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📍 नई दिल्ली
💻 डिजिटल इंडिया
📌 खबर के मुख्य बिंदु
- ▶ भारत में यूनिफाइड पेमेंट्स इंटरफेस (यूपीआई) ने रचा इतिहास, मार्च महीने में बनाए सबसे बड़े रिकॉर्ड
- ▶ महज़ एक महीने के भीतर पंद्रह सौ तीन (1503) करोड़ से भी ज्यादा ऑनलाइन लेन-देन किए गए
- ▶ इस दौरान यूपीआई के जरिए कुल उन्नीस लाख पचास हजार करोड़ रुपये (साढ़े उन्नीस लाख करोड़) का भारी-भरकम भुगतान हुआ
- ▶ तेज़ विकास: वार्षिक ग्रोथ में तेईस प्रतिशत का उछाल आया, और ग्रामीण इलाकों में सैंतीस प्रतिशत की भारी वृद्धि देखी गई
- ▶ भारत की यह डिजिटल तकनीक अब सिंगापुर, संयुक्त अरब अमीरात और नेपाल जैसे अन्य कई देशों में भी अपनी पैठ बना रही है
नई दिल्ली। भारत ने आज पूरी दुनिया को अपनी तकनीकी (डिजिटल) ताकत का एहसास करा दिया है। कभी नकदी (कैश) पर पूरी तरह निर्भर रहने वाले भारत में आज सड़क किनारे सब्जी बेचने वाले से लेकर बड़े-बड़े मॉल तक, हर जगह लोग अपने स्मार्टफोन से बेधड़क भुगतान कर रहे हैं। इसी ‘डिजिटल क्रांति’ का नतीजा है कि भारत के यूनिफाइड पेमेंट्स इंटरफेस (यूपीआई) ने मार्च महीने में लेन-देन (ट्रांज़ैक्शन) का एक ऐसा पहाड़ खड़ा कर दिया है, जिसे छूना फिलहाल दुनिया के किसी भी अन्य देश के लिए नामुमकिन सा लगता है।
🛑 1500 करोड़ का जादुई आंकड़ा पार
राष्ट्रीय भुगतान निगम (एनपीसीआई) द्वारा जारी किए गए ताज़ा और आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार, मार्च महीने में यूपीआई के ज़रिए पंद्रह सौ तीन (1503) करोड़ से अधिक बार पैसों का लेन-देन किया गया।
यह यूपीआई के इतिहास में अब तक का सबसे बड़ा और ऐतिहासिक आंकड़ा है। इस भारी-भरकम संख्या के ज़रिए कुल मिलाकर साढ़े उन्नीस लाख करोड़ रुपये की धनराशि एक खाते से दूसरे खाते में सुरक्षित तरीके से ट्रांसफर की गई। इस आंकड़े ने साबित कर दिया है कि यूपीआई अब भारतीय अर्थव्यवस्था की सबसे मजबूत रीढ़ की हड्डी बन चुका है।
आखिर कैसे बना यह ऐतिहासिक रिकॉर्ड? 3 बड़े कारण
इस महा-विस्फोट (तेज़ बढ़त) के पीछे मुख्य रूप से तीन बड़े कारण माने जा रहे हैं:
पहला कारण (छोटे भुगतान में तेज़ी): दो सौ से पांच सौ रुपये तक के रोज़मर्रा के छोटे-मोटे खर्चों के लिए ‘यूपीआई लाइट’ की लोकप्रियता एकदम से दोगुनी हो गई है। लोगों को अब अपनी जेब में छुट्टे पैसे रखने की कोई जरूरत महसूस नहीं होती।
दूसरा कारण (क्यूआर कोड का जाल): आज देश के हर कोने— चाय की टपरी से लेकर टैक्सी, बस, और अस्पतालों तक— क्यूआर कोड की सुविधा मौजूद है। स्कैन करो और पैसा चुकाओ, इस आसान सुविधा ने हर वर्ग को अपनी ओर आकर्षित किया है।
तीसरा कारण (डिजिटल इंडिया मिशन): सरकार के लगातार प्रयासों से अब शहरों के साथ-साथ सुदूर ग्रामीण इलाकों में भी सैंतीस प्रतिशत की ज़बरदस्त वृद्धि दर्ज की गई है। गांव के लोग भी अब इंटरनेट और स्मार्टफोन के ज़रिए डिजिटल साक्षर (जागरूक) हो रहे हैं।
“इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय ने इस शानदार उपलब्धि पर खुशी जताते हुए कहा है कि, ‘यूपीआई न केवल भारत की नई पहचान बन गया है, बल्कि आने वाले वर्षों में इसकी क्षमता और पहुंच और भी व्यापक (बड़ी) होगी।'”
जल्द आने वाली हैं कई और शानदार सुविधाएं
राष्ट्रीय भुगतान निगम (एनपीसीआई) यहीं रुकने वाला नहीं है। विभाग ने स्पष्ट किया है कि ग्राहकों की सुविधाओं को और अधिक बढ़ाने के लिए जल्द ही कई नए और आधुनिक फीचर्स लॉन्च किए जाएंगे। इनमें बिना इंटरनेट और पिन के ‘यूपीआई टैप एंड पे’, बैंक खाते में पैसे न होने पर भी भुगतान करने के लिए ‘क्रेडिट लाइन’, और फिंगरप्रिंट व चेहरे से भुगतान के लिए ‘बायोमेट्रिक आधारित पेमेंट’ जैसी अत्याधुनिक सुविधाएं शामिल हैं।
गर्व की बात यह है कि भारत की यह सफल स्वदेशी तकनीक अब अपनी सीमाएं लांघकर विदेशों में भी झंडे गाड़ रही है। संयुक्त अरब अमीरात, सिंगापुर, नेपाल, भूटान और श्रीलंका जैसे कई देशों ने भारतीय यूपीआई को अपना लिया है, जिससे विदेशों में जाने वाले भारतीय यात्रियों और वहां के व्यापारियों को लेन-देन में बहुत बड़ी सहूलियत मिल रही है। आर्थिक जानकारों और विशेषज्ञों का पक्का अनुमान है कि इसी रफ्तार से चलते हुए अगले महज़ दो वर्षों के भीतर यूपीआई का यह आंकड़ा प्रति माह दो हज़ार करोड़ ट्रांज़ैक्शन की ऐतिहासिक सीमा को भी पार कर जाएगा।
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📝 ख़बर बीकानेर (Editorial Note)
यह अत्यंत सकारात्मक और गौरवपूर्ण समाचार राष्ट्रीय भुगतान निगम (एनपीसीआई) और भारत सरकार के आईटी मंत्रालय द्वारा जारी किए गए ताज़ा आधिकारिक आंकड़ों (मार्च महीने के डेटा) पर आधारित है। ‘ख़बर बीकानेर’ की टीम देश के इस अभूतपूर्व डिजिटल विकास और आम नागरिकों की बढ़ती डिजिटल जागरूकता की हार्दिक सराहना करती है। तकनीकी आंकड़ों या नई सुविधाओं में भविष्य के सरकारी अपडेट्स के अनुसार इस खबर को संशोधित किया जा सकता है।
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