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यात्रा की मुख्य बातें:
- बीकानेर के 27 सदस्यों ने प्रथम सिंधु कुंभ यात्रा में लिया सक्रिय भाग।
- मनाली और लाहौल स्पीति के चुनौतीपूर्ण रास्तों से होते हुए लेह पहुँचा था दल।
- पांच दिवसीय प्रवास के दौरान सिंधु नदी के तट पर आयोजित उत्सवों में की शिरकत।
- दल में वरिष्ठ नागरिकों से लेकर बच्चों तक ने दिखाया अदम्य उत्साह।
- बीकानेर पहुँचने पर हिमालय परिवार के पदाधिकारियों ने किया जोरदार स्वागत।
सिंधु दर्शन: आस्था और राष्ट्रभक्ति का अनूठा संगम
बीकानेर। हिमालय की गोद में बहने वाली पावन सिंधु नदी के प्रति श्रद्धा प्रकट करने और राष्ट्रीय अखंडता का संदेश देने के उद्देश्य से शुरू हुई यात्रा का सफल समापन हो गया है। ग़ौरतलब है कि हिमालय परिवार द्वारा आयोजित प्रथम सिंधु कुंभ से बीकानेर का 27 सदस्यीय जत्था सकुशल घर लौट आया है। अंतरराष्ट्रीय पर्वतारोही डॉ. सुषमा बिस्सा के नेतृत्व में इस दल ने कुरुक्षेत्र, मनाली और लाहौल स्पीति के बर्फीले पड़ावों को पार करते हुए लेह में अपनी उपस्थिति दर्ज कराई। सचिव आर.के. शर्मा ने बताया कि पांच दिनों तक चले ‘सिंधु दर्शन’ उत्सव में दल के सदस्यों ने विभिन्न सांस्कृतिक और आध्यात्मिक कार्यक्रमों में भाग लेकर बीकानेर की गौरवशाली परंपराओं का प्रतिनिधित्व किया।
सकुशल वापसी और आत्मीय अभिनंदन: समीक्षा
यात्रा की सफलता की समीक्षा करते हुए बताया गया कि दल में रमेश गुप्ता, कुसुम गुप्ता, तरुण गौड़, संतोष गौड़, मदन शर्मा और मीना शर्मा जैसे वरिष्ठ सदस्यों के साथ-साथ युवाओं और बच्चों ने भी कठिन भौगोलिक परिस्थितियों का डटकर मुकाबला किया। दल की सूची पर नजर डालें तो कन्हैया लाल छींपा, लीला वर्मा, अनिता शर्मा, मुराद अली और रमेश वर्मा सहित 27 सदस्यों ने इस मिशन को यादगार बनाया। बीकानेर रेलवे स्टेशन और बस स्टैंड पर दल के पहुँचते ही उत्सव जैसा माहौल बन गया।
सूत्रों के अनुसार, हिमालय परिवार के जिलाध्यक्ष नरेश अग्रवाल, रोहिताश्व बिस्सा, रमाकांत शर्मा और प्रदीप शर्मा ने पुष्पगुच्छ भेंट कर सभी यात्रियों का स्वागत किया। दल के सदस्यों ने अपने अनुभव साझा करते हुए कहा कि लेह-लद्दाख की वादियों में बिताए गए ये पल उनके जीवन की सबसे अनमोल पूंजी हैं। पड़ताल में यह भी सामने आया कि दल ने सिंधु तट पर अखंड भारत और वैश्विक शांति के लिए विशेष प्रार्थना भी की। इस सफल आयोजन से बीकानेर के पर्यटन और साहसिक खेल प्रेमियों में भारी हर्ष व्याप्त है।
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