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समझौते की 5 बड़ी बातें:
- अमेरिका और ईरान युद्ध की स्थिति को तुरंत समाप्त करने पर राजी।
- होर्मुज स्ट्रेट को वैश्विक तेल व्यापार के लिए पुनः खोल दिया जाएगा।
- 19 जून को स्विट्जरलैंड के जेनेवा में दोनों देशों के बीच होगी उच्च स्तरीय बैठक।
- ईरान के फ्रीज्ड फंड्स (जमा राशि) को जारी करने पर अमेरिका ने दी सहमति।
- अगले 60 दिनों तक परमाणु कार्यक्रम और प्रतिबंधों पर चलेगी विस्तृत वार्ता।
“जहाजों के इंजन चालू करो”: ट्रम्प का बड़ा संदेश
वाशिंगटन। वैश्विक राजनीति में रविवार का दिन एक नए सवेरे की तरह आया है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने सोशल मीडिया पर इस सफलता का एलान करते हुए लिखा कि ईरान के साथ शांति की राह अब साफ हो गई है। ग़ौरतलब है कि महीनों की जटिल और गोपनीय बातचीत के बाद दोनों महाशक्तियों ने एक समझौते (MoU) को अंतिम रूप दिया है। ट्रम्प ने विशेष रूप से उल्लेख किया कि ईरानी बंदरगाहों पर लगी अमेरिकी नौसैनिक नाकेबंदी तुरंत हटा ली जाएगी। उन्होंने दुनिया भर के जहाजों को संदेश देते हुए कहा, “अपने इंजन चालू कर लो, तेल को फिर से बहने दो।” यह घोषणा वैश्विक बाजार में कच्चे तेल की कीमतों को स्थिर करने में मील का पत्थर साबित होगी।
जेनेवा में 19 जून को ऐतिहासिक हस्ताक्षर
इस समझौते की पुष्टि करते हुए पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ ने बताया कि दोनों देशों के बीच औपचारिक पीस डील पर 19 जून को स्विट्जरलैंड के जेनेवा में हस्ताक्षर किए जाएंगे। यह 47 साल में तेहरान और वॉशिंगटन के बीच होने वाली सबसे हाई-लेवल मुलाकात होगी। इस डील की गहरी समीक्षा करने पर पता चलता है कि इसमें युद्ध विराम, होर्मुज स्ट्रेट को खोलना और ईरान के रोके गए फंड्स की बहाली प्रमुख मुद्दे हैं।
ईरान के उप विदेश मंत्री काजेम गरीबाबादी ने स्पष्ट किया है कि भविष्य की 60 दिनों की वार्ता पूरी तरह से इस बात पर निर्भर करेगी कि अमेरिका अपने वादों को कितनी ईमानदारी से पूरा करता है। विश्लेषण के अनुसार, ईरान की तीन मुख्य शर्तें—नाकेबंदी खत्म करना, सैन्य कार्रवाई रोकना और फ्रीज्ड फंड्स जारी करना—इस शांति प्रक्रिया की रीढ़ हैं। फिलहाल, वैश्विक समुदाय इस समझौते का स्वागत कर रहा है, क्योंकि इससे खाड़ी क्षेत्र में तनाव कम होने की पुख्ता उम्मीद जगी है।
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