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मामले के मुख्य बिंदु:
- मंडी व्यापारी मुकुंद लाल शर्मा के साथ 74 बीघा जमीन सौदे में बड़ी धोखाधड़ी।
- आरोपी संजय सेठिया और पत्नी नीतू सेठिया ने इकरारनामे के बाद जमीन अन्य को बेची।
- अदालत (ACJM-02) ने धारा 420 और 406 के तहत आरोपियों पर लिया प्रसंज्ञान।
- पगल के थारूसर स्थित कृषि भूमि को लेकर साल 2021 से चल रहा था विवाद।
- पुलिस की ‘FR’ के बावजूद अदालत ने मामले को गंभीर मानते हुए कार्यवाही के दिए निर्देश।
विश्वासघात की कहानी: व्यापारिक संबंधों का फायदा
बीकानेर। जिले के व्यापारिक जगत में भरोसे के कत्ल का एक बड़ा मामला न्यायपालिका की चौखट तक पहुँचा है। ग़ौरतलब है कि कृषि उपज मंडी के व्यापारी मुकुंद लाल शर्मा ने थारूसर (पूगल) स्थित 74 बीघा 10 बिस्वा जमीन खरीदने के लिए संजय सेठिया और उनकी पत्नी नीतू सेठिया के साथ लिखित इकरारनामा किया था। परिवादी के अनुसार, पुराने व्यापारिक संबंधों के चलते उन्होंने आरोपियों पर भरोसा किया था, लेकिन आरोपियों की मंशा कुछ और ही थी।
इकरारनामा प्रभावी होने के बावजूद आरोपियों ने छल-कपट का सहारा लेते हुए उक्त कीमती कृषि भूमि को किसी अन्य व्यक्ति के नाम हस्तांतरित कर दिया। जब व्यापारी को गुमराह किए जाने का आभास हुआ, तो उन्होंने न्याय के लिए कानूनी लड़ाई शुरू की।
अदालत का कड़ा रुख: FR के बाद भी प्रसंज्ञान
यह मामला साल 2021 से लंबित था। पूर्व में पुलिस में दर्ज कराई गई एफआईआर पर पुलिस ने एफआर (Final Report) लगा दी थी, जिसे परिवादी ने अदालत में चुनौती दी। अतिरिक्त मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट संख्या-02 ने मामले की गहराई से तफ्तीश की और इसे गंभीर धोखाधड़ी का प्रकरण मानते हुए आरोपियों के खिलाफ धारा 420 (धोखाधड़ी) और 406 (अमानत में खयानत) के तहत कार्यवाही शुरू करने के आदेश दिए हैं।
सूत्रों के अनुसार, जिला एवं सेशन न्यायालय ने भी इस प्रकरण में हुए विश्वासघात को गंभीर माना है। कोर्ट ने पुलिस प्रशासन को इस मामले में विधि सम्मत कड़ी कार्यवाही करने के स्पष्ट निर्देश दिए हैं। बीकानेर के व्यापारिक हलकों में इस अदालती आदेश के बाद हड़कंप मचा हुआ है। अब देखना यह है कि जाँच एजेंसियां इस करोड़ों के भूमि घोटाले की परतों को कैसे खोलती हैं।
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