ख़बर बीकानेर | 23 फ़रवरी 2026

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राजस्थान में भ्रष्टाचार को लेकर सियासत एक बार फिर गर्म हो गई है। इस बार मामला इसलिए अलग है, क्योंकि आरोप विपक्ष की तरफ़ से नहीं, बल्कि सत्तारूढ़ भाजपा के अपने विधायक जेठानंद व्यास ने ही खुले मंच से लगाए हैं। बीकानेर के सबसे बड़े सरकारी अस्पताल PBM हॉस्पिटल में प्लेसमेंट के नाम पर रुपये वसूले जाने के आरोपों ने पूरे प्रदेश में हलचल पैदा कर दी है।
विधायक व्यास का बड़ा आरोप: “मेरी सिफारिश वालों से भी पैसे लिए गए”
एक कॉलेज के उद्घाटन समारोह में बोलते हुए बीकानेर पश्चिम से BJP विधायक जेठानंद व्यास ने कहा कि—
- अस्पताल में 210 नर्सिंग स्टाफ की भर्ती की गई,
- भर्ती का काम एक प्लेसमेंट एजेंसी के माध्यम से हुआ,
- और प्रत्येक अभ्यर्थी से लगभग 1 लाख रुपये तक वसूले गए।
व्यास ने मंच से कहा:
“भ्रष्टाचार की हद तो देखिए, जिन अभ्यर्थियों की सिफारिश मैंने खुद की थी, उनसे भी पैसे लिए गए। यह युवाओं के भविष्य के साथ खिलवाड़ है।”
उनके इस बयान ने प्रशासनिक तंत्र और स्वास्थ्य विभाग को कटघरे में खड़ा कर दिया है।
कांग्रेस का हल्ला बोल: “जब विधायक ही असहाय हैं, जनता किससे उम्मीद करे?”
विपक्ष ने इस मुद्दे को तुरंत लपक लिया।
राजस्थान के नेता प्रतिपक्ष टीकाराम जूली ने कहा:
- “जब खुद सत्ता पक्ष के विधायक भ्रष्टाचार की पोल खोल रहे हैं, तो सरकार क्या कार्रवाई करेगी?”
- “क्या मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा इस पर उच्च स्तरीय जांच कराएंगे?”
कांग्रेस ने यह भी पूछा कि क्या अस्पताल में यह प्लेसमेंट मॉडल सरकार की जानकारी में था या नहीं।
बीकानेर कांग्रेस के कार्यकर्ताओं ने जिला कलेक्टर कार्यालय पर प्रदर्शन करते हुए:
- भर्ती प्रक्रिया की निष्पक्ष जांच,
- प्लेसमेंट एजेंसी पर कार्रवाई,
- और संबंधित अधिकारियों की जवाबदेही तय करने की मांग रखते हुए ज्ञापन सौंपा।
प्रदर्शन में आरोप लगाए गए कि यह “संगठित और योजनाबद्ध भ्रष्टाचार” है, जिसके बिना उच्च स्तर की सांठगांठ संभव नहीं।
स्वास्थ्य विभाग के भर्ती मामलों से जुड़े जानकारों के अनुसार:
- कई सरकारी अस्पतालों में प्लेसमेंट एजेंसियां नर्सिंग व पैरामेडिकल स्टाफ प्रदान करती हैं।
- इन एजेंसियों को टेंडर मिलता है और वे युवाओं से “जॉब दिलाने” के नाम पर मोटी रकम वसूलती हैं।
- आरोप है कि PBM अस्पताल के 210 पदों के लिए भी यही मॉडल अपनाया गया।
यदि यह आरोप सही पाए जाते हैं तो यह राजस्थान के मेडिकल सेक्टर में बड़ा सिस्टम फेलियर माना जाएगा।
राजनीतिक विश्लेषकों के अनुसार यह मामला दो बड़ा सवाल खड़ा करता है:
- क्या सरकारी नियुक्तियों में राजनीतिक सिफारिशें नैतिक रूप से सही हैं?
- क्या प्लेसमेंट एजेंसियों को सरकारी अस्पतालों में इतनी शक्ति मिलनी चाहिए कि वे रुपये लेकर भर्ती करें?
विशेषज्ञों का मानना है कि व्यास ने भ्रष्टाचार पर प्रहार करके मुद्दे को उजागर किया है, लेकिन साथ ही यह स्वीकारना कि उन्होंने सिफारिशें भेजीं, उन्हें भी बहस के केंद्र में ले आया है।
सरकार के सामने दो बड़े प्रश्न
- क्या सरकार तुरंत उच्च स्तरीय जांच की घोषणा करेगी?
- क्या प्लेसमेंट एजेंसियों का मॉडल खत्म कर सीधी भर्ती प्रणाली लागू की जाएगी?
यदि कार्रवाई नहीं होती, तो यह मामला आने वाले महीनों में राज्य की राजनीति में बड़ा मुद्दा बन सकता है।
BJP विधायक के आरोप न सिर्फ PBM अस्पताल बल्कि पूरे स्वास्थ्य तंत्र की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल उठाते हैं। अब सबकी नजर इस बात पर है कि मुख्यमंत्री और प्रशासन इसे कितनी गंभीरता से लेते हैं और क्या कार्रवाई होती है। यह मुद्दा युवाओं, बेरोजगारों और पूरे मेडिकल सेक्टर से सीधे जुड़ा है, इसलिए आने वाले दिनों में यह राजनीति की धुरी बन सकता है।
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