⚖️ कोर्ट कचहरी | बीकानेर ब्रेकिंग
कांग्रेस शहर जिलाध्यक्ष मदनगोपाल मेघवाल के साथ टिकट वितरण को लेकर हुई बहुचर्चित मारपीट के मामले में बीकानेर की विशिष्ट एससी-एसटी अदालत ने बड़ा फैसला सुनाया है। अदालत ने मामले में न्यायिक हिरासत में चल रहे मुख्य आरोपी मोहित अरोड़ा समेत शेष सभी 6 आरोपियों को सशर्त जमानत दे दी है।
📍 स्थान: बीकानेर कोर्ट
🕒 अपडेटेड: स्पेशल कोर्ट रिपोर्ट
📂 प्रकरण: एससी-एसटी एक्ट व मारपीट
📌 प्रकरण के 5 मुख्य बिंदु:
- अदालती आदेश: विशिष्ट न्यायाधीश (एससी/एसटी न्यायालय) बीकानेर ने सभी 6 आरोपियों की जमानत याचिका स्वीकार की।
- कुल 8 गिरफ्तारियां: पुलिस ने घटना के बाद कुल 8 आरोपियों को पकड़ा था, जिनमें से दो को पूर्व में ही राहत मिल चुकी थी।
- विवाद की मूल वजह: निकाय चुनाव में टिकट वितरण से नाखुश होकर मोहित अरोड़ा और उसके साथियों ने दिया था वारदात को अंजाम।
- गंभीर धाराओं में केस: भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 115(2), 126(2), 189(2) और एससी/एसटी एक्ट में हुआ था पर्चा दर्ज।
- अदालत में खुद पहुंचे मेघवाल: पैरवी के दौरान शहर अध्यक्ष मदनगोपाल मेघवाल खुद अपने अधिवक्ता कुलदीप शर्मा के साथ कोर्ट रूम में मौजूद रहे।
ख़बर बीकानेर। बीकानेर में निकाय चुनाव की सरगर्मियों के बीच घटित हुए सबसे सनसनीखेज सियासी घटनाक्रम में अदालत की ओर से अहम फैसला सामने आया है। कांग्रेस के शहर जिलाध्यक्ष मदनगोपाल मेघवाल के साथ सरेराह हुई मारपीट और गाली-गलौज के चर्चित मामले में बीकानेर के विशिष्ट न्यायालय (एससी/एसटी निवारण प्रकरण) ने शेष बचे सभी छह आरोपियों की जमानत अर्जी मंजूर करते हुए उन्हें रिहा करने के आदेश जारी किए हैं।
टिकट वितरण की रंजिश में हुआ था हमला, पुलिस ने दबोचे थे 8 आरोपी
ग़ौरतलब है कि नगर निगम चुनाव में टिकट बंटवारे को लेकर दावेदारों में गहरा असंतोष व्याप्त था। इसी विवाद के चलते टिकट न मिलने से खफा मोहित अरोड़ा ने अपने आधा दर्जन से अधिक समर्थकों के साथ मिलकर शहर कांग्रेस अध्यक्ष मदनगोपाल मेघवाल पर हमला बोल दिया था और उनके साथ तीखी हाथापाई व मारपीट की थी। वारदात के बाद शहर का राजनीतिक तापमान गरमा गया था और कांग्रेस कार्यकर्ताओं में भारी आक्रोश देखने को मिला था।
घटना की संवेदनशीलता को देखते हुए पुलिस प्रशासन ने फौरी एक्शन लिया और तफ्तीश के आधार पर नामजद मुख्य आरोपी मोहित अरोड़ा सहित कुल आठ आरोपियों को गिरफ्तार कर न्यायिक अभिरक्षा में भेज दिया था। कानूनी प्रक्रिया के तहत पूर्व में अदालत ने दो आरोपियों को जमानत दे दी थी, जबकि मुख्य आरोपी समेत बाकी छह आरोपी जेल में बंद थे।
“जमानत याचिका पर सुनवाई के दौरान शहर अध्यक्ष मदनगोपाल मेघवाल स्वयं अपने अधिवक्ता कुलदीप शर्मा के साथ अदालत में उपस्थित रहे और अभियोजन पक्ष के तर्कों को मजबूती से रखा। हालांकि, उभय पक्षों की विस्तृत बहस सुनने के उपरांत विशिष्ट न्यायाधीश ने सभी छह आरोपियों की जमानत याचिका मंजूर कर ली।”
बीएनएस और एससी/एसटी एक्ट की धाराओं के तहत दर्ज था प्रकरण
सूत्रों के अनुसार, शहर अध्यक्ष की रिपोर्ट पर पुलिस ने त्वरित कानूनी शिकंजा कसते हुए नए आपराधिक कानूनों के तहत भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 115(2) (स्वेच्छा से चोट पहुंचाना), 126(2) (गलत तरीके से रोकना), 189(2) (धमकी) समेत अन्य सुसंगत धाराओं और अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति (अत्याचार निवारण) अधिनियम के कड़े प्रावधानों के तहत मुकदमा दर्ज किया था।
अदालत में बचाव पक्ष के वकीलों ने तर्क दिया कि आरोपियों का कोई पूर्व आपराधिक रिकॉर्ड इस तरह का नहीं है और मामले में अनुसंधान पूरा हो चुका है। दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद अदालत ने न्यायिक विवेकाधिकार का प्रयोग करते हुए सभी छह आरोपियों को राहत प्रदान की। इस अदालती फैसले के साथ ही अब प्रकरण के सभी 8 आरोपी जमानत पर बाहर आ चुके हैं।