ख़बर बीकानेर | 20 फ़रवरी 2026

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बीकानेर में आरजीएचएस (Rajasthan Government Health Scheme) के क्लेमों में बड़े पैमाने पर फर्जीवाड़ा सामने आया है। इस मामले में पवनपुरी स्थित डॉ. बोथरा डायग्नोस्टिक एंड इमेजिंग सेंटर के खिलाफ जयनारायण व्यास कॉलोनी थाने में मुकदमा दर्ज किया गया है। यह FIR चिकित्सा एवं स्वास्थ्य विभाग के डिप्टी सीएमएचओ डॉ. लोकेश गुप्ता की रिपोर्ट के आधार पर की गई है, जिसमें लगभग एक वर्ष की अवधि के क्लेमों में गंभीर अनियमितताएं उजागर हुई हैं।
एक साल की अवधि में क्लेमों में मिली गंभीर गड़बड़ी
शिकायत के अनुसार, 1 सितंबर 2024 से 15 सितंबर 2025 के बीच आरजीएचएस योजना के तहत जिन क्लेमों को पेश किया गया था, उनकी जांच में कई चौंकाने वाली बातें सामने आईं। विभागीय टीम द्वारा की गई ऑडिट रिपोर्ट में पाया गया कि:
- कई मरीजों से आवश्यकता से अधिक जांचें करवाई गईं
- एक ही परिवार के सभी सदस्यों को एचआईवी टेस्ट दर्ज कर दिए गए
- कम उम्र के बच्चों के लिए आरए फैक्टर, इंफेक्शन प्रोफाइल और शुगर जैसी गैर-जरूरी जांचें शामिल की गईं
- एक मरीज जिसका HbA1c सामान्य स्तर पर था, उसके लिए भी डायबिटिक टेस्ट और संबंधित जांचों का क्लेम दाखिल किया गया
इन सभी बिंदुओं से यह स्पष्ट हुआ कि क्लेमों को बढ़ाने के लिए मेडिकल जांचों को बेवजह बढ़ा-चढ़ाकर बिल किया गया है। जांच दल ने इसे आरजीएचएस के दुरुपयोग का गंभीर मामला बताया है।
OPD स्लिप पर डॉक्टरों के फर्जी हस्ताक्षर का बड़ा खुलासा
जांच में सबसे गंभीर तथ्य तब सामने आया जब OPD स्लिप पर लगे डॉक्टरों के हस्ताक्षर संदिग्ध पाए गए। रिपोर्ट में कहा गया कि—
- कई स्लिप्स पर पीबीएम हार्ट हॉस्पिटल और मेडिसिन विभाग के डॉक्टरों के नाम और हस्ताक्षर दर्ज किए गए थे
- संबंधित डॉक्टरों से पूछने पर उन्होंने इन हस्ताक्षरों और मुहरों को नकार दिया
- यह स्पष्ट हुआ कि स्लिप्स में साइन मिसमैच है और कई दस्तावेजों पर फर्जी हस्ताक्षर किए गए हैं
हस्ताक्षर फर्जी होने की पुष्टि ने पूरे मामले को और गंभीर बना दिया है, क्योंकि यह न सिर्फ वित्तीय फर्जीवाड़ा बल्कि दस्तावेजों की जालसाजी का भी मामला है।
पुलिस ने रिकॉर्ड जब्त कर शुरू की विस्तृत जांच
जयनारायण व्यास कॉलोनी थाने के एसएचओ ने बताया कि FIR दर्ज होने के बाद पुलिस ने सक्रियता के साथ जांच शुरू कर दी है। पुलिस द्वारा उठाए गए प्रमुख कदम निम्न हैं—
- डिप्टी सीएमएचओ से पूरा उपचार रिकॉर्ड और क्लेम से जुड़े दस्तावेज मंगवाए गए हैं
- OPD स्लिप पर जिन डॉक्टरों के नाम और हस्ताक्षर उपयोग किए गए हैं, उनसे व्यक्तिगत पूछताछ की जाएगी
- जिस अवधि में जांचें और टेस्ट किए गए, उन सभी की विस्तृत सूची का क्रॉस-वेरिफिकेशन किया जाएगा
- लैब रिपोर्ट, बिलिंग, टेस्ट की संख्या और मरीजों की असली जरूरत के आधार पर मिलान किया जाएगा
पुलिस इस केस को गंभीर आर्थिक अपराध मानते हुए भारतीय न्याय संहिता की विभिन्न धाराओं के तहत कार्रवाई कर रही है।
आरजीएचएस परियोजना निदेशक की ऑडिट रिपोर्ट से मामला उजागर
पूरा मामला तब सतह पर आया जब आरजीएचएस योजना की परियोजना निदेशक ने क्लेम ऑडिट करवाई। ऑडिट में निम्नलिखित गड़बड़ियां मिलीं—
- अनियमित और अनावश्यक टेस्ट
- संदिग्ध मेडिकल रिपोर्ट
- फर्जी हस्ताक्षर
- अत्यधिक बिलिंग
- जरूरत से ज्यादा जांचें दिखाना
इन अनियमितताओं की पुष्टि के बाद मामला सीधे पुलिस तक पहुंचाया गया, जिसके बाद FIR दर्ज हुई।
बीकानेर में मामला बना चर्चा का केंद्र
फर्जीवाड़ा सामने आने के बाद यह पूरा मामला बीकानेर शहर में चर्चा का प्रमुख विषय बन गया है। आमजन से लेकर स्वास्थ्य विभाग तक, हर कोई इस बात को लेकर चिंतित है कि आरजीएचएस जैसी महत्वपूर्ण योजना का इस तरह से दुरुपयोग हुआ। इसे शहर का अब तक का बड़ा क्लेम फ्रॉड माना जा रहा है।
पुलिस का कहना है कि जांच में किसी भी आरोपी को बख्शा नहीं जाएगा और सभी तथ्यों के उजागर होते ही कानूनी कार्रवाई की जाएगी। स्वास्थ्य विभाग भी इस मामले को लेकर सतर्क हो गया है और भविष्य में ऐसे मामलों को रोकने के लिए सख्त कदम उठाने की तैयारी कर रहा है।
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