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📍 आरडी 97 (पूगल), बीकानेर
🚒 प्रशासन और दमकल
📌 खबर के मुख्य बिंदु
- ▶ बीकानेर जिले के पूगल क्षेत्र (आरडी-97) के पास स्थित स्केप झील के वन क्षेत्र में लगी भयानक आग
- ▶ बुधवार को अचानक भड़की इस आग ने देखते ही देखते पूरे जंगल (वन क्षेत्र) के एक बड़े हिस्से को अपनी चपेट में ले लिया
- ▶ तेज़ हवा के कारण आग की लपटें पीबी क्षेत्र के गांवों और किसानों के पके हुए गेहूं के खेतों की तरफ बढ़ने लगीं
- ▶ सूचना पर दमकल (फायर ब्रिगेड) की गाड़ी बुलाई गई, लेकिन रेत के ऊंचे टीलों के कारण उसे मौके तक पहुंचने में भारी परेशानी हुई
- ▶ उपखंड अधिकारी दिव्या बिश्नोई के सख्त निर्देशों पर तहसीलदार और पटवारी ने मौके पर पहुंचकर हालात का जायज़ा लिया



बीकानेर / पूगल। गर्मियों के दस्तक देते ही बीकानेर के ग्रामीण और वन क्षेत्रों में आगजनी की खौफनाक घटनाएं शुरू हो गई हैं। बुधवार का दिन पूगल क्षेत्र के किसानों और आम ग्रामीणों के लिए भारी दहशत और खौफ लेकर आया। आरडी-97 के पास मौजूद स्केप झील के घने वन क्षेत्र (जंगल) में अचानक एक भीषण और बेकाबू आग भड़क उठी। आग लगने के असल कारणों का अभी तक कुछ पता नहीं चल पाया है, लेकिन इस आग ने पूरे इलाके में हड़कंप मचा दिया है।
🛑 हवाओं ने भड़काई आग, गेहूं के खेतों तक मंडराया खतरा
जंगल में लगी इस आग ने चंद मिनटों में ही विकराल रूप धारण कर लिया। तेज़ हवाओं के चलने से सूखी झाड़ियां और पेड़ धू-धूं कर जलने लगे। आग की भयंकर लपटें और धुएं का गुबार मीलों दूर से साफ दिखाई दे रहा था।
सबसे ज़्यादा दहशत की बात यह है कि हवा के दबाव के कारण आग की यह खौफनाक लपटें पीबी क्षेत्र के आस-पास बसे गांवों और किसानों के लहलहाते (पके हुए) गेहूं के खेतों की तरफ तेज़ी से बढ़ने लगीं। अपनी साल भर की गाढ़ी मेहनत (फसल) को आग में खाक होने के डर से किसानों की सांसें गले में अटक गईं। पूरे गांव में चीख-पुकार और डर का माहौल बन गया।
रेत के टीलों में फंसी दमकल, आग बुझाने में हुई देरी
आग की भयावहता (गंभीरता) को देखते हुए डरे-सहमे ग्रामीणों ने तुरंत स्थानीय पुलिस और प्रशासन को सूचना दी। सूचना मिलते ही प्रशासन हरकत में आया और आग बुझाने के लिए आनन-फानन में दमकल (फायर ब्रिगेड) की गाड़ी को मौके पर बुलाया गया।
लेकिन, यहां प्रकृति ने भी बचाव कार्य में बहुत बड़ा अड़ंगा (रुकावट) डाल दिया। वन क्षेत्र के चारों तरफ मौजूद रेत के बड़े-बड़े और ऊंचे टीलों (धोरों) के कारण भारी-भरकम दमकल वाहन को मुख्य घटनास्थल (आग की लपटों) तक पहुंचने में भारी दिक्कतों और रुकावटों का सामना करना पड़ा। वाहन के पहिए रेत में धंसने लगे, जिससे पानी की बौछार करने और आग बुझाने के इस महत्वपूर्ण काम में भारी देरी हुई, और तब तक आग काफी बड़े हिस्से में फैल चुकी थी।
“प्रशासनिक अमले ने आग पर काबू पाने के लिए हर संभव कोशिश की। पूगल की उपखंड अधिकारी दिव्या बिश्नोई के सख्त और त्वरित निर्देशों पर स्थानीय तहसीलदार और हल्का पटवारी ने तुरंत मौके पर पहुंचकर हालात का निरीक्षण (जायज़ा) लिया।”
हवा का दबाव कम हुआ तो मिली राहत
प्रशासन के आला अधिकारी अब भी घटनास्थल पर डटे हुए हैं और स्थिति की लगातार और पैनी मॉनिटरिंग (निगरानी) की जा रही है। हालांकि, दोपहर बाद जैसे ही हवा का दबाव और रफ्तार कुछ कम हुई, वैसे ही आग फैलने की गति भी थोड़ी धीमी पड़ गई, जिससे ग्रामीणों ने एक बड़ी राहत की सांस ली है।
खबर लिखे जाने तक इस भयंकर आग पर अभी तक पूरी तरह से सौ प्रतिशत (पूर्ण रूप से) काबू नहीं पाया जा सका है। जंगल के कुछ हिस्सों से अभी भी धुआं और लपटें उठ रही हैं। पुलिस, प्रशासनिक टीमें और सैकड़ों ग्रामीण एकजुट होकर (मिलकर) अपने-अपने स्तर पर इस आग को पूरी तरह बुझाने और खेतों को सुरक्षित बचाने के हर संभव प्रयास में जी-जान से जुटे हुए हैं।
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⚠️ जनहित में जारी आपातकालीन अपील (Emergency Alert)
यह समाचार पूगल क्षेत्र में लगी आग की घटना पर प्रशासन, पुलिस और प्रत्यक्षदर्शियों (ग्रामीणों) द्वारा दी गई प्रारंभिक सूचना और स्थिति पर आधारित है।
‘ख़बर बीकानेर’ सभी किसानों और आमजन से अपील करता है कि गर्मियों के मौसम में अपने खेतों और खलिहानों के आस-पास कोई भी ज्वलनशील पदार्थ (बीड़ी, सिगरेट या आग) खुला न छोड़ें। आग लगने की किसी भी आपात स्थिति में तुरंत दमकल विभाग (डायल एक सौ एक) और पुलिस (डायल एक सौ बारह) को सूचित करें। आग बुझाने के दौरान प्रशासन के निर्देशों का पालन करें। आग के कारणों की आधिकारिक जांच और नुकसान के अंतिम आकलन के बाद इस खबर को नए तथ्यों के साथ अपडेट किया जाएगा। पोर्टल किसी भी त्रुटि या परिवर्तन के लिए उत्तरदायी नहीं है।
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