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📍 गुजरात (वाडीनार पोर्ट)
🌊 मर्चेंट नेवी
📌 खबर के मुख्य बिंदु
- ▶ ईरान जंग के बीच भारत के लिए बड़ी राहत, सुरक्षित लौटे LPG भरे दो भारतीय जहाज
- ▶ ‘नंदादेवी’ जहाज 47 हजार मीट्रिक टन से ज्यादा LPG गैस लेकर गुजरात पोर्ट पर पहुंचा
- ▶ जहाज के चीफ ऑफिसर कृष्ण गोदारा ने सुनाई ‘स्ट्रेट ऑफ होर्मुज’ पार करने की कहानी
- ▶ कतर से 13 मार्च को भरकर चले थे, मिसाइलों और ड्रोन के खौफ के बीच 17 मार्च को भारत पहुंचे
- ▶ गोदारा ने ऑपरेशन में मदद के लिए भारतीय नेवी और भारत सरकार का शुक्रिया अदा किया

नई दिल्ली / वाडीनार। मध्य पूर्व (Middle East) में ईरान और इस्राइल के बीच मंडरा रहे युद्ध के काले बादलों और आसमान से गिरती मिसाइलों के बीच भारत के लिए एक बेहद सुकून देने वाली खबर सामने आई है। हजारों मीट्रिक टन एलपीजी (LPG) गैस से लदे दो भारतीय जहाज— ‘शिवालिक’ (Shivalik) और ‘नंदादेवी’ (Nanda Devi)— दुनिया के सबसे खतरनाक समुद्री रास्ते ‘स्ट्रेट ऑफ होर्मुज’ (Strait of Hormuz) को सुरक्षित पार कर भारत पहुंच गए हैं।
जब ये दोनों जहाज होर्मुज जलडमरूमध्य से गुजर रहे थे, तो पूरा भारत इनकी सलामती की दुआएं मांग रहा था। जरा कल्पना कीजिए, जिस इलाके के आसमान में लड़ाकू ड्रोन और मिसाइलें मंडरा रही हों, उस वक्त ज्वलनशील गैस (LPG) से भरे जहाज पर सवार भारतीय क्रू के दिलों में क्या गुजर रही होगी? इसी अनुभव को जानने के लिए हमने मर्चेंट नेवी के अफसर और ‘नंदादेवी’ जहाज के चीफ ऑफिसर कृष्ण गोदारा से खास बातचीत की।
🚢 मिसाइलों और ड्रोन का खौफ: गोदारा की जुबानी
हरियाणा के फतेहाबाद निवासी कृष्ण गोदारा ने बताया कि वे लंबे वक्त से इस रूट पर जहाज लाते-ले जाते रहे हैं, लेकिन इस बार का माहौल बिल्कुल अलग और खौफनाक था।
उन्होंने बताया, “वॉर (युद्ध) की स्थिति में हमेशा मिसाइल और ड्रोन हमलों का डर रहता है। इस बार सबसे मुश्किल और तनावपूर्ण माहौल था। मन में बस यही ‘एंजाइटी’ (तनाव) थी कि कहीं कुछ गलत न हो जाए, क्योंकि हमारे जहाज पर भारी मात्रा में एलपीजी गैस लदी थी।” हालांकि, उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि पैनिक (घबराहट) जैसी कोई स्थिति नहीं थी, क्रू पूरी तरह से अलर्ट था।
13 दिन समुद्र में रहे फंसे, फिर मिली हरी झंडी
चीफ ऑफिसर गोदारा ने जानकारी दी कि वे पिछले करीब 4 महीने से ‘नंदा देवी’ पर ही तैनात हैं। उनका जहाज 27 तारीख को मिडिल ईस्ट पहुंचा था, जहां युद्ध की आहट के चलते उन्हें 13 दिनों तक जहाज को एंकर (Anchor) पर ही रोक कर रखना पड़ा। इसके बाद 13 मार्च को कतर से एलपीजी लोड हुई और वे भारत के लिए रवाना हुए। 17 मार्च को यह जहाज सुरक्षित रूप से भारत की सीमा (गुजरात) में पहुंच गया।
गोदारा ने एक वायरल वीडियो संदेश के जरिए इस पूरे जटिल ऑपरेशन में मदद करने वाले शिपिंग कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया (SCI), भारत सरकार और विशेष रूप से भारतीय नौसेना (Indian Navy) का हृदय से आभार व्यक्त किया, जिन्होंने इस महासंकट की घड़ी में ‘स्ट्रेट ऑफ होर्मुज’ पार करने में उनकी पूरी सुरक्षा सुनिश्चित की। (ईरानी नेवी से जुड़ी गोपनीय बातों पर उन्होंने टिप्पणी करने से इंकार कर दिया)।
“नंदा देवी में 47 हजार मीट्रिक टन से ज्यादा लिक्विफाइड पेट्रोलियम गैस (LPG) आई है। यह अकेला जहाज भारत की कुल LPG आयात की जरूरत का लगभग एक दिन का हिस्सा पूरा करने की क्षमता रखता है।”
अभी भी 22 भारतीय जहाज हैं खाड़ी में
अधिकारियों के अनुसार, मिडिल ईस्ट संकट के बीच ‘स्ट्रेट ऑफ होर्मुज़’ से गुजरकर भारत आने वाला यह दूसरा बड़ा जहाज है। जब युद्ध के हालात बिगड़े थे, तब फ़ारसी खाड़ी में कुल 24 भारतीय ध्वज (Tricolor) वाले जहाज मौजूद थे। इनमें से ‘शिवालिक’ और ‘नंदा देवी’ सुरक्षित रूप से भारत आ गए हैं।
जहाज ‘नंदा देवी’ के गुजरात के वाडीनार बंदरगाह पर सुरक्षित पहुंचने के बाद, वहां से करीब 24 हजार मीट्रिक टन एलपीजी को तमिलनाडु के लिए भेज दिया गया है। इन जहाजों की सुरक्षित वापसी ने न केवल देशवासियों, बल्कि भारत के ऊर्जा बाजार (Energy Market) को भी एक बड़ी राहत दी है।
📝 संपादकीय नोट (Editorial Note)
यह विशेष रिपोर्ट विश्वसनीय समुद्री ट्रैकिंग स्रोतों एवं मर्चेंट नेवी अधिकारी द्वारा दी गई जानकारी पर आधारित है। ख़बर बीकानेर भारतीय नौसेना (Indian Navy) और उन सभी वीर नाविकों (Seamen) के अदम्य साहस को सलाम करता है, जो संकट के समय में भी देश की ऊर्जा सुरक्षा सुनिश्चित कर रहे हैं।
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