🗳️ सियासी बवंडर | बीकानेर नगर निगम
बीकानेर नगर निगम में गुरुवार को नवनिर्वाचित महापौर अनिल कल्ला के पदभार ग्रहण समारोह से ठीक पहले कांग्रेस के भीतर जबर्दस्त अंतर्कलह फूट पड़ी है। उपमहापौर चुनाव में पर्याप्त संख्याबल के बावजूद मुस्लिम प्रत्याशी नसीम बानो की अप्रत्याशित हार और वोटों के 50 से गिरकर सीधे 38 पर आ जाने से अल्पसंख्यक समाज में तीव्र आक्रोश है। जिलाध्यक्ष मदन मेघवाल के इस्तीफे की मांग के बीच सवाल उठ रहा है कि क्या पार्टी के कद्दावर मुस्लिम नेता इस आयोजन से दूरी बनाएंगे?
📍 स्थान: नगर निगम, बीकानेर
🕒 अपडेटेड: एक्सक्लूसिव इनसाइड रिपोर्ट
📂 सियासत: पदभार ग्रहण व अंतर्कलह
📌 अंदरूनी घमासान के 5 अहम बिंदु:
- गुरुवार को ताजपोशी: नवनिर्वाचित महापौर अनिल कल्ला विधिवत संभालेंगे नगर निगम की कमान।
- 24 घंटे में वोटों का खेल: मेयर चुनाव में कांग्रेस को मिले 50 मत, लेकिन अगले ही दिन डिप्टी मेयर चुनाव में घटकर रह गए 38।
- नसीम बानो की हार पर उबाल: स्पष्ट संख्याबल के बावजूद मुस्लिम प्रत्याशी के हारने से समाज में भीतरघात का गहरा संदेह।
- इस्तीफों की झड़ी: सोशल मीडिया पर तीखा विरोध, जिलाध्यक्ष मदनगोपाल मेघवाल के इस्तीफे और आलाकमान से जांच की मांग।
- दिग्गजों पर नजरें: पूर्व महापौर मकसूद अहमद और पूर्व नेता प्रतिपक्ष जावेद पड़िहार की मौजूदगी को लेकर सस्पेंस बरकरार।
ख़बर बीकानेर। बीकानेर नगर निगम में कांग्रेस का बोर्ड बनने की खुशी चौबीस घंटे के भीतर ही गंभीर राजनीतिक संकट और अंदरूनी खींचतान में तब्दील हो गई है। ऐतिहासिक 50 वोटों के प्रचंड समर्थन से महापौर निर्वाचित हुए अनिल कल्ला गुरुवार को विधिवत रूप से पदभार ग्रहण करने जा रहे हैं। इस समारोह में पूर्व कैबिनेट मंत्री डॉ. बी.डी. कल्ला सहित तमाम वरिष्ठ कांग्रेस नेता अपनी मौजूदगी दर्ज कराएंगे। लेकिन इस भव्य ताजपोशी के समानांतर, उपमहापौर चुनाव में हुए कथित ‘विश्वासघात’ को लेकर मुस्लिम समाज और कांग्रेस के अल्पसंख्यक कार्यकर्ताओं में भड़का आक्रोश समारोह के रंग में भंग डाल सकता है।
50 से 38 पर कैसे लुढ़के वोट? भीतरघात के आरोपों से गरमाई सियासत
ग़ौरतलब है कि सोमवार को महापौर पद के मतदान में कांग्रेस के अनिल कल्ला को 50 वोट हासिल हुए थे, जिसमें कांग्रेस के अपने 42 पार्षदों के अलावा 8 निर्दलीयों का स्पष्ट समर्थन शामिल था। लेकिन ठीक अगले दिन मंगलवार को जब उपमहापौर पद के लिए मतदान हुआ, तो कांग्रेस प्रत्याशी नसीम बानो के पक्ष में आंकड़ा आश्चर्यजनक रूप से गिरकर महज़ 38 पर सिमट गया।
इस अप्रत्याशित हार ने कांग्रेस के पूरे गणित की पोल खोल दी। कांग्रेस के पास खुद के 42 जीते हुए पार्षद थे, ऐसे में 38 वोट मिलने का सीधा अर्थ यह निकाला जा रहा है कि कांग्रेस के ही कम से कम 4 पार्षदों ने पार्टी व्हिप और निष्ठा को ताक पर रखकर अपनी ही मुस्लिम प्रत्याशी के खिलाफ क्रॉस-वोटिंग की। इस रहस्यमयी गिरावट ने अल्पसंख्यक समुदाय के नेताओं को स्तब्ध कर दिया है और सोशल मीडिया पर कांग्रेस संगठन के खिलाफ मोर्चा खोल दिया गया है।
“सूत्रों के अनुसार, मुस्लिम समाज के नेताओं और कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने शहर जिलाध्यक्ष मदनगोपाल मेघवाल की रणनीतिक विफलता और लापरवाही को जिम्मेदार ठहराते हुए उनके सीधे इस्तीफे की मांग कर दी है। कई पदाधिकारियों ने अपने पदों से इस्तीफे तक की पेशकश कर दी है और पूरे घटनाक्रम की स्वतंत्र निष्पक्ष जांच प्रदेश आलाकमान से करवाने का अल्टीमेटम दिया है।”
डॉ. बी.डी. कल्ला के सामने एकजुटता की चुनौती: क्या मंच पर दिखेंगे मकसूद और जावेद?
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि महापौर चुनाव के दौरान जिस आक्रामकता और तन्मयता से पूर्व मंत्री डॉ. बी.डी. कल्ला ने मोर्चा संभाला था, उपमहापौर के चुनाव में वैसी सक्रियता देखने को नहीं मिली। हालांकि वे मौके पर मौजूद रहे, लेकिन पार्टी प्रत्याशी को हार से नहीं बचा सके। अब गुरुवार को पदभार ग्रहण समारोह के जरिए डॉ. कल्ला पार्टी के सभी वर्गों को एक जाजम पर लाकर आलाकमान को ‘ऑल इज वेल’ का संदेश देने की भरसक कोशिश में जुटे हैं।
इस पूरे घटनाक्रम में सबसे बड़ा यक्ष प्रश्न यह है कि कांग्रेस के टिकट पर जीतकर आए कद्दावर मुस्लिम पार्षद—जिनमें स्वयं पूर्व महापौर मकसूद अहमद (वार्ड 18) और पूर्व नेता प्रतिपक्ष जावेद पड़िहार (वार्ड 55) शामिल हैं—गुरुवार के समारोह में शिरकत करेंगे या समाज के आक्रोश का साथ देते हुए कार्यक्रम का मूक बहिष्कार करेंगे? यदि अल्पसंख्यक नेता इस कार्यक्रम से दूरी बनाते हैं, तो नवनिर्वाचित बोर्ड के पहले ही दिन से कांग्रेस की यह आंतरिक दरार और गहरी होना तय है।