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📅 17 मार्च 2026
📍 बीकानेर, राजस्थान
📌 खबर के मुख्य बिंदु
- ▶ 5 साल में 31 असिस्टेंट प्रोफेसर वन टाइम ऑप्शन से सुपर स्पेशलिटी में गए
- ▶ SMS मेडिकल कॉलेज जयपुर में सबसे ज्यादा 17 का पलायन
- ▶ एमबीबीएस छात्रों को फेकल्टी अभाव में गुणवत्तापूर्ण शिक्षण नहीं मिल पा रहा
- ▶ NMC निरीक्षण में मान्यता बचाने को अस्थाई फेकल्टी जुटानी पड़ती है
- ▶ चिकित्सकों ने प्रमुख शासन सचिव को ज्ञापन देकर 5 साल के कार्य बॉन्ड की मांग की
बीकानेर। चिकित्सा शिक्षकों की कमी से जूझ रहे चिकित्सा और स्वास्थ्य विभाग में उनके ही बनाए नियम आड़े आ रहे हैं। वन टाइम ऑप्शन के प्रावधान से असिस्टेंट प्रोफ़ेसर के पदों पर चयनित होकर एमसीएच और डीएम किए अभ्यर्थी सुपर स्पेशलिटी विभाग में चले जाते हैं। इससे एक बार तो असिस्टेंट प्रोफ़ेसरों के पद भर जाते हैं, लेकिन कुछ समय बाद वे खाली हो जाते हैं। जिससे मेडिकल कॉलेजों में चिकित्सा शिक्षकों की कमी रहती है।
इससे एक तरफ एमबीबीएस कर रहे विद्यार्थियों को फेकल्टी के अभाव में गुणवत्तापूर्ण शिक्षण नहीं मिल पाता। दूसरी तरफ मेडिकल कॉलेजों का राष्ट्रीय चिकित्सा आयोग द्वारा निरीक्षण किए जाने पर मान्यता बचाने के लिए अस्थाई रूप से इधर-उधर से फेकल्टी पद भरने पड़ते हैं।
RPSC भर्ती और MCH/DM धारकों का मुद्दा
राजस्थान लोक सेवा आयोग की ओर से हाल ही में मेडिकल कॉलेजों में असिस्टेंट प्रोफ़ेसर जनरल सर्जरी व अन्य विभागों के पदों पर भर्ती की गई। इसमें ऐसे अभ्यर्थियों का भी चयन किया गया है, जो एमसीएच (शल्य चिकित्सा के मास्टर) व डीएम (चिकित्सा में डॉक्टरेट) किए हुए हैं। इससे असिस्टेंट प्रोफ़ेसर पदों के लिए निर्धारित न्यूनतम योग्यता एमएस (मास्टर ऑफ़ सर्जरी) तथा एमडी (मास्टर ऑफ़ मेडिसिन) वाले अभ्यर्थियों के अवसर कम हो गए। साथ ही एमसीएच और डीएम किए अभ्यर्थी असिस्टेंट प्रोफ़ेसर के लिए चयनित होकर अपने सुपर स्पेशलिटी विभाग में चले जाते हैं। जिससे मूल पद फिर रिक्त हो जाता है।
वन टाइम ऑप्शन से मिला रास्ता
एमसीएच व डीएम योग्यताधारी असिस्टेंट प्रोफ़ेसर बनने के बाद वन टाइम ऑप्शन को चुनते हैं। जिससे वे सुपर स्पेशलिटी विभाग में चले जाते हैं। ऐसे में असिस्टेंट प्रोफ़ेसर वाला पद रिक्त हो जाता है। दूसरी तरफ सुपर स्पेशलिटी विभाग में सीधी भर्ती के पद कम हो जाते हैं। जिसका नुकसान न्यूनतम योग्यताधारी अभ्यर्थियों को होता है।
पांच साल में 31 का पलायन
पिछले 5 सालों में एमसीएच या डीएम वाले 31 अभ्यर्थी अपना मूल चयनित पद छोड़कर सुपर स्पेशलिटी विभागों में जा चुके हैं। आरटीआई से प्राप्त सूचना के अनुसार 5 साल में प्रदेश के सभी 6 मेडिकल कॉलेजों में 31 अभ्यर्थियों का चयन असिस्टेंट प्रोफ़ेसर मेडिसिन अथवा जनरल सर्जरी में हुआ। वे वन टाइम ऑप्शन का लाभ लेकर अपने मूल पद को छोड़कर अपनी एमसीएच/डीएम की सुपर स्पेशलिटी ब्रांच में चले गए।
📊 कॉलेजवार आंकड़े (RTI से प्राप्त)
| मेडिकल कॉलेज | पलायन |
|---|---|
| SMS मेडिकल कॉलेज, जयपुर | 17 |
| JLN मेडिकल कॉलेज, अजमेर | 5 |
| SP मेडिकल कॉलेज, बीकानेर | 4 |
| मेडिकल कॉलेज, जोधपुर | 3 |
| मेडिकल कॉलेज, कोटा | 1 |
| मेडिकल कॉलेज, उदयपुर | 1 |
| कुल | 31 |
पांच साल का अनुबंध हो
जानकारों का कहना है कि एमसीएच या डीएम एक सुपर स्पेशलिटी डिग्री है। लोक सेवा आयोग के माध्यम से अलग से भर्ती की जाती है। ऐसे अभ्यर्थी अपने विषय की भर्ती परीक्षा के लिए ही पात्र माने जाएं, इन्हें वन टाइम ऑप्शन न मिले। अथवा असिस्टेंट प्रोफ़ेसर जनरल सर्जरी / मेडिसिन विभाग में चयन होने पर 5 साल इसी पद पर रहने का अनुबंध पत्र लिया जाए।
चिकित्सकों ने उठाई आवाज
इस व्यवस्था से व्यथित कुछ चिकित्सकों ने प्रमुख शासन सचिव चिकित्सा एवं स्वास्थ्य विभाग को ज्ञापन भेजकर एमसीएच/डीएम अभ्यर्थियों के असिस्टेंट प्रोफ़ेसर के लिए चयन होने पर कम से कम 5 साल का कार्य बॉन्ड भरवाने की मांग की है।
व्यवस्था की समीक्षा हो
“सुपर स्पेशलिटी विभागों के लिए अलग से भर्ती परीक्षाएं होती हैं तो ऐसे अभ्यर्थियों के लिए अपनी भर्ती में ही आवेदन करने का प्रावधान होना चाहिए। सरकार को मौजूदा व्यवस्था की समीक्षा करनी चाहिए। सभी पद भरे होंगे तो मरीजों को बेहतर चिकित्सा सेवाएं मिलेंगी।”
— डॉ. सांवर मल कांटवा, एमबीबीएस, एमएस, जयपुर
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⚠️ Disclaimer: इस खबर में दी गई जानकारी विभिन्न स्रोतों एवं RTI से प्राप्त आंकड़ों के आधार पर तैयार की गई है।
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