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📍 वृंदावन / बीकानेर
🚩 आध्यात्मिक समाचार
📌 खबर के मुख्य बिंदु
- ▶ वृंदावन में संपन्न हुआ दो दिवसीय मग धर्म संसद ‘सौर धर्म यज्ञ महोत्सव’
- ▶ बीकानेर के आर.के. शर्मा “सौर धर्म रत्न” अलंकरण से सम्मानित
- ▶ श्री श्री 108 श्री रघुवंश भूषण आचार्य के निर्देशन में हुआ महायज्ञ
- ▶ वैचारिक समागम में सूर्योपासना, मातृशक्ति और संस्कारों पर हुआ मंथन
- ▶ देश भर (यूपी, बिहार, मुंबई, बीकानेर आदि) से शामिल हुए समाजबंधु
बीकानेर / वृंदावन। पावनधाम वृंदावन में पीआरसी (PRC) द्वारा आयोजित दो दिवसीय मग धर्म संसद ‘सौर धर्म यज्ञ महोत्सव’ पूरे हर्षोल्लास और आध्यात्मिक ऊर्जा के साथ संपन्न हुआ। इस महोत्सव का संयोजन शैलेश पाठक ने किया, जिसमें देश भर के सौर धर्म प्रेमीजनों ने बढ़-चढ़कर अपनी भागीदारी निभाई। बीकानेर के लिए यह आयोजन विशेष गौरव का क्षण रहा, क्योंकि यहाँ के आर.के. शर्मा को सर्वोच्च सम्मान से नवाजा गया।
कार्यक्रम के प्रथम दिवस पर श्रीरामबाग स्थित राम मंदिर परिसर में भव्य दीपोत्सव का आयोजन किया गया। शाम को पंडित गोपाल मिश्र द्वारा सुमधुर भजनों की प्रस्तुतियां दी गईं, जिसने उपस्थित श्रद्धालुओं को मंत्रमुग्ध कर दिया। दूसरे दिन श्री श्री 108 श्री रघुवंश भूषण आचार्य के निर्देशन में प्रकांड पंडितों और गुरुकुल के संस्कृत विद्यार्थियों के वैदिक मंत्रोच्चार के बीच ‘सौर धर्म यज्ञ’ संपन्न हुआ, जिसमें समाज और विश्व कल्याण के लिए पवित्र आहूतियां दी गईं।
🏅 प्रमुख अलंकरण एवं सम्मान
कार्यक्रम के दौरान बीकानेर के श्री आर.के. शर्मा को उनके उत्कृष्ट योगदान के लिए “सौरधर्म रत्न अलंकरण” से विभूषित किया गया।
इसके साथ ही, श्रीराम शर्मा और गणेशमल शर्मा-शांति शर्मा को “आदित्य प्रेरणा सम्मान” प्रदान कर सम्मानित किया गया।
वैचारिक समागम: सूर्योपासना और संस्कारों पर मंथन
यज्ञ के पश्चात एक विशाल वैचारिक समागम का आयोजन किया गया। इस सत्र के मुख्य अतिथि श्री श्री 108 श्री रघुवंश भूषण आचार्य रहे। मंच पर बीकानेर के आर.के. शर्मा, आजमगढ़ के राजेश मिश्र, मुंबई के प्रभु प्रकाश शर्मा, पंडित लक्ष्मी कांत कौशिक, कामिनी भोजक व बिहारी लाल वशिष्ठ विशिष्ट अतिथि के रूप में उपस्थित रहे।
संयोजक शैलेश पाठक द्वारा विषय प्रवर्तन किए जाने के बाद मंचासीन अतिथियों ने धर्म, रिश्तों, और पंचांग के पांच अंगों की विस्तृत व्याख्या की। वक्ताओं ने शिक्षा, संस्कार, संगठन की आवश्यकता, चार युगों का रहस्य, सूर्योपासना (सूर्य पूजा) का महत्व, सात्विक भोजन, तिलक लगाने की महत्ता और संस्कारों के निर्माण में मातृशक्ति (महिलाओं) की अहम भूमिका पर अपने गहरे विचार प्रकट किए। इनके अलावा प्रवीण मिश्रा (दिल्ली), गिरिजी महाराज, और सुरभी मिश्रा ने भी सभा को संबोधित किया।
“कार्यक्रम के दौरान बहुप्रतीक्षित ग्रंथ ‘‘श्रीसौरधर्मपञ्चागम’’ का भव्य लोकार्पण भी किया गया, जो सनातन धर्म प्रेमियों के लिए एक अमूल्य भेंट है।”
इस भव्य महोत्सव में देशभर से—बिहार, झारखंड, यूपी, उड़ीसा, दिल्ली, मुंबई, बीकानेर, मारवाड़ जंक्शन, बिठोवा सहित अन्य कई स्थानों से बड़ी संख्या में समाजबंधुओं और श्रद्धालुओं ने भाग लिया और आयोजन को ऐतिहासिक रूप से सफल बनाया।
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