी है, उनमें दो सुरक्षा गार्ड और दो वार्ड अटेंडेंट शामिल हैं। साथियों को ज़मीन पर गिरता देख वहां मौजूद अन्य प्रदर्शनकारियों में रोष और दहशत फैल गई। आनन-फानन में साथी कर्मचारियों ने उन्हें उठाकर पीबीएम अस्पताल के ही आपातकालीन वॉर्ड में भर्ती करवाया।
डॉक्टरों की टीम ने तुरंत सभी बेहोश कर्मचारियों का इलाज शुरू कर दिया है। मेडिकल बुलेटिन के अनुसार, भूख और डिहाइड्रेशन के कारण तीन कर्मचारियों की हालत में सुधार है, लेकिन एक अटेंडेंट की स्थिति अभी भी बेहद नाज़ुक (गंभीर) बनी हुई है और उसे कड़ी निगरानी में रखा गया है।
“नाराज़ कर्मचारियों ने प्रशासन पर गंभीर आरोप लगाते हुए कहा है कि— ‘हम पिछले कई दिनों से अपने हकों के लिए भूखे-प्यासे धूप में बैठे हैं, लेकिन अंधी-बहरी सरकार और अस्पताल प्रशासन हमारी आवाज़ सुनने को तैयार नहीं है। अगर हमारे किसी भी साथी को कुछ हुआ, तो इसकी पूरी ज़िम्मेदारी प्रशासन की होगी।'”
मरीज़ बेहाल, पूरी व्यवस्थाएं ठप
गार्ड्स और अटेंडेंट्स की इस लंबी हड़ताल की वजह से पीबीएम अस्पताल की सभी सेवाएं पूरी तरह से चरमरा गई हैं। मरीजों को स्ट्रेचर से लेकर वॉर्ड तक ले जाने वाला कोई नहीं है। तीमारदारों (परिजनों) को खुद ही अपने मरीजों को इधर-उधर उठाना पड़ रहा है। साफ-सफाई और सुरक्षा व्यवस्था भी राम भरोसे हो चुकी है।
अस्पताल प्रशासन और जिला कलेक्टर द्वारा अभी तक इस गतिरोध को खत्म करने के लिए कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया है। यदि प्रशासन ने जल्द ही कोई बड़ा फैसला नहीं लिया, तो न केवल आंदोलनकारी कर्मचारियों की जान को खतरा है, बल्कि दूर-दराज़ से इलाज के लिए आए सैकड़ों गरीब मरीजों का जीवन भी खतरे में पड़ सकता है।
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⚠️ कानूनी अस्वीकरण
इस पोर्टल पर प्रकाशित सभी समाचार उपलब्ध स्रोतों, सार्वजनिक जानकारी, मौके की स्थिति और आंदोलनकारी कर्मचारियों द्वारा मीडिया को दिए गए बयानों व वायरल वीडियो के आधार पर तैयार किए जाते हैं। बीमार कर्मचारियों की वर्तमान मेडिकल स्थिति और मांगों पर आधिकारिक अस्पताल प्रशासन के बयान के अनुसार तथ्य अपडेट किए जा सकते हैं। ‘ख़बर बीकानेर’ किसी भी त्रुटि या परिवर्तन के लिए उत्तरदायी नहीं है।
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