📅 08 मार्च 2026
📍 बीकानेर, राजस्थान
⚖️ जिला न्यायालय
📌 खबर के मुख्य बिंदु
- ▶ न्यायाधीश अश्वनी विज ने चारों बेटों को बराबर हिस्सा देने का आदेश दिया
- ▶ SBI लॉकर में ₹60,17,760 का सामान, FD-खातों में ₹8,52,631
- ▶ बैंक में कोई नॉमिनी नहीं था — इसलिए कोर्ट से उत्तराधिकार प्रमाण पत्र लेना पड़ा
- ▶ चारों भाइयों को एक महीने में न्याय शुल्क जमा करना होगा
- ▶ मृतक बेटी इन्द्रा आचार्य के बच्चों ने कोई आपत्ति नहीं जताई
- ▶ उत्तराधिकार प्रमाण पत्र और प्रशासन पत्र जारी होगा
बीकानेर। जिला न्यायालय ने स्वर्गीय देवकृष्ण हर्ष और उनकी पत्नी दुर्गादेवी हर्ष के बैंक लॉकर व जमा राशि को लेकर चल रहे विवाद में अहम फैसला सुनाया है। न्यायाधीश अश्वनी विज ने आदेश दिया कि मृतक दंपत्ति की करीब ₹69 लाख की संपत्ति में उनके चारों बेटों को बराबर — यानी एक-एक चौथाई हिस्सा दिया जाएगा।
क्या था पूरा मामला?
देवकृष्ण हर्ष का निधन 9 नवंबर 2019 को और उनकी पत्नी दुर्गादेवी हर्ष का निधन 14 दिसंबर 2021 को हुआ था। उनके पीछे चार बेटे — कमल किशोर हर्ष, विजय कुमार हर्ष, ओमप्रकाश हर्ष और सत्यनारायण हर्ष — तथा एक बेटी इन्द्रा आचार्य थीं। बेटी इन्द्रा आचार्य का भी पहले निधन हो चुका है, जिनके दो बच्चे हैं।
मृतक दंपत्ति के नाम से भारतीय स्टेट बैंक की सिटी हॉस्पिटल के सामने स्थित शाखा में बैंक लॉकर, एफडी और बचत खाते थे। बैंक में किसी को भी नॉमिनी नहीं बनाया गया था, जिसके कारण परिवार को लॉकर खोलने और जमा राशि प्राप्त करने के लिए कोर्ट का दरवाजा खटखटाना पड़ा।
💰 संपत्ति का ब्यौरा
🏦 SBI लॉकर (अनुमानित मूल्य)
₹60,17,760
💳 FD + बचत खाते
₹8,52,631
📊 कुल संपत्ति
₹68,70,391
कोर्ट का फैसला
सुनवाई के दौरान न्यायाधीश अश्वनी विज ने पाया कि बैंक खातों और एफडी में करीब ₹8,52,631 जमा हैं जबकि लॉकर में रखे सामान का मूल्यांकन करीब ₹60,17,760 किया गया है। कोर्ट ने आदेश दिया कि चारों बेटों को संपत्ति में एक-एक चौथाई हिस्सा दिया जाएगा।
“चारों भाई एक महीने के भीतर अपने-अपने हिस्से के अनुसार निर्धारित न्याय शुल्क जमा करें, इसके बाद उत्तराधिकार प्रमाण पत्र और लॉकर के लिए प्रशासन पत्र जारी किया जाएगा।”
— न्यायाधीश अश्वनी विज, जिला न्यायालय बीकानेर
👨👨👦 उत्तराधिकारी — चारों भाई
- ① कमल किशोर हर्ष — ¼ हिस्सा
- ② विजय कुमार हर्ष — ¼ हिस्सा
- ③ ओमप्रकाश हर्ष — ¼ हिस्सा
- ④ सत्यनारायण हर्ष — ¼ हिस्सा
📝 मृतक बेटी इन्द्रा आचार्य के बच्चों ने कोई आपत्ति नहीं जताई।
नॉमिनी न होने का सबक
⚠️ जरूरी सलाह — बैंक नॉमिनी जरूर बनाएं
- ✔ बैंक खाते, FD और लॉकर में नॉमिनी जरूर जोड़ें
- ✔ नॉमिनी न होने पर परिवार को कोर्ट जाना पड़ता है
- ✔ कोर्ट की प्रक्रिया में समय और पैसा दोनों लगते हैं
- ✔ नॉमिनी अपडेट करना बिल्कुल मुफ्त है
यह मामला बीकानेर के अन्य परिवारों के लिए भी एक सबक है। बैंक में नॉमिनी न होने की स्थिति में परिवार को कानूनी प्रक्रिया से गुजरना पड़ता है जो न केवल समय लेती है बल्कि आर्थिक रूप से भी बोझिल होती है।
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📋 स्रोत एवं संदर्भ | Source
यह समाचार बीकानेर जिला न्यायालय एवं स्थानीय विश्वसनीय सूत्रों से प्राप्त जानकारी के आधार पर ख़बर बीकानेर की रिपोर्टिंग टीम द्वारा तैयार किया गया है।
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