बीकानेर: राजस्थान में निजी बस ऑपरेटरों की अनिश्चितकालीन हड़ताल 23 फरवरी से

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बीकानेर। जिले में निजी बस ऑपरेटर्स ने 23 फरवरी 2026 से अनिश्चितकालीन हड़ताल का ऐलान कर दिया है, जिससे पूरे क्षेत्र में परिवहन व्यवस्था के प्रभावित होने की आशंका बढ़ गई है। इस हड़ताल का प्रभाव ना केवल बीकानेर जिले तक सीमित रहने वाला है, बल्कि देश के कई राज्यों में भी इसका असर देखने को मिलेगा। निजी बस मालिकों के अनुसार उनकी लंबे समय से लंबित मांगों पर सरकार की चुप्पी और कार्रवाई की कमी ने उन्हें यह कदम उठाने पर मजबूर किया है।

हड़ताल को देशभर से मिला समर्थन

निजी बस यूनियनों की घोषणा के बाद यह आंदोलन अब व्यापक रूप लेता जा रहा है। हड़ताल को राजस्थान, मध्यप्रदेश, गुजरात, और महाराष्ट्र सहित कई राज्यों के निजी बस ऑपरेटर संगठनों ने समर्थन देने की घोषणा की है।
इन राज्यों की यूनियनों ने स्पष्ट किया है कि निजी बस परिवहन से जुड़े मौजूदा नियमों, टैक्स स्ट्रक्चर, फिटनेस शुल्क, रूट परमिट और अन्य नीतिगत मुद्दों पर सरकार द्वारा कोई ठोस निर्णय न लिया जाना, पूरे परिवहन उद्योग को संकट की ओर धकेल रहा है।

देशभर के बस ऑपरेटर्स संगठनों ने यह भी कहा कि अगर सरकार ने इस बार वार्ता के लिए गंभीरता नहीं दिखाई, तो यह आंदोलन लंबे समय तक चल सकता है।

बीकानेर बस ऑपरेटर एसोसिएशन का बड़ा निर्णय

स्थानीय स्तर पर बीकानेर बस ऑपरेटर एसोसिएशन की महत्वपूर्ण बैठक आयोजित की गई, जिसमें सभी सदस्यों ने विस्तृत चर्चा के बाद यह निर्णय लिया कि 23 फरवरी 2026 की मध्यरात्रि से बीकानेर जिले की सभी प्रकार की निजी बसें अनिश्चितकालीन हड़ताल पर रहेंगी।
यह निर्णय पूर्ण सर्वसम्मति से लिया गया, जो इस बात का संकेत है कि बस मालिक अब किसी भी परिस्थिति में पीछे हटने के मूड में नहीं हैं।

एसोसिएशन के अध्यक्ष समुद्र सिंह राठौड़ ने बताया कि इस हड़ताल में जिले की—

  • स्लीपर बसें
  • स्टेज कैरिज (लोक परिवहन) बसें
  • ग्रामीण रूटों पर चलने वाली बसें

सभी शामिल रहेंगी। उनके अनुसार यह आंदोलन केवल बीकानेर में नहीं, बल्कि राजस्थान के विभिन्न जिलों में एकजुटता के साथ किया जाएगा।

बस मालिकों की प्रमुख माँगें क्या हैं?

निजी बस ऑपरेटर लंबे समय से कई समस्याओं का सामना कर रहे हैं, जिनमें प्रमुख हैं—

  1. टैक्स और फीस में अत्यधिक वृद्धि
  2. फिटनेस और परमिट प्रक्रिया में जटिलताएँ
  3. सरकारी बसों को प्राथमिकता और निजी बसों की अनदेखी
  4. रूट परमिट आवंटन में अनियमितताएँ
  5. ऑनलाइन टिकटिंग कंपनियों द्वारा अत्यधिक कमीशन वसूली

बस मालिकों का कहना है कि बार-बार सरकार से संवाद का प्रयास किया गया, लेकिन नीतियों में सुधार को लेकर कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया। यही कारण है कि अब उद्योग सड़क पर उतरने के लिए मजबूर हो गया है।

हड़ताल का आम जनता पर संभावित असर

बीकानेर और आसपास के ग्रामीण क्षेत्रों में निजी बसें लोगों की दैनिक यात्रा का मुख्य साधन हैं।
अनिश्चितकालीन हड़ताल शुरू होते ही—

  • छात्रों,
  • नौकरीपेशा लोगों,
  • ग्रामीण यात्रियों,
  • मरीजों और शहर के बाहर आने-जाने वालों

को सबसे अधिक परेशानी होगी।
विशेषकर ग्रामीण रूटों पर सरकारी बसों की कमी के कारण यह हड़ताल आम लोगों को सीधे प्रभावित करेगी।

सरकार की ओर से अभी तक कोई प्रतिक्रिया नहीं

हालाँकि हड़ताल की घोषणा के बाद परिवहन विभाग के अधिकारी स्थिति पर नजर बनाए हुए हैं, लेकिन अब तक सरकार की ओर से कोई औपचारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।
बस ऑपरेटरों का कहना है कि यदि सरकार जल्द बैठकर समाधान नहीं निकालती है, तो यह हड़ताल लंबे समय तक जारी रहेगी और इसका भारी आर्थिक और सामाजिक असर होगा।

आगे क्या?

एसोसिएशन ने स्पष्ट किया है कि उनका उद्देश्य जनता को परेशान करना नहीं, बल्कि अपनी जायज मांगों को सरकार तक मजबूती से पहुँचाना है।
अब सभी की निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि सरकार और निजी बस यूनियनों के बीच वार्ता कब और कैसे शुरू होती है।

This information is based on details available on social media and other news sources

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