बीकानेर नगर निगम की खुली पोल: 26 लाख रुपये के 2 चेक हुए बाउंस, संभागीय आयुक्त के आदेश हवा में, निजी बैंकों के खातों में चल रहा ‘कमीशन’ का खेल!

🚨 प्रशासनिक लापरवाही | बीकानेर | नगर निगम

बीकानेर नगर निगम इन दिनों अपने विकास कार्यों से ज़्यादा अपनी वित्तीय अनियमितताओं और ‘चेक बाउंस’ के मामलों को लेकर चर्चा में है। संभागीय आयुक्त के स्पष्ट आदेशों के बावजूद निगम ने अभी तक निजी बैंकों से अपना नाता नहीं तोड़ा है। एक ठेकेदार को दिए गए छब्बीस लाख रुपये के दो चेक बाउंस होने से निगम की साख पर गहरा दाग लग गया है।

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📌 खबर के मुख्य बिंदु

  • निगम की बड़ी लापरवाही: कोटक महिंद्रा बैंक से जारी किए गए बीस लाख और पांच लाख के दो चेक हुए बाउंस
  • अधिकारियों का अजीब तर्क: खाते में पैसों की कमी नहीं, बल्कि नए आयुक्त के ‘हस्ताक्षर’ (सिग्नेचर) अपडेट न होने का दिया बहाना
  • कमीशन का खेल: संभागीय आयुक्त के आदेशों के बावजूद ग्यारह से अधिक निजी बैंकों में आज भी सक्रिय हैं निगम के खाते
  • आपराधिक मामला: ‘निगोशिएबल इंस्ट्रूमेंट्स एक्ट’ के तहत चेक बाउंस होने पर हो सकती है दो साल की जेल
  • भाजपा नेता ने लगाया आरोप: “यह एक बड़ी साज़िश है, कुछ अधिकारी जानबूझकर सरकार की छवि खराब कर रहे हैं।”

बीकानेर। जब शहर के विकास और साफ-सफाई की बात आती है, तो नगर निगम अक्सर बजट (पैसे) का रोना रोता हुआ नज़र आता है। लेकिन जब बात निजी बैंकों में खाते खुलवाने और वहां से ‘कमीशन’ खाने की हो, तो निगम के अधिकारियों की मुस्तैदी देखने लायक होती है। बीकानेर नगर निगम इन दिनों एक ऐसे ही बड़े वित्तीय (फाइनेंशियल) विवाद में घिर गया है, जिसने सरकारी महकमे की साख पर बड़ा दाग लगा दिया है।

🛑 26 लाख के 2 चेक हुए बाउंस

प्राप्त जानकारी के अनुसार, हाल ही में नगर निगम ने शहर में विकास कार्य करने वाली एक फर्म (ठेकेदार) को भुगतान के लिए दो चेक जारी किए थे। इनमें से एक चेक बीस लाख सत्तानवे हजार (20,97,000) रुपये का और दूसरा चेक पांच लाख तैंतीस हजार (5,33,522) रुपये का था।

यह दोनों चेक निजी बैंक ‘कोटक महिंद्रा’ से जारी किए गए थे। लेकिन जब ठेकेदार ने ये चेक अपने बैंक में लगाए, तो वे दोनों ‘अनादरित’ (बाउंस) होकर वापस लौट आए। किसी भी सरकारी संस्थान (निकाय) का चेक बाउंस होना उसकी वित्तीय साख और विश्वसनीयता पर एक बहुत बड़ी चोट माना जाता है।

निगम का बहाना: “हस्ताक्षर अपडेट नहीं थे”

इस भारी फजीहत के बाद जब नगर निगम के अधिकारियों से जवाब मांगा गया, तो उन्होंने एक बहुत ही अजीब तर्क (बहाना) पेश किया। निगम प्रशासन का कहना है कि खाते में पैसों (बैलेंस) की कोई कमी नहीं थी। चेक बाउंस इसलिए हुए क्योंकि नए निगम आयुक्त के हस्ताक्षर (सिग्नेचर) अभी तक बैंक के रिकॉर्ड में सत्यापित (अपडेट) नहीं हुए थे।

लेकिन यह तर्क खुद ही एक बड़े संदेह के घेरे में है। अगर बैंक में हस्ताक्षर अपडेट ही नहीं थे, तो फिर लेखा विभाग (अकाउंट्स डिपार्टमेंट) ने उन्हीं अमान्य हस्ताक्षरों से करोड़ों के चेक काटकर ठेकेदार को थमा क्यों दिए? क्या यह अधिकारियों की घोर लापरवाही है, या ठेकेदार को परेशान करने की कोई चाल?

