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सुनवाई की मुख्य बातें:
- हाईकोर्ट ने रेल बाईपास या अंडरब्रिज/ओवरब्रिज पर माँगा अंतिम फैसला।
- नॉर्थ वेस्टर्न रेलवे के महाप्रबंधक को तकनीकी कारणों के साथ पक्ष रखने के आदेश।
- बीकानेर विकास प्राधिकरण (BDA) सचिव से प्रस्तावों के आधार की मांगी गई जानकारी।
- नगर निगम के विरोधाभासी बयानों पर खंडपीठ ने जताई कड़ी नाराजगी।
- अगली सुनवाई 4 अगस्त को निर्धारित, सभी एजेंसियों को देना होगा अधिकृत हलफनामा।
अदालती कड़ाई: बाईपास या ब्रिज, क्या है अंतिम विकल्प?
बीकानेर। शहर के बीचों-बीच स्थित रेलवे क्रॉसिंग्स की समस्या, जो दशकों से शहर के विकास में बाधा बनी हुई है, अब माननीय न्यायालय के रडार पर है। ग़ौरतलब है कि राजस्थान हाईकोर्ट की जोधपुर पीठ में मुख्य न्यायाधीश एस.पी. शर्मा और न्यायमूर्ति संदीप पुरोहित की खंडपीठ ने इस मामले की गहन समीक्षा की। अदालत ने स्पष्ट कर दिया है कि अब ढुलमुल रवैया नहीं चलेगा। रेलवे, नगर निगम और बीकानेर विकास प्राधिकरण (बीडीए) को अब यह बताना होगा कि वे किस विकल्प के साथ आगे बढ़ना चाहते हैं। कोर्ट ने पडताल के दौरान पाया कि अलग-अलग एजेंसियों के बीच समन्वय की भारी कमी है, जिससे समाधान अटका हुआ है।
निगम और बीडीए के रुख पर उठे सवाल
सुनवाई के दौरान अदालत ने नॉर्थ वेस्टर्न रेलवे के महाप्रबंधक को कड़े निर्देश दिए हैं कि वे निर्माण के तकनीकी पहलुओं और कारणों के साथ अपना पक्ष रखें। इसके साथ ही, बीडीए सचिव से उन आधारों का ब्यौरा मांगा गया है जिनके तहत उन्होंने विशिष्ट प्रस्तावों का समर्थन किया था। छानबीन में यह भी सामने आया कि नगर निगम के आयुक्त और उनके तकनीकी अधिकारियों के बयानों में काफी अंतर है। खंडपीठ ने इस विरोधाभास पर कड़ी नाराजगी व्यक्त करते हुए निगम को अपना अधिकृत और एकमत पक्ष रखने को कहा है।
सूत्रों के अनुसार, मामले की गंभीरता को देखते हुए अगली सुनवाई की तिथि 4 अगस्त तय की गई है। इस दिन सभी संबंधित विभागों को अपने-अपने अंतिम स्टैंड के साथ न्यायालय में हाजिर होना होगा। शहरवासी उम्मीद लगाए बैठे हैं कि हाईकोर्ट के इस कड़े रुख के बाद बीकानेर की इस वर्षों पुरानी गंभीर समस्या का कोई ठोस और स्थायी समाधान निकल सकेगा।
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