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रणनीति की मुख्य बातें:
- देश के 300 से अधिक जिलों के लिए विशेष ‘एक्शन प्लान’ सक्रिय।
- अब तक औसत से 43% कम हुई है बारिश, 2 जुलाई तक कमजोर मानसून का अनुमान।
- 111 जिलों को ‘अत्यधिक संवेदनशील’ (High Priority) श्रेणी में रखा गया।
- किसानों को कम पानी वाली फसलों (मोटा अनाज, दलहन) की बुवाई की सलाह।
- तालाबों की मरम्मत और जल संचयन संरचनाओं को दुरुस्त करने के आदेश।
मानसून की बेरुखी: 11 साल का सबसे सूखा दौर?
बीकानेर। भारतीय मौसम विभाग (IMD) की हालिया रिपोर्टों ने केंद्र सरकार की चिंता बढ़ा दी है। ग़ौरतलब है कि मानसून की शुरुआत धीमी रही है और अब तक हुई वर्षा औसत से लगभग 43% कम दर्ज की गई है। कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने राज्यों के कृषि मंत्रियों और वैज्ञानिकों के साथ बैठक की समीक्षा करते हुए बताया कि ‘अल नीनो’ के प्रभाव के कारण इस वर्ष पिछले 11 वर्षों में सबसे कम बारिश होने की आशंका है। विशेषकर उन क्षेत्रों में जहाँ सिंचाई की सुविधा उपलब्ध नहीं है, वहां फसलों पर संकट के बादल मंडरा रहे हैं।
बदलना होगा फसलों का चक्र: केंद्र की एडवाइजरी
सरकार द्वारा तैयार की गई पडताल और कार्ययोजना के अनुसार, राज्यों को सलाह दी गई है कि वे वर्षा आधारित क्षेत्रों में किसानों को कम पानी वाली फसलों की ओर शिफ्ट करें। दलहन, तिलहन और मोटे अनाज (Millets) जैसी फसलों पर जोर देने को कहा गया है जो कम समय में तैयार हो सकती हैं। सूत्रों के अनुसार, केंद्र ने स्पष्ट किया है कि भले ही मानसून कमजोर हो, लेकिन देश के पास चावल और गेहूं का पर्याप्त भंडार सुरक्षित है, इसलिए खाद्य सुरक्षा को लेकर घबराने की आवश्यकता नहीं है।
इसके अतिरिक्त, राज्यों को तालाबों, चेक डैम और अन्य जल संचयन संरचनाओं की मरम्मत प्राथमिकता के आधार पर करने को कहा गया है। समीक्षा में यह बात सामने आई है कि ग्रामीण आय को सुरक्षित रखने के लिए जल संरक्षण ही एकमात्र स्थायी समाधान है। बीकानेर जैसे पश्चिमी राजस्थान के जिलों के लिए यह योजना विशेष महत्व रखती है, जहाँ खेती पूरी तरह मानसून और सीमित जल स्रोतों पर निर्भर है।
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