बीकानेर के करमीसर और वार्ड 53-21 में ‘नारकीय’ जीवन: सीवरेज चोक और बिजली-पानी की किल्लत से फूटा जनता का गुस्सा

🚨 जन-समस्या | बीकानेर | प्रशासनिक अनदेखी

बीकानेर के करमीसर और वार्ड 53 व 21 में नागरिक सुविधाओं का बुरा हाल है। सीवरेज जाम की पुरानी समस्या के साथ-साथ भीषण गर्मी में लो-वोल्टेज और पानी की भारी किल्लत ने क्षेत्रवासियों का जीना मुहाल कर दिया है। त्रस्त जनता ने अब नगर निगम प्रशासन से आर-पार की लड़ाई का मन बना लिया है।

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मुख्य समस्याएँ:

  • करमीसर के शेखो की बड़ी गुवाड़ में लंबे समय से सीवरेज लाइन चोक, सड़कों पर गंदा पानी।
  • वार्ड 53 और 21 में ड्रेनेज सिस्टम ध्वस्त होने से आमजन का पैदल चलना हुआ दूभर।
  • भीषण गर्मी में बिजली का ‘लो-वोल्टेज’ बना मुसीबत, इलेक्ट्रॉनिक उपकरण हुए खराब।
  • पानी आने के समय ही बिजली कटौती से घरों तक नहीं पहुँच पा रही जलापूर्ति।
  • महंगे दामों पर निजी टैंकर मंगवाने को मजबूर हुए लोग, प्रशासन से त्वरित राहत की मांग।

  

सीवरेज जाम: बीमारियों के साये में ‘गुवाड़’ के लोग

बीकानेर। शहर की सफाई व्यवस्था और सीवरेज प्रबंधन नगर निगम की उदासीनता के कारण दम तोड़ता नजर आ रहा है। सूत्रों के अनुसार, करमीसर स्थित मोहल्ला शेखो की बड़ी गुवाड़ के निवासी सुल्तान शेख ने बताया कि उनके क्षेत्र में सीवरेज चोक होने की समस्या विकराल हो चुकी है। काफी समय से गंदा पानी सड़कों पर जमा है, जिससे न केवल दुर्गंध फैल रही है बल्कि संक्रामक बीमारियों का खतरा भी बढ़ गया है। स्थानीय निवासियों ने नगर निगम उपायुक्त और प्रशासन से कई बार गुहार लगाई, लेकिन अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई है।

“जब नलों में पानी आने का वक्त होता है, तभी विभाग बिजली काट लेता है। बिना मोटर और प्रेशर के पानी घरों की पहली मंजिल तक भी नहीं पहुँच पा रहा।”

बिजली-पानी का संकट: कांग्रेस ने खोला मोर्चा

शहर जिला कांग्रेस कमेटी के सुभाषपुरा मंडल अध्यक्ष अब्दुल रहमान लोदरा ने भी वार्ड नंबर 53 और 21 के बदतर हालातों पर चिंता जताई है। लोदरा ने कहा कि सीवरेज समस्या के साथ-साथ इन दिनों लो-वोल्टेज ने मोहल्लेवासियों की कमर तोड़ दी है। वहीं, स्थानीय निवासी बबलू खान ने बताया कि प्रेशर कम होने की वजह से लोग अपनी प्यास बुझाने के लिए महंगे दामों पर निजी टैंकर खरीदने को मजबूर हैं।

हालाँकि, जिला प्रशासन द्वारा समय-समय पर टैंकर भेजे जा रहे हैं, जिसे जनता ने सराहा है, लेकिन पानी की मात्रा जरूरत के मुकाबले ऊँट के मुँह में जीरा साबित हो रही है। इस पूरे प्रकरण की तफ्तीश करने पर यह साफ हुआ है कि विभागों के बीच आपसी समन्वय की कमी का खामियाजा आम आदमी को भुगतना पड़ रहा है। क्षेत्रवासियों ने चेतावनी दी है कि यदि जल्द ही सीवरेज की सफाई और बिजली-पानी की नियमित आपूर्ति बहाल नहीं हुई, तो वे उग्र प्रदर्शन करेंगे।



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