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📍 पीबीएम और निजी अस्पताल, बीकानेर
🏥 स्वास्थ्य विभाग संकट
📌 खबर के मुख्य बिंदु
- ▶ जयपुर के एक डॉक्टर की गिरफ़्तारी के खिलाफ बीकानेर सहित पूरे प्रदेश के निजी अस्पतालों (प्राइवेट डॉक्टर्स) का भारी आंदोलन
- ▶ बीकानेर के बारह बड़े और प्रमुख निजी अस्पतालों में राज्य सरकार की आरजीएचएस योजना (कैशलेस इलाज) का बहिष्कार
- ▶ फ्री इलाज बंद होने के कारण अब सरकारी कर्मचारियों और पेंशनरों को मजबूरन अपनी जेब (नकद पैसा) से देनी पड़ रही है फीस और दवाओं की कीमत
- ▶ निजी अस्पतालों की इस हड़ताल के कारण सरकारी पीबीएम (पी.बी.एम.) अस्पताल की ओपीडी (आउटडोर) में उमड़ पड़ा है मरीजों का भारी हुजूम
- ▶ डॉक्टरों की एक ही मांग: “जब तक गिरफ्तार डॉक्टर सोनदेव की बिना किसी शर्त के रिहाई (ज़मानत) नहीं हो जाती, हमारा यह आंदोलन जारी रहेगा”
बीकानेर। दो दिन पहले जयपुर में हुई एक मेडिकल घटना की गूंज अब बीकानेर की स्वास्थ्य सेवाओं (मेडिकल सिस्टम) पर भारी पड़ने लगी है। जयपुर में एक वरिष्ठ डॉक्टर की गिरफ़्तारी को लेकर पूरे राजस्थान के निजी चिकित्सकों (प्राइवेट डॉक्टरों) का गुस्सा शांत होने का नाम नहीं ले रहा है। इसी आक्रोश के चलते बीकानेर शहर की चिकित्सा व्यवस्था (विशेषकर आरजीएचएस योजना) पूरी तरह से चरमरा गई है और इसका सीधा खमियाज़ा (नुकसान) उन गरीब और लाचार मरीजों को भुगतना पड़ रहा है जो फ्री इलाज की आस में अस्पतालों के चक्कर काट रहे हैं।
🛑 निजी अस्पतालों में कैशलेस इलाज (आरजीएचएस) ठप
प्राप्त जानकारी के अनुसार, गिरफ़्तारी के इस विरोध में बीकानेर के बारह (12) सबसे प्रमुख और बड़े निजी अस्पतालों के प्रबंधकों ने राज्य सरकार की सबसे महत्वाकांक्षी योजना ‘आरजीएचएस’ (राजस्थान गवर्नमेंट हेल्थ स्कीम) का पूरी तरह से बहिष्कार (बायकॉट) कर दिया है।
गुरुवार को भी लगातार तीसरे दिन यह कैशलेस सुविधा बहाल (शुरू) नहीं हो सकी। इस हड़ताल का सबसे ज़्यादा बुरा असर उन सरकारी कर्मचारियों और बुजुर्ग पेंशनभोगियों पर पड़ रहा है, जिन्हें अब मजबूरी में ओपीडी (परामर्श) की फीस और महंगी दवाओं का नकद भुगतान अपनी ही जेब से करना पड़ रहा है।
सरकारी पीबीएम अस्पताल में लगा मरीजों का मेला
निजी अस्पतालों से मायूस होकर लौट रहे मरीजों की भारी भीड़ ने अब शहर के सबसे बड़े सरकारी पीबीएम अस्पताल का रुख कर लिया है। अचानक से मरीजों की इतनी भारी तादाद (हुजूम) आने से पीबीएम अस्पताल प्रबंधन के हाथ-पैर फूल गए हैं और वहां की लचर व्यवस्थाओं की एक बार फिर से पोल खुल गई है।
अस्पताल से मिले आधिकारिक आंकड़ों के मुताबिक, गुरुवार को महज़ एक ही दिन में तीन सौ चौबीस (324) नए मरीज़ आरजीएचएस योजना के तहत अपना मुफ्त इलाज करवाने के लिए अलग-अलग आउटडोर (ओपीडी) में पहुंचे। इनमें से नौ गंभीर मरीजों को वार्ड में भर्ती (एडमिट) भी किया गया है। अगर पिछले तीन दिनों का कुल आंकड़ा देखा जाए, तो इस हड़ताल के कारण अब तक छह सौ चौंसठ (664) से अधिक मरीज़ पीबीएम का दरवाज़ा खटखटा चुके हैं। इस भारी दबाव के कारण अस्पताल में लंबी-लंबी कतारें और अव्यवस्था (धक्का-मुक्की) देखने को मिल रही है।
“निजी चिकित्सकों के संगठन ‘इंडियन मेडिकल एसोसिएशन’ (आईएमए) की बीकानेर इकाई के जिला सचिव डॉक्टर एस.एन. हर्ष ने प्रशासन को सख्त चेतावनी देते हुए अपना रुख साफ कर दिया है। उन्होंने कहा है कि— ‘जब तक जयपुर पुलिस द्वारा गिरफ्तार किए गए डॉक्टर सोनदेव की बिना किसी शर्त के और सम्मानपूर्वक रिहाई नहीं हो जाती, हमारा यह विरोध और आरजीएचएस योजना का बहिष्कार ऐसे ही लगातार जारी रहेगा।'”
एक तरफ डॉक्टरों की सख्त ज़िद है, तो दूसरी तरफ बेबस मरीज़ दर-दर भटक रहे हैं। अब देखना यह है कि राज्य सरकार और प्रशासन इस गहराते हुए स्वास्थ्य संकट (मेडिकल क्राइसिस) का बीच का क्या रास्ता निकालते हैं, ताकि आम जनता को इस अघोषित ‘सज़ा’ से जल्द से जल्द निजात मिल सके।
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⚠️ कानूनी अस्वीकरण एवं जनहित अपील (Health Alert)
यह समाचार पीबीएम अस्पताल के ओपीडी आंकड़ों (रजिस्टर), निजी चिकित्सकों के संगठन (आईएमए) द्वारा दिए गए आधिकारिक बयानों और मौके की स्थिति पर आधारित है।
‘ख़बर बीकानेर’ राज्य सरकार और निजी अस्पताल प्रबंधन दोनों से यह मार्मिक अपील करता है कि आम मरीजों और बुज़ुर्ग पेंशनभोगियों की पीड़ा (तकलीफ) को ध्यान में रखते हुए इस गतिरोध को आपसी बातचीत से तुरंत खत्म किया जाए। डॉक्टरों की हड़ताल समाप्त होने और आरजीएचएस योजना के दोबारा शुरू होने पर इस खबर को तुरंत अपडेट किया जाएगा। पोर्टल किसी भी चिकित्सा अव्यवस्था या परिवर्तन के लिए उत्तरदायी नहीं है।
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