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📍 बीकानेर / अलवर
🕵️♂️ स्पेशल सेल (दिल्ली पुलिस)
📌 खबर के मुख्य बिंदु
- ▶ दिल्ली पुलिस की ‘स्पेशल सेल’ ने इस खौफनाक और हाई-टेक जासूसी नेटवर्क का बहुत बड़ा पर्दाफाश किया
- ▶ बीकानेर और अलवर की सैन्य छावनियों (आर्मी कैंट) के पास गुपचुप तरीके से लगाए गए थे ‘सोलर सीसीटीवी कैमरे’
- ▶ इन विशेष और आधुनिक कैमरों का ‘लाइव वीडियो फुटेज’ (सीधा प्रसारण) सीधे पाकिस्तानी खुफिया एजेंसी ‘आईएसआई’ (आई.एस.आई.) तक भेजा जा रहा था
- ▶ इस भयंकर साज़िश के तार पाकिस्तान में बैठे हैंडलर्स और प्रतिबंधित आतंकी संगठन ‘बब्बर खालसा इंटरनेशनल’ (बी.के.आई.) से गहरे रूप से जुड़े पाए गए हैं
- ▶ स्पेशल सेल की सख्त कार्रवाई के बाद बीकानेर और अलवर से इन सभी संदिग्ध कैमरों को तुरंत हटवा दिया गया है और एक संदिग्ध जासूस को हिरासत में ले लिया गया है
नई दिल्ली / बीकानेर। भारत-पाकिस्तान की सीमा पर स्थित राजस्थान के सामरिक और सैन्य रूप से अति-संवेदनशील इलाकों में एक ऐसी गहरी साज़िश रची जा रही थी, जिसे जानकर देश की तमाम बड़ी खुफिया और सुरक्षा एजेंसियों के होश उड़ गए हैं। भारतीय सेना (आर्मी) और अर्धसैनिक बलों के जवानों की हर एक गतिविधि और हर एक हलचल पर दुश्मन देश बहुत ही बारीकी से नज़र रखे हुए था।
🛑 आर्मी कैंट के पास ‘सोलर कैमरों’ का खौफनाक जाल
देश की सबसे धाकड़ और खुफिया पुलिस विंग, दिल्ली पुलिस की ‘स्पेशल सेल’ ने इस बहुत बड़े जासूसी नेटवर्क (हनीट्रैप और स्पाई मॉड्यूल) का भांडाफोड़ किया है।
प्राप्त और पुख्ता जानकारी के अनुसार, देश के गद्दारों और जासूसों (स्लीपर सेल) ने बीकानेर और अलवर जैसी अहम सैन्य छावनियों (आर्मी कैंट) के बिलकुल पास, पेड़ों और खंभों पर बहुत ही चालाकी से आधुनिक ‘सोलर सीसीटीवी कैमरे’ (सौर ऊर्जा से चलने वाले कैमरे) लगा रखे थे। इन कैमरों को बिजली के तारों की ज़रूरत नहीं थी, इसलिए ये बिना किसी की नज़रों में आए भारतीय सेना की हर गाड़ी और हर जवान की पल-पल की ‘लाइव फुटेज’ सीधे पाकिस्तान की कुख्यात खुफिया एजेंसी आईएसआई (पाकिस्तानी खुफिया एजेंसी) के दफ्तरों तक पहुंचा रहे थे।
आईएसआई (ISI) और बब्बर खालसा का नापाक गठजोड़
स्पेशल सेल और खुफिया विभाग के वरिष्ठ सूत्रों (अधिकारियों) का कहना है कि यह कोई मामूली जासूसी का मामला नहीं है, बल्कि इसके तार सीधे तौर पर सीमा पार पाकिस्तान में बैठे खूंखार आकाओं (हैंडलर्स), आईएसआई और भारत में प्रतिबंधित खालिस्तानी आतंकी संगठन ‘बब्बर खालसा इंटरनेशनल’ से जुड़े हुए पाए गए हैं।
आतंकियों ने भारत में मौजूद अपने गद्दार एजेंटों और गुर्गों को बाकायदा यह खास ‘टास्क’ (ज़िम्मेदारी) दिया था कि वे देश के सबसे संवेदनशील सैन्य और अर्धसैनिक बलों के ठिकानों की बारीकी से रेकी (जांच) करें। उन गद्दारों को सेना की संवेदनशील जगहों की खुफिया फोटो और वीडियो बनाने, और वहां छिपकर ये हाई-टेक सोलर कैमरे स्थापित करने के लिए पाकिस्तान से भारी भरकम ‘फंडिंग’ (पैसे) भी दी जा रही थी।
