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🌾 कृषि एवं किसान | नहर रेगुलेशन
इंदिरा गांधी नहर परियोजना (IGNP) क्षेत्र के किसानों के लिए राज्य सरकार ने राहत भरा कदम उठाते हुए रबी फसल वर्ष 2026-27 का बहुप्रतीक्षित रेगुलेशन जारी कर दिया है। बांधों में पानी की भारी किल्लत और खाजूवाला सहित विभिन्न मंडियों में चल रहे किसान आंदोलनों के बीच विभाग ने 27 जनवरी 2027 तक 5 बारियां पानी देने का ऐलान किया है, वहीं हालात सुधरने पर एक अतिरिक्त बारी देने का विकल्प भी खुला रखा है।
📍 स्थान: बीकानेर (IGNP मुख्यालय)
🕒 अवधि: 30 सितंबर से 27 जनवरी 2027
📂 नीति: रबी नहर रेगुलेशन
📌 नहर रेगुलेशन के 5 मुख्य बिंदु:
- 5 बारियां तय: 27 जनवरी 2027 तक रबी फसलों की बुवाई व सिंचाई के लिए किसानों को कुल 5 बारियां मिलेंगी।
- पहली बारी का शेड्यूल: 30 सितंबर सुबह 6 बजे से 17 अक्टूबर सुबह 6 बजे तक 4 में से 2 समूहों में चलेंगी नहरें।
- शेष चार बारियां: 17 अक्टूबर से 27 जनवरी तक 3 में से 1 समूह के आधार पर नहरों का संचालन होगा।
- बांधों की विषम स्थिति: पौंग बांध 22 फीट और रणजीत सागर बांध 48 फीट नीचे; कुल 9.62 लाख क्यूसेक-डे पानी निर्धारित।
- छठी बारी की उम्मीद: आगामी महीनों में पानी की आवक सुधरने पर जनवरी 2027 में समीक्षा कर अतिरिक्त बारी दी जा सकती है।
ख़बर बीकानेर। मरुधरा के नहरी अंचल के अन्नदाताओं के लिए जल संकट की चिंताओं के बीच एक बड़ी और बहुप्रतीक्षित राहत भरी खबर आई है। जल परामर्शदात्री समिति की जैसलमेर बैठक में लिए गए निर्णयों और बांधों के जलस्तर की विस्तृत समीक्षा के बाद इंदिरा गांधी नहर विभाग ने रबी फसल वर्ष 2026-27 के लिए सिंचाई पानी का आधिकारिक रेगुलेशन जारी कर दिया है। खाजूवाला, लूणकरणसर, छतरगढ़ और पूगल समेत IGNP प्रथम चरण के इलाकों में पानी की मांग को लेकर उठ रही आवाजों के बीच विभाग का यह फैसला किसानों को बुवाई की ठोस योजना बनाने में मददगार साबित होगा।
बांधों का जलस्तर कम, फिर भी संतुलित प्रबंधन से दी गईं 5 बारियां: मुख्य अभियंता
इंदिरा गांधी नहर परियोजना के मुख्य अभियंता विवेक गोयल ने विस्तृत जानकारी देते हुए बताया कि चालू वर्ष में हिमाचल और पंजाब के कैचमेंट एरिया में मानसून की स्थिति काफी चुनौतीपूर्ण रही। फिलिंग पीरियड के दौरान पौंग बांध का जलस्तर विगत वर्ष के मुकाबले करीब 22 फीट कम दर्ज किया गया, जबकि रणजीत सागर बांध का जलस्तर लगभग 48 फीट नीचे रहा।
उन्होंने बताया कि विषम परिस्थितियों के बावजूद राजस्थान के हिस्से में 9.62 लाख क्यूसेक-डे पानी की उपलब्धता सुनिश्चित हुई है, जो कि रबी वर्ष 2024-25 के लगभग बराबर है। विभाग ने 41.11 प्रतिशत संभावित आवक के फार्मूले पर बेहद वैज्ञानिक और संतुलित रेगुलेशन तैयार किया है, जिससे नई फसल की बिजाई और पुरानी खड़ी फसलों के पकाव दोनों की जरूरतें पूरी हो सकेंगी।
“प्रथम चरण में 30 सितंबर 2026 सुबह 6:00 बजे से 17 अक्टूबर सुबह 6:00 बजे तक नहरें चार में से दो (2/4) समूहों के आधार पर चलाई जाएंगी। इसके बाद 17 अक्टूबर सुबह 6:00 बजे से 27 जनवरी 2027 शाम 6:00 बजे तक बाकी चार बारियां तीन में से एक (1/3) समूह के क्रम में संचालित होंगी।”
जनवरी में दोबारा होगी समीक्षा, कम पानी वाली फसलों की करें बिजाई
मुख्य अभियंता विवेक गोयल ने यह भी स्पष्ट किया कि यदि आने वाले हफ्तों में पर्वतीय क्षेत्रों से पानी की आवक में सुधार होता है, तो जनवरी 2027 के प्रथम सप्ताह में बांधों की स्थिति की दोबारा समीक्षा की जाएगी। यदि अतिरिक्त पानी उपलब्ध हुआ, तो किसानों को एक और अतिरिक्त (छठी) बारी देने पर सकारात्मक निर्णय लिया जाएगा।
इधर, जल संसाधन विभाग ने काश्तकारों से अपील की है कि वे सीमित जल संसाधनों की वास्तविकता को समझते हुए सरसों, चना व तारामीरा जैसी कम पानी की खपत वाली फसलों को प्राथमिकता दें। पानी की उपलब्धता के अनुसार ही बुवाई का रकबा तय करें, ताकि टेल तक के हर किसान को उसके हिस्से का सिंचाई जल समय पर मिल सके।