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मुख्य अपडेट:
- 25 मई से तीन में से एक ग्रुप को सिंचाई पानी देने का रेगुलेशन हो सकता है जारी।
- हरिके बैराज में जलस्तर बढ़कर 689 फीट हुआ, पानी की आवक में भारी बढ़ोतरी।
- खरीफ सीजन की फसलों (मूंगफली, कपास, ग्वार) की बुवाई के लिए मिलेगी संजीवनी।
- पेयजल स्टोरेज का लक्ष्य पूरा, अब सिंचाई विभाग का पूरा फोकस किसानों पर।
- जून के दूसरे सप्ताह से बीकानेर संभाग में बुवाई का काम पकड़ेगा रफ्तार।
हरिके बैराज में बढ़ा जलस्तर: सिंचाई की राह हुई आसान
बीकानेर। पश्चिमी राजस्थान की जीवनरेखा इंदिरा गांधी नहर परियोजना (IGNP) से अब खेतों की प्यास बुझाने का वक्त आ गया है। ग़ौरतलब है कि पिछले दिनों नहरबंदी के चलते किसान केवल पेयजल आपूर्ति पर निर्भर थे, लेकिन अब हरिके बैराज में पानी की आवक बढ़ने से सिंचाई की उम्मीदें जग गई हैं। सूत्रों के अनुसार, हरिके बैराज पर वर्तमान में जलस्तर 689 फीट दर्ज किया गया है और 22 मई के बाद इसमें निरंतर बढ़ोतरी हो रही है। इस सकारात्मक स्थिति को देखते हुए नहर विभाग के अधिकारियों ने सिंचाई रेगुलेशन की प्रक्रिया को अंतिम चरण में पहुँचा दिया है।
खरीफ की बुवाई को मिलेगा जीवनदान, तफ्तीश जारी
नहर विभाग की तफ्तीश और प्लानिंग के अनुसार, 25 मई से बारी-बारी से विभिन्न समूहों में पानी छोड़ा जाएगा। इससे खरीफ सीजन की प्रमुख फसलों जैसे बाजरा, मोठ, ग्वार, मूंग, मूंगफली और विशेषकर कपास की बुवाई करने वाले किसानों को बड़ी राहत मिलेगी। कृषि विशेषज्ञों का मानना है कि जून के दूसरे सप्ताह से खेतों में बुवाई का काम पूरी तेजी पर होगा।
कृषि विभाग को यह भी उम्मीद है कि इसी दौरान प्री-मानसून की बारिश भी दस्तक दे सकती है, जिससे किसानों को दोहरा लाभ मिलेगा। वर्तमान में विभाग के अधिकारी आईजीएनपी और पंजाब सिंचाई विभाग के साथ लगातार संपर्क में हैं ताकि रेगुलेशन में किसी प्रकार की बाधा न आए। बीकानेर के किसानों ने इस खबर का स्वागत किया है और खेतों की तैयारी शुरू कर दी है।
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