🚨 बड़ी ख़बर | श्रीडूंगरगढ़ – बीकानेर
महाराष्ट्र की अमरावती सेंट्रल जेल में विचाराधीन बंदी के रूप में बंद श्रीडूंगरगढ़ मूल के आदिल कुरैशी की न्यायिक हिरासत के दौरान संदिग्ध परिस्थितियों में मौत हो गई। मकोका के तहत निरुद्ध बंदी की मौत के बाद परिजनों ने जेल प्रशासन पर उपचार में घोर लापरवाही का आरोप लगाते हुए उच्चस्तरीय जांच की मांग उठाई है।
📍 स्थान: श्रीडूंगरगढ़ / अमरावती
🕒 अपडेटेड: हालिया रिपोर्ट
📂 केस: न्यायिक हिरासत मौत
📌 मामले के 5 प्रमुख बिंदु:
- मृतक की पहचान: श्रीडूंगरगढ़ निवासी आदिल कुरैशी, जो मुंबई में प्रवासी के तौर पर रह रहा था।
- मकोका के तहत निरुद्ध: मुंबई के सांताक्रुज थाने में दर्ज मामले के तहत विचाराधीन कैदी (नंबर 2422/2026) के रूप में बंद था।
- हालिया शिफ्टिंग: लगभग 15 दिन पूर्व ही उसे मुंबई की तलोजा जेल से अमरावती सेंट्रल जेल स्थानांतरित किया गया था।
- जेल प्रबंधन का तर्क: आदिल पिछले चार सालों से ब्रेन ट्यूमर से पीड़ित था; बुधवार सुबह अचानक तबीयत बिगड़ने पर अस्पताल भेजा गया।
- परिजनों के गंभीर आरोप: परिजनों ने फ्रेजरपुरा थाने पहुंचकर जेल प्रशासन पर समय पर इलाज न देने की लापरवाही का आरोप लगाया।
ख़बर बीकानेर। बीकानेर जिले के श्रीडूंगरगढ़ कस्बे से जुड़ी एक बड़ी और सनसनीखेज ख़बर सामने आई है। कस्बे के मूल निवासी और लंबे अरसे से मुंबई में रह रहे आदिल कुरैशी की महाराष्ट्र की अमरावती सेंट्रल जेल में न्यायिक अभिरक्षा के दौरान असमय मौत हो गई। आदिल पर महाराष्ट्र संगठित अपराध नियंत्रण अधिनियम (MCOCA) और आर्म्स एक्ट समेत भारतीय न्याय संहिता की विभिन्न धाराओं में मुकदमे दर्ज थे और वह विचाराधीन बंदी के तौर पर जेल में निरुद्ध था।
अचानक बिगड़ी तबीयत और अस्पताल में तोड़ा दम: जेल प्रशासन का पक्ष
आधिकारिक सूत्रों से प्राप्त विवरण के मुताबिक, आदिल कुरैशी को महज़ 15 दिन पहले ही मुंबई की तलोजा जेल से प्रशासनिक व्यवस्थाओं के तहत अमरावती सेंट्रल जेल में शिफ्ट किया गया था। फ्रेजरपुरा पुलिस को जेल प्रबंधन द्वारा प्रेषित की गई आधिकारिक रिपोर्ट के अनुसार, बुधवार सुबह करीब 7:25 बजे आदिल को अचानक तेज चक्कर आए और वह अचेत हो गया। इसी दौरान उसकी नाक से अत्यधिक रक्तस्राव शुरू हो गया।
जेल के चिकित्सा प्रभाग की तत्कालिक संस्तुति पर बंदी को फौरन अमरावती जिला सामान्य अस्पताल ले जाया गया। हालांकि, अस्पताल की इमरजेंसी विंग में चिकित्सकों के अथक प्रयासों के बावजूद उसे बचाया नहीं जा सका और सुबह करीब 7:45 बजे ड्यूटी डॉक्टर श्रीकांत झडके ने उसे मृत घोषित कर दिया। जेल अधिकारियों का दावा है कि बंदी पहले से ही विगत चार वर्षों से ‘ब्रेन ट्यूमर’ जैसी गंभीर व्याधि से ग्रस्त था और कारागृह परिसर में उसे नियमित डॉक्टरी निगरानी में रखा जा रहा था।
“ग़ौरतलब है कि जब बंदी पूर्व से ही ब्रेन ट्यूमर जैसी असाध्य बीमारी से जूझ रहा था, तो तलोजा से अमरावती जेल ट्रांसफर के दौरान और बाद में उसकी मेडिकल हिस्ट्री के अनुरूप विशेष गहन चिकित्सा बंदोबस्त क्यों नहीं किए गए? यही बिंदु अब पूरी तफ्तीश के केंद्र में है।”
परिजनों ने लगाया लापरवाही का आरोप, थाने पहुंचकर की निष्पक्ष जांच की मांग
दूसरी ओर, बंदी की असमय मौत की इत्तला मिलते ही श्रीडूंगरगढ़ और मुंबई स्थित परिवार में कोहराम मच गया। शोकाकुल परिजनों ने जेल प्रशासन के दावों को सिरे से खारिज करते हुए इसे ‘कस्टोडियल नेग्लिजेंस’ (हिरासत में लापरवाही) करार दिया है। परिजनों का आरोप है कि आदिल की स्वास्थ्य स्थिति चिंताजनक होने के बावजूद जेल अस्पताल में उसे वक्त रहते जरूरी व उच्चस्तरीय जीवनरक्षक सुविधाएं मुहैया नहीं कराई गईं।
घटना के तुरंत बाद आक्रोशित परिजन अमरावती के फ्रेजरपुरा पुलिस थाने पहुंचे और लिखित शिकायत देकर मामले की न्यायिक मजिस्ट्रेट से निष्पक्ष तफ्तीश करवाने तथा जेल के दोषी अधिकारियों के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई करने की मांग उठाई है। फिलहाल पुलिस ने शव को मोर्चरी में रखवाकर पंचनामे और पोस्टमार्टम की वैधानिक प्रक्रिया शुरू कर दी है, जिसकी वीडियोग्राफी भी करवाई जा रही है।