बीकानेर: सोने-चाँदी के भावों में तेज़ उतार-चढ़ाव, व्यापारियों की मनमानी ने बढ़ाई चिंता

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देशभर में सोने और चाँदी के दाम पिछले कुछ महीनों से लगातार उछाल-पछाड़ में हैं। जहां अंतरराष्ट्रीय बाज़ार की कमजोरी और डॉलर इंडेक्स में उतार-चढ़ाव कीमतों को प्रभावित कर रहे हैं, वहीं स्थानीय बाज़ार में व्यापारियों की मनमानी और अलग-अलग खरीद-बिक्री दर ने आम ग्राहकों की परेशानी बढ़ा दी है। निवेशक से लेकर आम गृहिणी तक, सभी इस अनिश्चितता से परेशान हैं।

एक ही शहर में कई ज्वेलर्स द्वारा अलग-अलग रेट लगाए जा रहे हैं। स्थिति यह है कि Buy Price कुछ और, Sell Price कुछ और—और फ़र्क कभी-कभी ₹2000 से ₹5000 प्रति 10 ग्राम तक पहुंच जाता है। यही नहीं सोने की तुलना में चाँदी में मुनाफाखोरी और भी ज़्यादा देखने को मिल रही है चाँदी में भी व्यापारियों ने मुनाफ़ाखोरी को नया रूप देते हुए खरीद और बिक्री में ₹10000 से ₹20000 तक अंतर बनाए रखा है। इससे न केवल पारदर्शिता का अभाव बढ़ा है, बल्कि आम उपभोक्ता इस उलझन में पड़ जाता है कि सही रेट आखिर है कौन-सा।

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आर्थिक विशेषज्ञों का कहना है कि अंतरराष्ट्रीय बाज़ार में मुद्रास्फीति, कच्चे तेल की कीमतें, वैश्विक राजनीतिक तनाव और फेडरल रिज़र्व की नीतियां—ये सभी सोने-चाँदी की कीमतों को प्रभावित करते हैं। लेकिन भारत जैसे देशों में एक अतिरिक्त समस्या है—स्थानीय व्यापारियों का ‘रेट गेम’। बड़े व्यापारी अक्सर एक-दूसरे से मिलकर रेट सेट करते हैं, जिससे एक तरह की मोनोपॉली (एकाधिकार व्यवस्था) बन जाती है। आम उपभोक्ता न तो विरोध कर पाता है और न ही बाजार का सटीक दाम चेक कर पाता है।

ग्राहकों की शिकायत है कि ज्यादातर दुकानों पर डिजिटल बोर्ड में दिखाया जाने वाला रेट और बिल में लिखा रेट अलग होता है। कुछ दुकानों में मेकिंग चार्ज के नाम पर अतिरिक्त शुल्क वसूला जाता है, तो कुछ जगहों पर चाँदी के रेट में बिना वजह अंतर रखा जाता है।

विशेषज्ञों का मानना है कि सरकार को इस पूरे सिस्टम में पारदर्शिता लाने के लिए कुछ महत्वपूर्ण कदम उठाने चाहिए—जैसे कि:

  1. सभी ज्वेलर्स के लिए एक समान रेट डिस्प्ले सिस्टम अनिवार्य करना।
  2. Hallmark Gold और Silver के लिए सख्त बिलिंग नियम।
  3. ऑनलाइन लाइव रेट से अधिक चार्ज लेने वालों पर कार्रवाई।
  4. उपभोक्ता अधिकार जागरूकता अभियान।

उपभोक्ताओं को भी सावधानी बरतनी चाहिए—जैसे कि खरीदारी से पहले लाइव रेट चेक करना, बिलिंग में हॉलमार्क की पुष्टि करना और किसी भी तरह के अतिरिक्त शुल्क पर सवाल पूछना।

कुल मिलाकर, सोने-चाँदी की कीमतों में उतार-चढ़ाव वैश्विक कारणों से तो प्रभावित हो ही रहे हैं, लेकिन स्थानीय स्तर पर चल रही व्यापारियों की मनमानी, अलग-अलग रेट और मुनाफ़ाखोरी ने लोगों की जेब पर और बड़ा असर डाला है। अब देखना यह है कि सरकार और उपभोक्ता संगठन इस मुद्दे पर किस तरह कड़ा कदम उठाते हैं।

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