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घोटाले की मुख्य बातें:
- नोखा को-ऑपरेटिव बैंक में ₹2,90,92,021 की भारी वित्तीय अनियमितता उजागर।
- पूर्व मैनेजर ताराचंद बोथरा और सेवानिवृत्त स्टाफ के खिलाफ नामजद FIR दर्ज।
- बिना अधिकार ग्राहकों और ग्राम सेवा सहकारी समितियों की FD तोड़कर राशि हड़पी।
- बैंक रिकॉर्ड से गायब मिले गबन से जुड़े वाउचर, 8 साल तक चलता रहा खेल।
- अतिरिक्त रजिस्ट्रार सहकारी समितियां द्वारा आरोपियों से रिकवरी के आदेश जारी।
सांठगांठ और षड्यंत्र: ऐसे हुआ करोड़ों का वारा-न्यारा
बीकानेर। जिले के नोखा कस्बे में बैंकिंग साख को बट्टा लगाने वाला एक बड़ा भ्रष्टाचार का मामला सामने आया है। ग़ौरतलब है कि वर्तमान शाखा प्रबंधक रवि मीणा ने नोखा थाने में एक रिपोर्ट दर्ज कराई है, जिसमें बैंक के ही पूर्व अधिकारियों पर गंभीर आरोप लगाए गए हैं। रिपोर्ट के अनुसार, पूर्व शाखा प्रबंधक ताराचंद बोथरा, सेवानिवृत्त ऋण पर्यवेक्षक चैनाराम गौरा और जसरासर शाखा के बैंकिंग सहायक रामस्वरूप सोनी ने मिलकर इस महा-घोटाले की पटकथा लिखी। जांच में सामने आया है कि आरोपियों ने अपने रसूख का इस्तेमाल कर ग्राहकों और ग्राम सेवा सहकारी समितियों की मियादी जमाओं (एफडीआर) को समय से पूर्व ही अवैध रूप से तोड़ दिया और वह राशि अन्य खातों में स्थानांतरित कर दी।
रिकॉर्ड से वाउचर गायब, जांच में जुटी नोखा पुलिस
इस करोड़ों के गबन की गहराई का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि कई संदेहास्पद ट्रांजेक्शन्स के वाउचर तक बैंक रिकॉर्ड में मौजूद नहीं हैं। तफ्तीश के दौरान पता चला कि नोखा तहसील क्रय-विक्रय सहकारी समिति के खातों का उपयोग भी गबन की राशि को छिपाने के लिए किया गया। विभाग की आंतरिक जांच और अतिरिक्त रजिस्ट्रार सहकारी समितियां, बीकानेर खंड के निर्णय के बाद आरोपियों के खिलाफ रिकवरी के आदेश भी दिए जा चुके हैं।
सूत्रों के अनुसार, नोखा पुलिस ने भारतीय न्याय संहिता की धारा 409, 420 और 120बी के तहत मामला दर्ज कर लिया है। मामले की जाँच उप निरीक्षक कुशलाराम द्वारा की जा रही है। पुलिस अब बैंक के डिजिटल फुटप्रिंट्स, ऑनलाइन ट्रांजेक्शन्स और बैंक स्टेटमेंट को बारीकी से खंगाल रही है। इस खुलासे के बाद से ही को-ऑपरेटिव बैंक के अन्य कार्मिकों और तत्कालीन स्टाफ में हड़कंप मचा हुआ है। पुलिस का दावा है कि जल्द ही इस घोटाले से जुड़ी कई और बड़ी मछलियां भी जाल में फँस सकती हैं।
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