📅 ताज़ा ख़बर
📍 बीकानेर / जयपुर
📚 शिक्षा निदेशालय
📌 खबर के मुख्य बिंदु
- ▶ प्रारंभिक शिक्षा निदेशक ने सभी DEO को 23 मार्च 2026 को जयपुर बुलाया
- ▶ 15 से कम (प्राथमिक) और 25 से कम (उच्च प्राथमिक) छात्र वाले स्कूल होंगे मर्ज
- ▶ विभाग ने राज्य भर में करीब 7,000 ऐसे स्कूलों की सूची चिन्हित की है
- ▶ पिछले 2 सालों में 405 शून्य या न्यून छात्र संख्या वाले स्कूल मर्ज हो चुके हैं
- ▶ शिक्षक संघ ने कहा: मर्ज किए गए स्कूलों का सरप्लस स्टाफ बिना काम वेतन ले रहा है


बीकानेर / जयपुर। राजस्थान के सरकारी स्कूलों के ढांचे में एक बड़ा बदलाव होने जा रहा है। राज्य में प्रारंभिक शिक्षा के अंतर्गत आने वाले प्राथमिक (Primary) तथा उच्च प्राथमिक (Upper Primary) स्कूलों में शून्य अथवा न्यून छात्र संख्या वाले स्कूलों को अब पास के दूसरे बड़े और सुरक्षित स्कूलों में ‘मर्ज’ (समेकित) करने की कवायद तेज कर दी गई है।
इस संबंध में प्रारंभिक शिक्षा निदेशक ने एक सख्त और महत्वपूर्ण निर्देश जारी किया है। निदेशक ने प्रदेश के सभी प्रारंभिक शिक्षा के जिला शिक्षा अधिकारियों (DEO) को आगामी 23 मार्च 2026 को आवश्यक बैठक के लिए जयपुर तलब किया है।
23 मार्च की बैठक: क्या हैं निर्देश?
शिक्षा विभाग द्वारा जयपुर बुलाई गई इस बैठक में सभी जिला शिक्षा अधिकारियों को पूरी तैयारी के साथ आने को कहा गया है। उनसे स्पष्ट रूप से कहा गया है कि वे अपने-अपने जिलों में:
- प्राथमिक स्कूल (कक्षा 1 से 5): जहां छात्रों की संख्या 15 से कम है।
- उच्च प्राथमिक स्कूल (कक्षा 6 से 8): जहां छात्रों की संख्या 25 से कम है।
इनकी सूची तैयार करें। साथ ही, उनके निकट स्थित किसी दूसरे सुरक्षित भवन वाले स्कूल की भी जानकारी लाएं, जहां इन बच्चों और स्कूलों को आसानी से मर्ज (Merge) किया जा सके।
🏫 7,000 स्कूल हुए चिन्हित
विभागीय सूत्रों के अनुसार, बीकानेर निदेशालय द्वारा भेजे गए निर्देशों के साथ ऐसे स्कूलों की सूची भी संलग्न कर जारी की गई है। बताया जा रहा है कि पूरे राज्य में लगभग 7000 स्कूल ऐसे चिन्हित किए गए हैं, जो मर्ज होने की कगार पर हैं।
गौरतलब है कि पिछले दो वर्षों में शून्य अथवा न्यून छात्र संख्या वाले 405 स्कूलों को पहले ही पास के स्कूलों में मर्ज किया जा चुका है।
क्यों हो रही है यह कवायद?
राज्य के सरकारी स्कूलों में एक अजीब विरोधाभास देखने को मिल रहा है। जहाँ एक ओर हजारों स्कूलों में छात्र संख्या बेहद कम है या बिल्कुल नहीं है, वहीं दूसरी ओर कई स्कूलों में क्षमता से अधिक छात्र पढ़ रहे हैं और वहां शिक्षकों की भारी कमी है।
शिक्षा विभाग की इस कवायद का मुख्य उद्देश्य यह है कि कम छात्र संख्या वाले स्कूलों के बच्चे नए और बेहतर सुविधाओं वाले स्कूलों में जाकर पढ़ाई करें। साथ ही, इन बंद/मर्ज होने वाले स्कूलों में कार्यरत ‘सरप्लस (अतिरिक्त) शिक्षकों’ को उन स्कूलों में भेजा जा सकेगा जहां शिक्षकों की वास्तविक आवश्यकता है। इससे बच्चों की पढ़ाई भी सुधरेगी और शिक्षकों का समान वितरण हो सकेगा।
“बिना उचित कैलेंडर के जुलाई 2025 में मर्ज किए गए स्कूलों का सरप्लस स्टाफ बिना काम के वेतन ले रहा है।”
— राजस्थान प्राथमिक एवं माध्यमिक शिक्षक संघ
शिक्षक संघ ने उठाए सवाल
इस फैसले पर राजस्थान प्राथमिक एवं माध्यमिक शिक्षक संघ ने कुछ अहम सवाल खड़े किए हैं। संघ का कहना है कि हर वर्ष प्रवेश प्रक्रिया पूरी होने के बाद अगले ही महीने छात्र संख्या शून्य अथवा न्यून होने की समीक्षा होनी चाहिए। साथ ही, उन्हें मर्ज करने वाले स्कूलों के नाम और वहां कार्यरत स्टाफ को सरप्लस मानकर आवश्यकता वाले स्कूलों में लगाने का एक ‘स्थायी कैलेंडर’ जारी किया जाना चाहिए।
शिक्षक संघ ने आरोप लगाया है कि ऐसा कोई निश्चित कैलेंडर तथा स्थाई निर्णय नहीं होने के कारण, जुलाई 2025 में जिन स्कूलों को मर्ज किया गया था, वहां का सरप्लस स्टाफ आज भी बिना काम (कक्षा लिए बिना) के वेतन ले रहा है। अब 23 मार्च को जयपुर में होने वाली इस बैठक से बड़े फैसले आने की उम्मीद है।
📝 संपादकीय नोट (Editorial Note)
यह एक्सक्लूसिव रिपोर्ट विश्वसनीय स्रोतों एवं शिक्षा निदेशालय/विभाग से प्राप्त आधिकारिक जानकारी के आधार पर तैयार की गई है। 23 मार्च की बैठक के बाद कोई भी नया दिशा-निर्देश या स्कूलों की आधिकारिक सूची (List) जारी होने पर ख़बर बीकानेर द्वारा इस खबर को तुरंत अपडेट किया जाएगा।
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