“कानूनी जानकारों के अनुसार, ‘निगोशिएबल इंस्ट्रूमेंट्स एक्ट की धारा एक सौ अड़तीस’ के तहत चेक बाउंस होना एक गंभीर दंडनीय अपराध है। इस मामले में संबंधित ठेकेदार फर्म निगम के आहरण एवं वितरण अधिकारी (डीडीओ) और निगम आयुक्त के खिलाफ कोर्ट में केस दर्ज करवा सकती है। दोष सिद्ध होने पर अधिकारियों को दो साल की जेल या चेक राशि का दोगुना जुर्माना, अथवा दोनों भुगतने पड़ सकते हैं।”

निजी बैंकों में ‘कमीशन’ का खेल, आदेशों की अनदेखी

नगर निगम में एक और बहुत बड़ा घोटाला (खेल) निजी बैंकों में खाते खोलने को लेकर चल रहा है। कुछ समय पहले संभागीय आयुक्त विश्राम मीणा ने कड़े आदेश दिए थे कि नगर निगम अपने तमाम निजी बैंक खाते तुरंत बंद करे और केवल दो प्रमुख सरकारी बैंकों (राष्ट्रीयकृत बैंकों) के माध्यम से ही अपना लेन-देन (ट्रांजेक्शन) करे।

संभागीय आयुक्त के आदेश के बाद निगम के अधिकारियों ने जनता और प्रशासन की आंखों में धूल झोंकने के लिए केवल छह खाते (अकाउंट) बंद कर दिए। लेकिन सूत्रों के अनुसार, आज भी निगम के ग्यारह (11) से अधिक खाते अलग-अलग निजी बैंकों में पूरी तरह सक्रिय (चालू) हैं। राजनीतिक गलियारों में इस बात की जोरों पर चर्चा है कि निगम के पैसे को निजी बैंकों में रखने के पीछे मोटे ‘कमीशन’ का एक बहुत बड़ा खेल चल रहा है, जिसमें नीचे से लेकर ऊपर तक के कई अधिकारियों की मिलीभगत हो सकती है।

इस पूरे प्रकरण पर कड़ी प्रतिक्रिया देते हुए भारतीय जनता पार्टी के नेता भगवान सिंह मेड़तिया ने सीधा आरोप लगाया है कि यह सब निगम के अधिकारियों की घोर लापरवाही और एक ‘कॉकस’ (भ्रष्ट गुट) की साज़िश का हिस्सा है। ये अधिकारी अपने निजी स्वार्थ के लिए जानबूझकर सरकार की छवि खराब करने में लगे हुए हैं। अब देखना यह है कि राज्य सरकार और संभागीय आयुक्त इन बेलगाम अधिकारियों पर क्या सख्त कार्रवाई करते हैं।

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⚠️ कानूनी अस्वीकरण (Legal Disclaimer)

यह समाचार बीकानेर नगर निगम से जुड़ी सार्वजनिक जानकारी, नेताओं द्वारा लगाए गए आरोपों और बैंक से वापस लौटे चेक के तथ्यों पर आधारित है। ‘ख़बर बीकानेर’ नगर निगम के अधिकारियों पर लगे ‘कमीशन’ के आरोपों की स्वतंत्र रूप से पुष्टि नहीं करता है।

सरकारी विभागों की कार्यप्रणाली में वित्तीय गड़बड़ियों की जांच राज्य के उच्च अधिकारियों (संभागीय आयुक्त) के अधीन है। जांच पूरी होने के बाद नए तथ्यों के आधार पर इस खबर को तुरंत अपडेट किया जाएगा। पोर्टल किसी भी त्रुटि या परिवर्तन के लिए उत्तरदायी नहीं है।

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