📅 16 मार्च 2026
📍 ताइवान जलडमरूमध्य
📌 खबर के मुख्य बिंदु
- ▶ शनिवार को ताइवान के पास 26 चीनी सैन्य विमान देखे गए
- ▶ 16 विमानों ने ADIZ (वायु रक्षा पहचान क्षेत्र) में प्रवेश किया
- ▶ 7 चीनी नौसेना जहाज भी ताइवान के आसपास देखे गए
- ▶ दो सप्ताह की शांति के बाद अचानक गतिविधि में तेज उछाल
- ▶ ट्रंप की चीन यात्रा (31 मार्च-2 अप्रैल) से पहले गतिविधि चिंताजनक
- ▶ चीन ने ताइवान पर कब्जे की कसम खाई है — बल प्रयोग से भी पीछे नहीं


ताइपे। ताइवान के रक्षा मंत्रालय ने रविवार को बताया कि शनिवार को द्वीप के पास 26 चीनी सैन्य विमान देखे गए। इनमें से 16 विमानों ने ताइवान के उत्तरी, मध्य और दक्षिण-पश्चिमी वायु रक्षा पहचान क्षेत्र (ADIZ) में प्रवेश किया। इसके साथ ही 7 चीनी नौसेना जहाज भी द्वीप के आसपास देखे गए।
दो सप्ताह की शांति के बाद अचानक उछाल
यह गतिविधि तब और भी चौंकाने वाली है क्योंकि पिछले दो सप्ताहों में चीनी सैन्य उड़ानों में असामान्य कमी देखी गई थी। ताइवान ने 27 फरवरी से 5 मार्च तक पूरे एक सप्ताह कोई भी चीनी विमान नहीं देखा जो मीडियन लाइन को पार करके ADIZ में घुसा हो। 6 मार्च को दो विमान दिखे, फिर चार दिन तक कोई नहीं। बुधवार से शुक्रवार के बीच छोटी संख्या में उड़ानें फिर शुरू हुईं।
चीनी सैन्य गतिविधि — आँकड़े
- शनिवार को कुल विमान — 26
- ADIZ में प्रवेश करने वाले — 16 विमान
- चीनी नौसेना जहाज — 7
- 27 फरवरी–5 मार्च — शून्य उड़ानें (ADIZ में)
- अब स्थिति — गतिविधि में तेज उछाल
अचानक कमी के पीछे क्या थे कारण?
विशेषज्ञों ने पिछली कमी के कई संभावित कारण बताए। पहला — चीन की वार्षिक संसदीय बैठक (National People’s Congress) जो उसी दौरान चल रही थी। हालांकि इस तरह की बैठकों के दौरान पहले भी उड़ानें घटी हैं, लेकिन इस बार की कमी कहीं अधिक उल्लेखनीय थी।
दूसरा संभावित कारण — अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की चीन यात्रा से पहले वाशिंगटन के साथ तनाव कम करने की कोशिश। व्हाइट हाउस के अनुसार ट्रंप 31 मार्च से 2 अप्रैल के बीच चीन जाएंगे, हालांकि बीजिंग ने इसकी आधिकारिक पुष्टि नहीं की है।
तीसरा कारण — कुछ विश्लेषकों का मानना है कि चीनी सेना संयुक्त प्रशिक्षण के एक नए मॉडल की ओर बढ़ रही है, जो सैन्य आधुनिकीकरण का हिस्सा हो सकता है।
ताइवान का रुख
ताइवान के रक्षा मंत्री वेलिंगटन कू ने पहले ही स्पष्ट कर दिया था कि चीनी उड़ानों में कमी के बावजूद ताइवान अपनी रक्षा मुद्रा नहीं बदलेगा। उन्होंने यह भी बताया कि भले ही हवाई उड़ानें कम हुई हों, चीन की नौसेना पास के समुद्री क्षेत्रों में सक्रिय बनी रही।
“चीन ने ताइवान पर कब्जा करने की कसम खाई है — बल प्रयोग से भी पीछे नहीं हटेगा। वर्षों से बीजिंग लगभग हर दिन ताइवान की ओर युद्धपोत और नौसेना जहाज भेज रहा है।”
— ताइवान रक्षा मंत्रालय
ताइवान-चीन विवाद की पृष्ठभूमि
चीन और ताइवान 1949 से अलग-अलग शासित हैं। चीन के गृहयुद्ध में हारने के बाद राष्ट्रवादी पार्टी (KMT) की सेना ताइवान चली गई थी। ताइवान बाद में सैन्य शासन से बहुदलीय लोकतंत्र में परिवर्तित हो गया, जबकि बीजिंग में कम्युनिस्ट पार्टी सत्ता में आई।
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📝 संपादकीय नोट
यह समाचार अंतर्राष्ट्रीय मीडिया रिपोर्ट्स एवं ताइवान रक्षा मंत्रालय की आधिकारिक जानकारी के आधार पर तैयार किया गया है।
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