फरवरी में देशभर में बारिश कम रहने की संभावना, उत्तर भारत सूखे की चपेट में, जानें क्यों?

ख़बर बीकानेर | 6 फ़रवरी 2026

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फरवरी उत्तर भारत में सर्दियों का सबसे अधिक वर्षा वाला महीना माना जाता है, लेकिन इस वर्ष भी सर्दियों की बारिश सामान्य से काफी कम रहने के संकेत मिल रहे हैं। पिछले छह वर्षों से फरवरी में वर्षा का प्रदर्शन लगातार कमजोर रहा है। वर्ष 2021 और 2023 में तो देशभर में 67–68% तक की भारी कमी दर्ज की गई थी। पिछले वर्ष भी फरवरी में कुल मिलाकर 30% वर्षा की कमी रही थी।

इस बार की फरवरी भी कमज़ोर रहने की संभावना है और हालिया वर्षों के सबसे कम बारिश वाले महीनों में शामिल हो सकती है।


🌬️ पश्चिमी विक्षोभ आए लेकिन असर केवल पहाड़ों तक सीमित

पिछले दो सप्ताह में कई पश्चिमी विक्षोभ उत्तर भारत से गुजरे, लेकिन इनका प्रभाव
सिर्फ पहाड़ी इलाकों तक ही सीमित रहा।

  • 9–10 फरवरी और 16–19 फरवरी के बीच पहाड़ों में बर्फबारी और बारिश के दो दौर संभावित
  • मैदानी इलाकों में 10 फरवरी को हल्की गतिविधि संभव
  • इसके बाद लंबा शुष्क दौर
  • तीसरे सप्ताह में आने वाला सिस्टम भी मौसम गतिविधि को केवल पहाड़ों तक ही सीमित रखेगा

इसका अर्थ है कि उत्तर भारत के मैदानी भागों में अच्छी सर्दियों की बारिश की उम्मीद नहीं है।


🌾 पूर्वी भारत में भी सूखा — कई राज्य पूरी तरह शुष्क

1 जनवरी से 5 फरवरी 2026 तक पूर्वी भारत में लगभग पूरी तरह सूखा बना रहा।
इसमें शामिल हैं:

  • बिहार
  • झारखंड
  • पश्चिम बंगाल
  • ओडिशा
  • छत्तीसगढ़

पूर्वोत्तर भारत की स्थिति भी लगभग ऐसी ही है और वहां भी मौसम गतिविधियां बेहद कमजोर रहीं।


🌡️ मध्य भारत में 77% बारिश की कमी — कमी और बढ़ सकती है

मध्य भारत मौसम प्रणालियों के प्रभाव से काफी दूर रहता है, इसलिए इस क्षेत्र में पहले से ही बारिश कम होती है।
इस सर्दी में अब तक 77% वर्षा की कमी दर्ज की गई है।
फरवरी के शेष दिनों में यह घाटा और बढ़ने की आशंका है।


🌦️ दक्षिण भारत भी सुस्त — प्री-मानसून अभी दूर

दक्षिण भारत में:

  • उत्तर–पूर्व मानसून लौट चुका है
  • प्री–मानसून गतिविधियां अभी शुरू नहीं हुई हैं

इस कारण आंध्र प्रदेश, तेलंगाना और कर्नाटक के कई हिस्सों में फरवरी में बहुत कम बारिश देखने को मिलेगी।


📉 फरवरी, जनवरी से भी खराब हो सकती है

देश में जनवरी 2026 में ही 31% बारिश की कमी दर्ज की जा चुकी है।
फरवरी का प्रदर्शन इससे भी खराब हो सकता है।

अगर यह स्थिति जारी रही, तो पूरे सर्दी सीजन में कुल बारिश की कमी 40% से अधिक पहुँच सकती है, जिसकी भरपाई बाद में कठिन हो जाएगी।

This information is based on details available on social media and other news sources

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