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📍 डूंगर कॉलेज के पीछे, बीकानेर
🕵️♂️ मिलिट्री इंटेलिजेंस जांच
📌 खबर के मुख्य बिंदु
- ▶ स्थान: डूंगर कॉलेज के ठीक पीछे और सैन्य छावनी की परिधि (दीवार) से महज़ 100 से 150 फीट की दूरी पर
- ▶ मंगलवार को मिलिट्री इंटेलिजेंस की सतर्कता के कारण एक 10 फुट लंबी संदिग्ध भूमिगत सुरंग (टनल) का पर्दाफाश हुआ
- ▶ क्या-क्या मिला: सुरंग के अंदर से हेडफोन, बिजली के कटे हुए तार और कुछ अन्य तकनीकी (संदिग्ध) उपकरण बरामद हुए
- ▶ बड़ा सुराग: सुरंग के भीतर ’23 मार्च’ के एक अखबार में लिपटी हुई चार रोटियां (खाना) भी मिली हैं
- ▶ खतरा: सुरक्षा एजेंसियां इसे सेना की जासूसी, संचार लाइनों में सेंधमारी या किसी बड़ी ‘आतंकी साज़िश’ के रूप में देख रही हैं

बीकानेर। पाकिस्तान की सीमा से सटे राजस्थान के रणनीतिक (सामरिक) रूप से सबसे अहम शहर बीकानेर में मंगलवार को एक ऐसी घटना सामने आई, जिसने पूरी देश की सुरक्षा एजेंसियों (सुरक्षा बलों) की नींद उड़ा दी है। शहर के अति-संवेदनशील सैन्य क्षेत्र (आर्मी कैंट) की सुरक्षा में एक बहुत बड़ी सेंध लगाने की एक खौफनाक और सुनियोजित साज़िश का पर्दाफाश हुआ है।
🛑 छावनी से महज़ 100 फीट दूर मिली ‘सुरंग’
सेना की खुफिया इकाई ‘मिलिट्री इंटेलिजेंस’ की भारी सतर्कता (चोकसी) और नियमित गश्त के दौरान यह सनसनीखेज खुलासा हुआ।
जानकारी के अनुसार, शहर के प्रसिद्ध डूंगर कॉलेज के ठीक पीछे और सैन्य छावनी की परिधि (चारदीवारी) से बमुश्किल सौ से डेढ़ सौ (100-150) फीट की दूरी पर एक रहस्यमयी 10 फुट लंबी गुफानुमा संरचना (भूमिगत सुरंग) खुदी हुई पाई गई है।
सुरंग मिलने की इस भयंकर सूचना पर मिलिट्री इंटेलिजेंस के अलावा पुलिस और राज्य की कई अन्य खुफिया सुरक्षा एजेंसियां भारी दलबल के साथ तुरंत मौके पर पहुंच गईं और पूरे इलाके को चारों तरफ से सील कर (घेर) लिया गया।
तार, हेडफोन और 23 मार्च का अखबार
इस मामले को जो बात सबसे ज्यादा खतरनाक (संगीन) बनाती है, वह है इस सुरंग की बनावट और उसके अंदर से मिला संदिग्ध सामान। जब सुरक्षा बलों ने इस 10 फुट लंबी सुरंग के अंदर जाकर प्रारंभिक (शुरुआती) जांच की, तो वहां से कई संदिग्ध और तकनीकी उपकरण बरामद हुए।
सुरंग के अंदर से हेडफोन्स (सुनने के उपकरण), बिजली के कुछ कटे हुए तार और अन्य सामान मिला है। हैरान करने वाली बात यह भी है कि वहां पर ’23 मार्च’ के एक पुराने अखबार में लिपटी हुई चार रोटियां (बचा हुआ खाना) भी मिली हैं। इन सबूतों से यह साफ इशारा मिलता है कि इस सुरंग को खोदने वाले लोग 23 मार्च के आसपास यहां लंबे समय तक रुके थे और किसी बहुत बड़ी साज़िश को अंजाम देने की फिराक में थे।
“सुरक्षा विशेषज्ञ और खुफिया एजेंसियां इस बात की गहनता (गहराई) से जांच कर रही हैं कि कहीं इन उपकरणों (हेडफोन और तारों) का इस्तेमाल सेना के गोपनीय संचार नेटवर्क (कम्युनिकेशन लाइनों) को हैक करने, उनकी बातचीत सुनने (जासूसी) या फिर सैन्य क्षेत्र में किसी बड़े धमाके की साज़िश रचने के लिए तो नहीं किया जा रहा था।”
बड़ा सवाल: इतनी कड़ी सुरक्षा के बीच यह कैसे हुआ?
यह गुफा नुमा सुरंग किसने खोदी? इसके पीछे उन अज्ञात लोगों का मुख्य उद्देश्य (मकसद) क्या था? क्या यह किसी बड़े ‘स्लीपर सेल’ (आतंकी नेटवर्क) या दुश्मन देश के जासूसों का काम है? इन सभी गंभीर सवालों के जवाब तलाशने के लिए सुरक्षा एजेंसियां (इंटेलिजेंस विंग) दिन-रात एक कर रही हैं। आसपास लगे हुए सभी सीसीटीवी कैमरों (सुरक्षा कैमरों) के फुटेज खंगाले जा रहे हैं और संदिग्धों की तलाश में लगातार सघन दबिश (छापेमारी) दी जा रही है।
सबसे बड़ा और गंभीर प्रश्न यह खड़ा हो गया है कि सेना की इतनी कड़ी और 24 घंटे की सुरक्षा व गश्त के बावजूद, छावनी के बिल्कुल पास (सटे हुए इलाके में) इतनी लंबी सुरंग (टनल) कैसे और कब तैयार कर ली गई, और किसी को कानों-कान भनक तक क्यों नहीं लगी? हालांकि, मिलिट्री इंटेलिजेंस की इस अंतिम समय की सतर्कता को सुरक्षा के लिहाज से बेहद अहम माना जा रहा है, जिसने समय रहते देश की सुरक्षा पर आने वाले एक बहुत बड़े संभावित खतरे को टाल (विफल कर) दिया है।
फिलहाल डूंगर कॉलेज के पीछे और पूरी सैन्य छावनी के आसपास (परिधि में) सुरक्षा बलों की गश्त और निगरानी (चेकिंग) कई गुना बढ़ा दी गई है। आम नागरिकों के भी उस क्षेत्र में जाने पर पूरी तरह से सख्त पाबंदी लगा दी गई है।
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⚠️ कानूनी अस्वीकरण एवं राष्ट्रीय सुरक्षा अपील
यह समाचार भारतीय सुरक्षा एजेंसियों, मौके की स्थिति और मिलिट्री इंटेलिजेंस की प्राथमिक जानकारी (कार्रवाई) पर आधारित है। ‘ख़बर बीकानेर’ आमजन से अपील करता है कि सैन्य क्षेत्र या छावनी के आस-पास किसी भी प्रकार की संदिग्ध गतिविधि, लावारिस वस्तु, या अनजान व्यक्तियों को देखते ही तुरंत पुलिस नियंत्रण कक्ष (डायल 112) को सूचित करें।
यह मामला राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़ा है, इसलिए सोशल मीडिया पर इस घटना को लेकर कोई भी भ्रामक या अपुष्ट जानकारी (अफवाह) न फैलाएं। सेना और पुलिस की आधिकारिक जांच पूरी होने के बाद नए तथ्यों के आधार पर इस खबर को अपडेट किया जाएगा। पोर्टल किसी भी त्रुटि या परिवर्तन के लिए उत्तरदायी नहीं है।
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