🗳️ सियासी हलचल | बीकानेर नगर निगम चुनाव
बीकानेर नगर निगम चुनाव का मतदान संपन्न होते ही बोर्ड गठन को लेकर जोड़-तोड़ और क्रॉस वोटिंग की आशंका गहरा गई है। कांग्रेस ने सेंधमारी के डर से अपने तमाम 79 उम्मीदवारों को गंगाशहर के एक निजी होटल में बाड़ेबंदी में शिफ्ट कर दिया है, वहीं भाजपा ने भी अपने प्रत्याशियों को बीकानेर में ही ‘अंडर-सर्विलांस’ रखते हुए अपनी बिसात बिछा दी है।
📍 स्थान: बीकानेर
🕒 अपडेटेड: विशेष ग्राउंड रिपोर्ट
📂 कैटेगरी: निकाय सियासत
📌 सियासी समीकरण के 5 मुख्य बिंदु:
- कांग्रेस का जमावड़ा: मतदान के तत्काल बाद सभी 79 उम्मीदवारों को गंगाशहर की होटल में एकत्रित कर मंथन हुआ।
- वरिष्ठ नेताओं का पहरा: पूर्व मंत्री डॉ. बी.डी. कल्ला, यशपाल गहलोत और मदनगोपाल मेघवाल खुद चुनावी मोर्चे पर डटे।
- 14 सितंबर तक घेराबंदी: मतगणना के दिन तक उम्मीदवारों को बीकानेर अथवा आसपास सुरक्षित रखने की रूपरेखा।
- भाजपा की सतर्कता: प्रत्याशियों को सख्त हिदायत देकर बीकानेर में ही रुकने और फोन पर संपर्क में रहने के निर्देश।
- आगे का रोडमैप: 11 सितंबर को नगर पालिकाओं के चुनाव निबटते ही भाजपा भी अपने कुनबे को एक स्थान पर जुटाएगी।
ख़बर बीकानेर। बीकानेर नगर निगम चुनाव में मतदान की प्रक्रिया पूरी होते ही सियासी सरगर्मियां चरम पर पहुंच गई हैं। ईवीएम में प्रत्याशियों का मुकद्दर बंद होने के बाद अब राजनीतिक दलों का पूरा फोकस अपने-अपने संभावित विजेताओं को विरोधी खेमे की ‘सेंधमारी’ से महफ़ूज़ रखने पर टिक गया है। सूत्रों के अनुसार, शहर के दोनों प्रमुख दल—कांग्रेस और भारतीय जनता पार्टी—किसी भी सूरत में निगम की सत्ता गंवाना नहीं चाहते और इसी कड़ी में गुरुवार से बाड़ेबंदी की विधिवत शुरुआत कर दी गई है।
गंगाशहर के होटल में कांग्रेस की व्यूहरचना, दिग्गजों ने संभाली कमान
ग़ौरतलब है कि बुधवार शाम मतदान खत्म होते ही कांग्रेस संगठन हरकत में आ गया। पार्टी के सभी 79 प्रत्याशियों को गंगाशहर स्थित एक प्रमुख होटल में तलब किया गया, जहां देर रात तक मंथन का दौर चला। इस बैठक में पूर्व कैबिनेट मंत्री डॉ. बी.डी. कल्ला, पूर्व शहर अध्यक्ष यशपाल गहलोत और वर्तमान जिलाध्यक्ष मदन गोपाल मेघवाल ने खुद कमान संभालते हुए वार्डवार मतदान के रुझानों का आकलन किया।
तय रणनीति के तहत गुरुवार शाम सभी कांग्रेस प्रत्याशियों को दोबारा इसी होटल में हाजिर होने के निर्देश दिए गए हैं। पार्टी सूत्रों का कहना है कि 14 सितंबर को आने वाले नतीजों तक इन सभी को बीकानेर अथवा नजदीकी गुप्त ठिकानों पर कड़े पहरे में रखा जाएगा। यदि मतगणना के बाद बोर्ड बनने की स्थिति बनती है, तो निर्दलीय पार्षदों समेत पूरे दल को फौरन राजस्थान की सीमाओं से बाहर किसी अज्ञात रिसॉर्ट में शिफ्ट करने का बैकअप प्लान भी पूरी तरह तैयार है।
“नगर निगम में महापौर की कुर्सी पर काबिज होने के लिए जादुई आंकड़े की दरकार होगी। बीकानेर में कांटे की टक्कर को देखते हुए दोनों ही दलों को भीतरघात और निर्दलीयों के रुख का खौफ सता रहा है। यही वजह है कि वोटों की गिनती से पहले ही पार्षदों की किलेबंदी को अंतिम रूप दे दिया गया है।”
भाजपा की पैनी निगरानी: 11 सितंबर के बाद एकमुश्त बाड़ेबंदी की तैयारी
दूसरी ओर, भारतीय जनता पार्टी ने फिलहाल अपने प्रत्याशियों को खुले में रखा है, लेकिन पार्टी का खुफिया तंत्र हर उम्मीदवार की गतिविधि पर चौबीसों घंटे पैनी निगाह बनाए हुए है। संगठन नेतृत्व ने सभी भाजपा उम्मीदवारों को सख्त हिदायत जारी की है कि कोई भी प्रत्याशी बिना पूर्व सूचना के बीकानेर जिले की सीमा से बाहर नहीं जाएगा और संगठन के पदाधिकारियों के सतत संपर्क में रहेगा।
रणनीतिकारों के मुताबिक, 11 सितंबर को जिले की अन्य नगर पालिकाओं का मतदान संपन्न होने के बाद भाजपा के चुनाव प्रभारी सभी निगम प्रत्याशियों को एक निर्धारित स्थान पर एकत्र करेंगे। चूंकि राजस्थान में वर्तमान में भाजपा की सरकार है, लिहाजा पार्टी का प्लान अपने संभावित पार्षदों को राज्य से बाहर ले जाने के बजाय राजस्थान के ही किसी सुरक्षित जिले में कैंप करवाने का है, ताकि 14 सितंबर को परिणाम अनुकूल आते ही बिना किसी अड़चन के बोर्ड गठित किया जा सके।