ख़बर बीकानेर | 10 फ़रवरी 2026

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बीकानेर का ऐतिहासिक परकोटा सोमवार सुबह से ही पुष्करणा ओलंपिक सावा 2026 की रौनक से सराबोर रहा। शहर की गलियों में पारंपरिक परिधानों में सजे लोग, महिलाओं के लोकगीत और युवाओं का उत्साह देखने लायक था। देश-विदेश से पहुंचे प्रवासियों ने इस अनूठी परंपरा को नज़दीक से देखने के लिए भीड़ लगा दी।
🌸 परकोटे में दिनभर रही चहल-पहल
नत्थूसर गेट, मोहता चौक, बारह गुवाड़ चौक सहित पूरे परकोटे में सुबह से ही लोगों का आवागमन बढ़ गया।
महिलाओं की लहरिया ओढ़णियां, पुरुषों की पचरंगी साफे और बच्चों का उत्साह वातावरण को पूरी तरह उत्सवमय बना रहा।
लोकगीतों—
“बीरा रमक-झमक…”
—की धुनों ने माहौल में सांस्कृतिक सौंधापन घोल दिया।
🎉 दाल की रस्म ने बढ़ाया उत्साह
मुख्य सावे से एक दिन पूर्व आयोजित दाल की रस्म में वधु पक्ष की महिलाएं बड़े उत्साह के साथ वर पक्ष के घर पहुंचीं।
मोठ की दाल, मसाले और शगुन सामग्री के साथ गाए जा रहे पारंपरिक गीतों ने रस्म को और रोचक बना दिया।
बीकानेर की यह रस्म अपने हास्य-व्यंग्य और लोकगीतों के लिए जानी जाती है।
🌃 रातभर चौक-गलियां रहीं जगमग
सोमवार देर रात तक परकोटे के चौकों में भीड़ बनी रही।
ढोल-नगाड़ों की थाप, केसरिया लाड़ो की धुनें और युवाओं का नृत्य माहौल को जीवंत बनाए हुए था।
चाय की दुकानों पर देर रात तक बातचीत और गीत-संगीत का दौर चलता रहा।
👰♀️ मुख्य दिन की प्रमुख रस्में
10 फरवरी को आयोजित होने वाले मुख्य सावे में पारंपरिक रस्मों का विशेष महत्व है—
1. खीरोड़ा
वधु पक्ष वर पक्ष को कपड़े, बर्तन और सामग्री भेंट करता है। पंडित गौत्राचार करवाते हैं।
2. दूध और नहावन
वधु पक्ष द्वारा दूध और स्नान सामग्री लाने की शुभ रस्म।
3. अंजल पूजा
बारात प्रस्थान से पूर्व दूल्हे की पूजा की जाती है।
4. पैदल बारात
पुष्करणा समाज की विशिष्ट परंपरा, जिसमें दूल्हा विष्णु रूप में पैदल बारात निकालता है।
हजारों लोग इस दृश्य को देखने परकोटे में उपस्थित रहते हैं।
5. पाणिग्रहण और बरी
विवाह संस्कार के बाद वर पक्ष द्वारा उपहार व गहने भेंट किए जाते हैं।
🌍 प्रवासियों की बड़ी भागीदारी
कोलकाता, मुंबई, चेन्नई और विदेशों में बसे प्रवासी बीकानेरी बड़ी संख्या में शहर पहुंचे।
जो लोग शहर में मौजूद नहीं थे, उन्होंने ऑनलाइन लाइव कवरेज के माध्यम से कार्यक्रम का आनंद लिया।
🧓 परंपरा और आधुनिकता का संगम
पाटों पर बैठे बुजुर्ग पारंपरिक कहानियों और रस्मों की महत्ता समझाते नजर आए, जबकि युवा पीढ़ी उत्साहपूर्वक इन रीति-रिवाजों को समझने में लगी रही।
बच्चों के लिए यह दिन किसी त्योहार की तरह रहा—नए कपड़े, रिश्तेदारों से मुलाकात और मिठाइयों का आनंद।
⭐ शहर में झलका अपनापन और सामूहिकता
सामाजिक संगठनों, स्वयंसेवकों और युवाओं ने व्यवस्था, खान-पान, भीड़ नियंत्रण और मीडिया सहायता में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
लोगों का मानना है कि यह आयोजन सिर्फ विवाह नहीं, बल्कि बीकानेर की सांस्कृतिक पहचान और सामूहिकता का प्रतीक है।
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