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कार्रवाई की मुख्य बातें:
- एसीबी बीकानेर की टीम ने घड़साना थाने के एसआई रामेश्वर लाल को किया ट्रैप।
- आरोपी अधिकारी को 20 हजार रुपये की रिश्वत लेते हुए रंगे हाथों पकड़ा गया।
- वर्ष 2025 के एक पुराने प्रकरण में कार्रवाई रोकने के बदले मांगी गई थी घूस।
- एडिशनल एसपी विनोद कुमार के नेतृत्व में टीम ने बिछाया था गिरफ्तारी का जाल।
- एसीबी मुख्यालय के निर्देशों पर अब आरोपी के ठिकानों पर भी हो सकती है तलाशी।
खाकी पर दाग: केस रफा-दफा करने का सौदा
बीकानेर। भ्रष्टाचार के खिलाफ जारी जीरो टॉलरेंस नीति के तहत बीकानेर एसीबी की टीम ने आज एक बड़ी सफलता अर्जित की है। ग़ौरतलब है कि घड़साना थाने में तैनात सब-इंस्पेक्टर (SI) रामेश्वर लाल द्वारा एक परिवादी को डरा-धमकाकर रिश्वत की मांग की जा रही थी। प्राप्त जानकारी के अनुसार, वर्ष 2025 में दर्ज एक आपराधिक प्रकरण में पक्ष में रिपोर्ट देने और कानूनी कार्रवाई नहीं करने की एवज में यह सौदेबाजी की गई थी। परिवादी ने इसकी सूचना बीकानेर एसीबी को दी, जिसके बाद शिकायत का सत्यापन करवाया गया।
एसीबी की मुस्तैदी: रंगे हाथों धरा गया अधिकारी
एडिशनल एसपी विनोद कुमार के नेतृत्व में गठित विशेष टीम ने जाल बिछाया और जैसे ही परिवादी ने एसआई रामेश्वर लाल को 20 हजार रुपये की राशि थमाई, टीम ने उसे धर दबोचा। सूत्रों के अनुसार, ट्रैप के दौरान आरोपी ने भागने की कोशिश भी की लेकिन मुस्तैद टीम ने उसे मौके पर ही काबू कर लिया। फिलहाल एसीबी की टीम आरोपी एसआई से कड़ी पूछताछ कर रही है और मामले की विस्तृत तफ्तीश जारी है।
एसीबी के आला अधिकारियों ने बताया कि इस मामले में भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम की विभिन्न धाराओं के तहत मुकदमा दर्ज किया जा रहा है। आरोपी के आवास और अन्य ठिकानों की भी जांच की जा सकती है ताकि उनकी आय से अधिक संपत्ति या अन्य अनियमितताओं का पता लगाया जा सके। इस कार्रवाई ने एक बार फिर यह साबित कर दिया है कि कानून से ऊपर कोई नहीं है, चाहे वह पुलिस का ही अधिकारी क्यों न हो।
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