🗳️ सियासी भूचाल | बीकानेर मेयर चुनाव 2026
बीकानेर नगर निगम में महापौर की कुर्सी पर काबिज होने के लिए बिछाई जा रही सियासी बिसात में नया मोड़ आ गया है। 21 सितंबर को होने वाले मतदान से ठीक पहले भाजपा प्रत्याशी डॉ. सुरेंद्र सिंह शेखावत द्वारा निर्दलीय पार्षदों के साथ सोशल मीडिया पर जारी की गई तस्वीर ने कांग्रेस खेमे की धड़कनें तेज कर दी हैं। भाजपा ने निर्दलीयों के पूर्ण समर्थन का दावा करते हुए मुकाबले को बेहद रोमांचक बना दिया है।
📍 स्थान: बीकानेर
🕒 मतदान: 21 सितंबर
📂 सियासी तफ्तीश: क्रॉस वोटिंग व समीकरण
📌 सियासी समीकरण के 5 बड़े पहलू:
- सोशल मीडिया पर धमाका: वार्ड 13 से पार्षद व भाजपा के मेयर प्रत्याशी डॉ. सुरेंद्र सिंह शेखावत ने निर्दलीयों संग फोटो की पोस्ट।
- नेतृत्व पर भरोसा: पोस्ट में दावा किया गया कि निर्दलीय पार्षदों ने भाजपा प्रत्याशी के विजन में विश्वास जताते हुए मतदान का फैसला लिया है।
- निगम की दलीय स्थिति: 80 सदस्यीय बोर्ड में कांग्रेस 42, भाजपा 27, निर्दलीय 10 और आरएलपी के पास 1 सीट है।
- क्रॉस वोटिंग की रणनीति: निर्दलीयों (10) के साथ आने से भाजपा 37 तक पहुंचती है; बहुमत (41) के लिए महज 4 वोटों की दरकार।
- 21 सितंबर को मतदान: कांग्रेस के अनिल कल्ला और भाजपा के सुरेंद्र सिंह शेखावत के बीच सीधी टक्कर।
ख़बर बीकानेर। बीकानेर नगर निगम के महापौर चुनाव में अब कुछ ही घंटों का फासला शेष है, लेकिन सत्ता की चाबी किसके हाथ लगेगी, इसका सस्पेंस खत्म होने के बजाय और गहरा गया है। भारतीय जनता पार्टी के अधिकृत महापौर प्रत्याशी डॉ. सुरेंद्र सिंह शेखावत ने शुक्रवार को अचानक सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर नवनिर्वाचित निर्दलीय पार्षदों के साथ अपनी एक तस्वीर साझा कर शहर के राजनीतिक हलकों में खलबली मचा दी है।
शेखावत ने इस पोस्ट के जरिए सीधा और बड़ा दावा किया कि निर्दलीय पार्षदों ने उनके विकासवादी नेतृत्व पर भरोसा जताया है और 21 सितंबर को निगम परिसर में होने वाले गुप्त मतदान में भाजपा के पक्ष में वोट करने का संकल्प लिया है। इस तस्वीर के सार्वजनिक होते ही बीकानेर से लेकर जयपुर तक सियासी गलियारों में जोड़-तोड़ और क्रॉस वोटिंग की चर्चाओं ने रफ्तार पकड़ ली है।
41 का जादुई आंकड़ा: कागजों पर कांग्रेस मजबूत, मगर अंदरूनी खौफ बरकरार
ग़ौरतलब है कि बीकानेर नगर निगम के कुल 80 वार्डों के घोषित नतीजों में कांग्रेस ने 42 सीटों पर जीत दर्ज कर स्पष्ट बहुमत हासिल किया था, जो कि 41 के जादुई बहुमत आंकड़े से एक अधिक है। वहीं, भाजपा 27 वार्डों पर जीती, 10 सीटों पर निर्दलीयों ने परचम फहराया और 1 सीट राष्ट्रीय लोकतांत्रिक पार्टी (RLP) के खाते में गई। कांग्रेस ने वरिष्ठ नेता डॉ. बी.डी. कल्ला के भतीजे अनिल कल्ला को अपना अधिकृत उम्मीदवार बनाया है।
कागजी गणित के हिसाब से कांग्रेस सुरक्षित दिखाई देती है, लेकिन महापौर चुनाव ‘गुप्त मतदान’ (Secret Ballot) के जरिए होना है। इसमें दल-बदल कानून लागू नहीं होता। इसी कानूनी पेच का फायदा उठाने के लिए भाजपा ने शुरुआत से ही आक्रामक रुख अख्तियार कर रखा है।
“सूत्रों के अनुसार, यदि भाजपा (27) सभी 10 निर्दलीयों को अपने पाले में लाने में सफल हो जाती है, तो उसका आंकड़ा 37 पर पहुंच जाता है। ऐसे में बहुमत के लिए उसे केवल 4 अतिरिक्त मतों की आवश्यकता होगी। भाजपा की पूरी नजर कांग्रेस के उस असंतुष्ट धड़े पर है जो टिकट वितरण या मेयर प्रत्याशी चयन को लेकर अंदरखाने नाराज चल रहा है।”
बाड़ेबंदी बनाम सेंधमारी: 21 सितंबर को होगा महाफैसला
हाल ही में वार्ड 50 से कांग्रेस के पार्षद नवरतन डागा की बगावत को पीसीसी चीफ गोविंद सिंह डोटासरा ने मान-मनौव्वल के जरिए शांत कराया था और डागा ने अपना निर्दलीय पर्चा वापस ले लिया था। कांग्रेस ने अपने पार्षदों को एकजुट रखने के लिए कड़ी बाड़ेबंदी कर रखी है। लेकिन शेखावत की इस ताजा तस्वीर ने साबित कर दिया है कि भाजपा हार मानने को तैयार नहीं है और उसने अंतिम क्षणों तक सेंधमारी की पूरी व्यूहरचना तैयार कर ली है।
अब सबकी निगाहें 21 सितंबर को होने वाली वोटिंग पर टिकी हैं। क्या कांग्रेस अपने सभी 42 पार्षदों का वोट अनिल कल्ला के पक्ष में सुरक्षित रख पाएगी, या फिर डॉ. सुरेंद्र सिंह शेखावत निर्दलीयों और संभावित क्रॉस-वोटर्स के सहारे कोई बड़ा सियासी चमत्कार कर दिखाएंगे? इसका खुलासा मतदान के बाद मतपेटियों के खुलने पर ही होगा।