🗳️ सियासी राहत | बीकानेर मेयर चुनाव 2026
बीकानेर नगर निगम महापौर चुनाव से ऐन पहले कांग्रेस के लिए बड़ी राहत की ख़बर सामने आई है। पार्टी से बगावत कर निर्दलीय उम्मीदवार के रूप में नामांकन दाखिल करने वाले पार्षद नवरतन डागा ने राजस्थान प्रदेश कांग्रेस कमेटी (PCC) के अध्यक्ष गोविंद सिंह डोटासरा से मुलाकात के बाद अपने कदम पीछे खींच लिए हैं। डागा आज विधिवत अपना नामांकन पत्र वापस लेंगे।
📍 स्थान: बीकानेर / जयपुर
🕒 अपडेटेड: एक्सक्लूसिव पॉलिटिकल रिपोर्ट
📂 सियासत: डैमेज कंट्रोल व नामांकन वापसी
📌 सियासी सुलह के 5 प्रमुख बिंदु:
- डोटासरा की मध्यस्थता: पीसीसी चीफ गोविंद सिंह डोटासरा से उच्चस्तरीय मुलाकात के बाद बागी तेवर ठंडे पड़े।
- नामांकन वापसी का ऐलान: बतौर निर्दलीय प्रत्याशी भरा गया महापौर का पर्चा आज अधिकृत रूप से वापस लेंगे डागा।
- वार्ड 50 से जीते हैं डागा: कांग्रेस के टिकट पर विजयी हुए डागा की बगावत से पार्टी में क्रॉस-वोटिंग का अंदेशा गहरा गया था।
- अनिल कल्ला की राह आसान: आधिकारिक प्रत्याशी अनिल कल्ला के पक्ष में अब पूरा 42 पार्षदों का कुनबा एकजुट।
- भाजपा की रणनीति को झटका: सेंधमारी की फिराक में बैठी भाजपा की ‘क्रॉस वोटिंग’ योजना पूरी तरह ध्वस्त।
ख़बर बीकानेर। बीकानेर नगर निगम के महापौर चुनाव में बगावत के साये से जूझ रही कांग्रेस पार्टी ने ऐन वक्त पर सबसे बड़ा ‘डैमेज कंट्रोल’ कर दिखाया है। पार्टी के अधिकृत प्रत्याशी व पूर्व कैबिनेट मंत्री डॉ. बी.डी. कल्ला के भतीजे अनिल कल्ला के सामने वार्ड संख्या 50 से कांग्रेस के ही नवनिर्वाचित पार्षद नवरतन डागा ने निर्दलीय ताल ठोक कर मुकाबले को त्रिकोणीय और बेहद पेचीदा बना दिया था।
ग़ौरतलब है कि बीकानेर नगर निगम के 80 वार्डों में से कांग्रेस ने 42 सीटों पर ऐतिहासिक जीत हासिल कर स्पष्ट बहुमत हासिल किया था। लेकिन नवरतन डागा के बागी होने और निर्दलीय नामांकन भरने से भाजपा को क्रॉस-वोटिंग के जरिए सेंधमारी करने की उम्मीद दिखने लगी थी। इस अंदरूनी संकट को भांपते हुए प्रदेश नेतृत्व फौरन हरकत में आया।
डोटासरा से बंद कमरे में वार्ता, संगठन में मान-सम्मान के भरोसे पर सुलह
सूत्रों के अनुसार, बीकानेर की सियासत में उपजे इस गतिरोध को खत्म करने के लिए प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष गोविंद सिंह डोटासरा ने खुद मोर्चा संभाला। डोटासरा और नवरतन डागा के बीच एक अहम गोपनीय बैठक हुई, जिसमें स्थानीय समीकरणों और पार्टी के अनुशासन को लेकर विस्तार से चर्चा हुई।
वार्ता के दौरान पीसीसी चीफ ने स्पष्ट किया कि पूर्ण बहुमत मिलने के बाद किसी भी तरह का भितरघात न केवल पार्टी की छवि को नुकसान पहुंचाएगा, बल्कि कार्यकर्ताओं के परिश्रम पर भी पानी फेरेगा। संगठन सूत्रों का दावा है कि डागा को पार्टी और निगम स्तर पर यथोचित मान-सम्मान व अहम दायित्व देने का भरोसा दिया गया है, जिसके बाद उन्होंने पार्टी के अधिकृत प्रत्याशी के समर्थन में अपना निर्दलीय नामांकन वापस लेने का अंतिम फैसला लिया।
“नवरतन डागा का नामांकन वापस लेना बीकानेर कांग्रेस के लिए एक मास्टरस्ट्रोक साबित हुआ है। जैसलमेर बाड़ेबंदी में पहले से ही 28 से अधिक पार्षद अनिल कल्ला के पक्ष में लामबंद थे। अब डागा की वापसी से 42 पार्षदों का किला अभेद्य हो गया है और भाजपा की अप्रत्यक्ष सेंधमारी की तमाम संभावनाएं खत्म हो चुकी हैं।”
अनिल कल्ला का महापौर बनना लगभग तय, आज दाखिल होगी पर्चा वापसी
तय कार्यक्रम के अनुसार, नवरतन डागा आज निर्धारित समयावधि में निर्वाचन अधिकारी के समक्ष उपस्थित होकर अपना नाम वापस लेने की वैधानिक औपचारिकता पूरी करेंगे। इसके साथ ही अब चुनावी मैदान में कांग्रेस के अधिकृत प्रत्याशी अनिल कल्ला और भाजपा प्रत्याशी के बीच ही सीधा मुकाबला रह जाएगा।
संख्याबल के स्पष्ट गणित (कांग्रेस 42, भाजपा 27 और निर्दलीय 10) को देखते हुए अनिल कल्ला की जीत अब महज़ औपचारिकता नजर आ रही है। डागा के इस निर्णय से कांग्रेस कार्यकर्ताओं और कल्ला खेमे में भारी उत्साह का माहौल है और निगम मुख्यालय पर जश्न की तैयारियां तेज हो गई हैं।