मुख्य बिंदु:
- सीएमएचओ ऑफिस के सब-स्टोर में बुधवार दोपहर शॉर्ट सर्किट से भड़की आग।
- पुराने टॉयलेट को अस्थायी स्टोर बनाकर रखी गई थीं सरकारी दवाइयां।
- नगर निगम की दमकल ने मौके पर पहुँचकर आग पर पाया काबू।
- निशुल्क सप्लाई के लिए आई सर्दी-बुखार की दवाएं और सर्जिकल आइटम जलकर राख।
- बिल्डिंग की पुरानी वायरिंग और एसी का ओवरलोड माना जा रहा हादसे का कारण।
टॉयलेट बना स्टोर: लापरवाही ने लगाया ‘शॉर्ट सर्किट’
बीकानेर। स्वास्थ्य विभाग की लापरवाही और संसाधनों के अभाव का एक बड़ा उदाहरण बुधवार को सीएमएचओ कार्यालय में देखने को मिला। **ग़ौरतलब है** कि कार्यालय के मुख्य गेट के पास ही एक पुराने टॉयलेट को सब-स्टोर में तब्दील किया गया था, जहाँ ग्रामीण क्षेत्रों के कैंपों के लिए दवाएं और सर्जिकल सामान रखा जाता था। दोपहर बाद अचानक इस स्टोर से धुआं उठते देख ऑफिस में अफ़रा-तफ़री मच गई।
कर्मचारियों ने जब स्टोर का गेट खोला तो दीवार पर लगे बिजली के स्विच बोर्ड से भयंकर चिंगारियां निकल रही थीं। गत्ते के कार्टन और प्लास्टिक सर्जिकल आइटम होने के कारण आग ने चंद मिनटों में ही विकराल रूप ले लिया।
निशुल्क दवाएं जलकर खाक, दमकल ने पाया काबू
सूचना मिलते ही नगर निगम की दमकल मुस्तैदी के साथ मौके पर पहुँची और कड़ी मशक्कत के बाद आग को बुझाया गया। स्टोर में रखी सर्दी, जुकाम और बुखार की सामान्य दवाओं के साथ भारी मात्रा में सीरिंज, फ्लूइड और स्प्रिट की बोतलें मौजूद थीं। **सूत्रों के अनुसार**, स्प्रिट के कारण आग तेज़ी से फैली, जिससे सरकारी निशुल्क सप्लाई और लोकल खरीद की दवाएं नष्ट हो गईं।
गनीमत रही कि आग को समय रहते रोक लिया गया, अन्यथा यह मुख्य बिल्डिंग की वायरिंग तक पहुँच सकती थी। अस्पताल प्रशासन अब नुकसान का आकलन करने में जुटा है। हालांकि, सवाल यह उठता है कि दो-तीन बड़े स्टोर होने के बावजूद दवाओं को खुले तारों वाले टॉयलेट में क्यों रखा गया था? फिलहाल मामले की **तफ्तीश** की जा रही है।