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वारदात के मुख्य बिंदु:
- भलूरी गांव की ज्वैलरी दुकान में हुई चोरी के मामले में एएसआई ने मांगी रिश्वत।
- तत्कालीन एएसआई धर्मवीर यादव ने चोरों की लोकेशन बताने के बदले मांगे ₹10,000।
- एसीबी के सत्यापन के दौरान आरोपी ने परिवादी से ₹1500 की पहली किश्त ली।
- भनक लगने और थाने से पुलिस लाइन ट्रांसफर होने के कारण ‘ट्रैप’ होने से बचा आरोपी।
- जयपुर मुख्यालय के आदेश पर भ्रष्टाचार का केस दर्ज, एएसआई जयकुमार को मिली जांच।
जांच के नाम पर वसूली: खाकी पर लगा दाग
बीकानेर। भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो (ACB) ने बीकानेर के बज्जू थाने में तैनात रहे एक अधिकारी के खिलाफ कड़ा रुख अपनाया है। ग़ौरतलब है कि कोलायत निवासी छगनलाल सोनी की भलूरी गांव में ज्वैलरी की दुकान है, जहाँ जनवरी 2026 में करीब 5 लाख रुपये के जेवरात चोरी हो गए थे। इस मामले की जांच एएसआई धर्मवीर यादव को सौंपी गई थी। पीड़ित छगनलाल ने आरोप लगाया कि जब उसने चोरों को पकड़ने की गुहार लगाई, तो एएसआई ने तकनीकी लोकेशन का पता लगाने के बहाने 10 हजार रुपये की रिश्वत की मांग की।
चतुराई पड़ी भारी: मुख्यालय के आदेश पर FIR दर्ज
एसीबी इंस्पेक्टर आनंद मिश्रा ने जब शिकायत का गोपनीय सत्यापन करवाया, तो आरोपी एएसआई का भ्रष्टाचार उजागर हो गया। हालांकि, जब एसीबी ने ‘ट्रैप’ की तैयारी की, तो शातिर अधिकारी को इसकी भनक लग गई। इसी बीच उसका तबादला बज्जू थाने से पुलिस लाइन बीकानेर हो गया, जिसके चलते वह रंगे हाथों पकड़े जाने से बच गया।
एसीबी ने पूरी रिपोर्ट बनाकर जयपुर मुख्यालय भेजी, जहाँ आरोपी की परिवादी के साथ हुई ‘चतुराईपूर्ण बातचीत’ और रिश्वत की मांग को अपराध माना गया। मुख्यालय की हरी झंडी के बाद अब आधिकारिक तौर पर मुकदमा दर्ज कर लिया गया है। इस मामले की अग्रिम तफ्तीश एएसआई जयकुमार को सौंपी गई है। सूत्रों के अनुसार, पुलिस विभाग अब आरोपी अधिकारी के खिलाफ विभागीय जांच की प्रक्रिया भी शुरू कर सकता है। भ्रष्टाचार के खिलाफ इस कार्रवाई से पुलिस महकमे में हड़कंप मचा हुआ है।
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