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📍 झझू गांव, बीकानेर
🌸 एक रुपया रोज़ सेवा संस्था
📌 कार्यक्रम के मुख्य बिंदु
- ▶ शिक्षिका श्रीमती अंजुमन आरा ने झझू गांव (बीकानेर) में पेश की मानवता और सेवा की एक बेहतरीन मिसाल
- ▶ स्वास्थ्य सेवा: राजकीय आयुर्वेदिक औषधालय (झझू) को मरीज़ों की सहूलियत के लिए ‘शुगर जांच उपकरण’ भेंट किए
- ▶ शिक्षा व संस्कृति: राजकीय उच्च प्राथमिक विद्यालय (सेठियाबास) के बच्चों को ग्यारह ‘फैंसी ड्रेस’ उपहार में दीं
- ▶ पूर्व योगदान: शिक्षिका अंजुमन आरा इससे पहले भी स्कूल के सभी विद्यार्थियों को परिचय पत्र (आई-कार्ड) उपलब्ध करवा चुकी हैं
- ▶ सामाजिक जुड़ाव: वे बीकानेर की अग्रणी संस्था ‘एक रुपया रोज़ सेवा संस्था’ की वरिष्ठ उपाध्यक्ष के पद पर भी कार्यरत हैं
बीकानेर / झझू। कहते हैं कि जब शिक्षा और समाजसेवा का एक साथ संगम होता है, तो समाज की सूरत और सीरत दोनों बदल जाती हैं। ऐसा ही कुछ कर दिखाया है बीकानेर जिले की एक समर्पित और जागरूक शिक्षिका श्रीमती अंजुमन आरा ने। उन्होंने अपने मानवीय और सामाजिक सरोकारों को बखूबी निभाते हुए एक ही दिन में स्वास्थ्य और शिक्षा दोनों क्षेत्रों में अपना बहुमूल्य योगदान दिया है, जिसकी पूरे इलाके में जमकर तारीफ हो रही है।

🏥 औषधालय को दी ‘शुगर जांच’ मशीन
प्राप्त जानकारी के अनुसार, ग्रामीण क्षेत्रों में अक्सर प्राथमिक स्वास्थ्य सुविधाओं की कमी देखी जाती है। इसी समस्या को समझते हुए श्रीमती अंजुमन आरा ने झझू गांव में स्थित राजकीय आयुर्वेदिक औषधालय का रुख किया।
उन्होंने वहां के चिकित्सा प्रभारी और स्टाफ को मधुमेह (डायबिटीज) के मरीजों की तुरंत और सटीक जांच के लिए ‘शुगर जांच उपकरण’ (ग्लूकोमीटर और स्ट्रिप्स) भेंट किए। इस नई सुविधा के मिलने से अब ग्रामीण इलाके के गरीब और असहाय मरीजों को अपनी शुगर जांच के लिए दूर शहर नहीं जाना पड़ेगा और उनका सही समय पर उपचार (इलाज) शुरू हो सकेगा।
स्कूली बच्चों के चेहरों पर लाईं मुस्कान
चिकित्सा के बाद शिक्षिका अंजुमन आरा ने शिक्षा के मंदिर का रुख किया। वे झझू क्षेत्र के सेठियाबास स्थित राजकीय उच्च प्राथमिक विद्यालय पहुंचीं। वहां आयोजित होने वाले आगामी सांस्कृतिक कार्यक्रमों और प्रतियोगिताओं में बच्चों को प्रोत्साहित करने के लिए उन्होंने अपनी तरफ से ग्यारह आकर्षक ‘फैंसी ड्रेस’ विद्यालय प्रशासन को उपलब्ध करवाईं।
नई और रंग-बिरंगी वेशभूषाएं पाकर ग्रामीण बच्चों के चेहरे खुशी से खिल उठे। विद्यालय के शिक्षकों ने कहा कि इन फैंसी ड्रेसेस से बच्चों में रचनात्मकता, आत्मविश्वास और विद्यालय की सांस्कृतिक गतिविधियों के प्रति भारी रुचि पैदा होगी। ग़ौरतलब है कि बच्चों के हित में यह उनका पहला कदम नहीं है; श्रीमती अंजुमन आरा इससे पूर्व भी अपने खर्चे पर विद्यालय के सभी विद्यार्थियों को ‘परिचय पत्र’ बनवाकर दे चुकी हैं, ताकि बच्चों में विद्यालय के प्रति जुड़ाव और अनुशासन बना रहे।
“इस गरिमामयी और सादे समारोह के दौरान डॉक्टर जय प्रकाश गोयल, करणी सिंह, मदन सिंह, अरुणा रावता, परवीन बेगम एवं दाऊद मोहम्मद सहित गांव के कई अन्य गणमान्य नागरिक मौजूद रहे। वहां उपस्थित सभी लोगों ने शिक्षिका के इस निस्वार्थ सेवा कार्य की भूरि-भूरि प्रशंसा की और इसे पूरे समाज के लिए एक ‘प्रेरणादायक पहल’ करार दिया।”
‘एक रुपया रोज़ सेवा संस्था’ से जुड़ी हैं शिक्षिका
उल्लेखनीय है कि श्रीमती अंजुमन आरा केवल एक शिक्षिका ही नहीं हैं, बल्कि वे बीकानेर शहर में समाज सेवा के क्षेत्र में एक अग्रणी और चर्चित संस्था ‘एक रुपया रोज़ सेवा संस्था’ की वरिष्ठ उपाध्यक्ष के रूप में भी अपनी सक्रिय सेवाएं दे रही हैं। यह संस्था लगातार स्वास्थ्य, पर्यावरण और शिक्षा के क्षेत्र में निस्वार्थ भाव से कार्य कर रही है। उनका यह कदम इस बात का प्रमाण है कि यदि कोई व्यक्ति ठान ले, तो वह अपने छोटे से प्रयास से भी समाज में बहुत बड़ा और सकारात्मक बदलाव ला सकता है।
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🌸 ख़बर बीकानेर (Editorial Note)
यह सकारात्मक और प्रेरणादायक समाचार ‘एक रुपया रोज़ सेवा संस्था, बीकानेर’ द्वारा जारी की गई आधिकारिक प्रेस विज्ञप्ति पर आधारित है। ‘ख़बर बीकानेर’ की पूरी टीम ग्रामीण क्षेत्रों में स्वास्थ्य और शिक्षा को बढ़ावा देने के लिए शिक्षिका अंजुमन आरा द्वारा उठाए गए इस शानदार कदम की हार्दिक सराहना करती है। ऐसे ही नेक कार्य समाज को एक नई और बेहतरीन दिशा देते हैं।
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