“दिल्ली पुलिस की स्पेशल सेल ने तुरंत और सख्त कार्रवाई करते हुए, बीकानेर और अलवर के स्थानीय पुलिस प्रशासन के सहयोग से इन सभी संदिग्ध और खतरनाक सोलर कैमरों को छावनी क्षेत्रों के आसपास से तुरंत हटवा (उखड़वा) दिया है। इस मामले में पुलिस ने इलाके से एक बेहद संदिग्ध व्यक्ति (जासूस) को भी हिरासत में लिया है, जिससे पूछताछ की जा रही है।”
गिरफ्तार आतंकियों की निशानदेही पर खुला ये बड़ा राज़
आखिर पुलिस को इन खुफिया कैमरों का पता कैसे चला? जांच में यह बात भी खुलकर सामने आई है कि हाल ही में दिल्ली और पंजाब में राष्ट्रीय जांच एजेंसी (एनआईए) और स्पेशल सेल द्वारा की गई एक बहुत बड़ी कार्रवाई के दौरान ग्यारह (11) शातिर जासूसों और आतंकियों को गिरफ्तार किया गया था।
पुलिस रिमांड के दौरान जब इन आतंकियों से कड़ाई से पूछताछ की गई, तो उन्होंने ही इस खौफनाक साज़िश का कच्चा-चिट्ठा (राज) उगल दिया। उनकी ही पक्की निशानदेही (जानकारी) के आधार पर देश के विभिन्न शहरों और सैन्य ठिकानों के पास से ऐसे कुल नौ (9) हाई-टेक सोलर सीसीटीवी कैमरे बरामद किए गए हैं। इनमें से कई कैमरे राजस्थान (बीकानेर-अलवर) में लगाए गए थे।
सुरक्षा एजेंसियों ने गिरफ्तार किए गए आरोपियों के पास से मिले मोबाइल फोन, हार्ड डिस्क और अन्य डिजिटल उपकरणों (गैजेट्स) से भी बहुत बड़ी मात्रा में देश की सुरक्षा से जुड़ा अत्यंत संवेदनशील डेटा, खुफिया फोटो, वीडियो और सैन्य अधिकारियों की लोकेशन से जुड़ी अहम जानकारी भी ज़ब्त की है। फिलहाल, देश की सभी बड़ी खुफिया एजेंसियां (इंटेलिजेंस ब्यूरो) इस पूरे आतंकी और जासूसी नेटवर्क को गहराई से खंगालने, और इस गिरोह के बाकी फरार (बचे हुए) सदस्यों (स्लीपर सेल) को पकड़ने के लिए एक बहुत बड़ा ‘सर्च ऑपरेशन’ (तलाशी अभियान) चला रही हैं।
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⚠️ कानूनी अस्वीकरण एवं राष्ट्रीय सुरक्षा अपील
यह समाचार दिल्ली पुलिस (स्पेशल सेल) द्वारा दी गई आधिकारिक प्राथमिक जानकारी, गिरफ्तार आतंकियों से पूछताछ की रिपोर्ट्स और राष्ट्रीय सुरक्षा एजेंसियों की कार्रवाई पर आधारित है।
‘ख़बर बीकानेर’ आमजन से अपील करता है कि देश की सुरक्षा सर्वोपरि (सबसे ऊपर) है। यदि आपको सैन्य छावनी (आर्मी कैंट), एयरफोर्स स्टेशन या किसी भी संवेदनशील इलाके के आस-पास कोई भी लावारिस कैमरा, तार, संदिग्ध व्यक्ति या गतिविधि दिखाई दे, तो तुरंत स्थानीय पुलिस नियंत्रण कक्ष (डायल एक सौ बारह) या सैन्य अधिकारियों को इसकी पुख्ता सूचना दें। आपकी एक सतर्कता (जानकारी) किसी बहुत बड़ी साज़िश को नाकाम कर सकती है। जांच पूरी होने पर नए तथ्यों के अनुसार इस खबर को अपडेट किया जाएगा। पोर्टल किसी भी त्रुटि या परिवर्तन के लिए उत्तरदायी नहीं है।
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