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कार्रवाई की मुख्य बातें:
- साइबर और जेएनवीसी पुलिस ने संयुक्त दबिश देकर 4 अभियुक्तों को किया दबोचा।
- लोगों को लालच देकर उनके बैंक खाते ‘किराये’ पर लेता था यह शातिर गिरोह।
- म्यूल अकाउंट्स (Mule Accounts) के जरिए किया जा रहा था करोड़ों का अवैध लेनदेन।
- आरोपियों के कब्जे से लैपटॉप, एटीएम, दर्जनों सिम कार्ड और मोबाइल फोन जब्त।
- 15 दिनों की गोपनीय निगरानी और पड़ताल के बाद पुलिस को मिली बड़ी सफलता।
किराये के खातों का ‘काला खेल’: ऐसे फंसाते थे जाल में
बीकानेर। शहर में बढ़ते डिजिटल फ्रॉड पर अंकुश लगाने के लिए चलाए जा रहे विशेष अभियान के तहत बीकानेर पुलिस ने एक बड़े नेटवर्क को ध्वस्त किया है। ग़ौरतलब है कि साइबर थाना पुलिस को पिछले कुछ समय से सूचना मिल रही थी कि एक गिरोह स्थानीय लोगों को रुपयों का प्रलोभन देकर उनके बैंक खाते किराये पर ले रहा है। इन खातों का उपयोग देश भर में की जा रही साइबर ठगी की रकम को सुरक्षित तरीके से निकालने और ट्रांसफर करने के लिए किया जाता था। पुलिस की एक विशेष टीम ने करीब 15 दिनों तक गिरोह की हर गतिविधि पर बारीकी से नजर रखी और साक्ष्य जुटाए।
पड़ताल जारी: अंतर्राज्यीय संबंधों की छानबीन
रविवार को जेएनवीसी थाना क्षेत्र स्थित एक संदिग्ध ठिकाने पर पुलिस ने योजनाबद्ध तरीके से दबिश दी। इस कार्यवाही के दौरान गिरोह से जुड़े चार युवकों को गिरफ्तार किया गया। मौके से भारी मात्रा में डिजिटल उपकरण बरामद हुए हैं, जिनमें लैपटॉप, उच्च श्रेणी के मोबाइल फोन और विभिन्न बैंकों के एटीएम कार्ड शामिल हैं। पुलिस की प्रारंभिक छानबीन में यह भी सामने आया है कि आरोपियों के पास बड़ी संख्या में सक्रिय सिम कार्ड मौजूद थे, जिनका उपयोग फर्जी बैंकिंग ट्रांजेक्शन के लिए किया जाता था।
सूत्रों के अनुसार, पुलिस अब इस बात का गहराई से विश्लेषण कर रही है कि इस गिरोह के तार किन-किन अन्य राज्यों से जुड़े हैं। पकड़े गए आरोपियों से कड़ी पूछताछ की जा रही है ताकि उन ‘बड़ी मछलियों’ तक पहुँचा जा सके जो परदे के पीछे से इस पूरे सिंडिकेट को ऑपरेट कर रही हैं। पुलिस ने आमजन से अपील की है कि वे किसी भी अज्ञात व्यक्ति के साथ अपने बैंक खाते या केवाईसी (KYC) दस्तावेज साझा न करें, क्योंकि यह उन्हें अनजाने में बड़े अपराध का हिस्सा बना सकता है।
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